छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Sunday, June 25, 2006

भाग-दो

कामदेव के जूट मिल के काम म मन नई लगय, ऐती ओती घूमत रहय । एक दिन घूमत-घामत कया घाट चल देथे । केलो नदी के तट म समसान (मुक्ति धाम) के पीछू बने घाट म बईठे रहय । केलो नदी के पानी म गोटी मारय । साफ, सुन्दर, निर्मल जल बहत रहय । मछरी मन खाय के जीनिस जान के टप ले पास आवय, फेर गोटी ह पानी म डूब जावय । देखते-देखते हजारों मछरी तउड़े लगिन । कामदेव पास म पड़े चाउर, गेंहू ल बिनके मुठा भर फेंकिच । मछरी मन कूद-कूद के, उछल-उछल के खाय लगिन । कामदेन के मन म दया भाव उठिच । मरघट म एक अघोरी बाबा रहय, ओहा देखके कामदेव ल बुलाथे । बाबू तोला देखथंव त एक हप्ता ले जाता दिन ले आवत हच । तोर काम करे म मन नई लगत हे, का बात हे बता । नहीं त मंय बता देहंव । औघड़ बाबा कईथे, बुचवा तोर किस्मत म भटकना लिखे हे । तय अपन काम ले खुस नई हस । जूट मिल में हड़ताल होने वाला हे, कुछ दिन के बाद रायगढ़ सहर छोड़ देबे । एक बड़े मजदूर लीडर से मुलाकात हो ही, तब तोर किस्मत चमकही । ओही ह तोर जीवन के उद्धार करही, तंय ह बड़े मजदूर नेता बन जाबे ।

कामदेव पूछिथे, अऊ का होही बाबा जी । आज एक बड़े संत के चेला बन जाबे । तोर लक्छन तो साधु संयासी बने के हे, फेर कुछ दिन के बाद म ओ नेता हर आही । मन के सांति पर एक ठन ताबीज देथंव । पूजा करके आज पहिन लेबे । कामदेव ल कईथे, मन निरास मत कर । बढ़िया सोंच, तभे तोर भाग ह चमकही । औघड़ बाबा के पास अपन भविष्य ल जाने बर थोड़ बहुत रोगी मन ल दूर करे बर आय लगिन, बाबा के परसिद्धि ह दूर-दूर तक फईल गे । बाबा ह गरीब दीन दुखिया के सेवा करे बर कहय । जो भी दान दक्षिना म मिलय, गरीब ला बाँट देय । कोई भक्त मन रात म दार, भात लाके दे देवय, ओला खा लेवय । औघड़ बाबा मस्त रहय । कामदेव रोजिना आय लगिच, बाबा के भक्त बन जाथे । कुछ दिन वहाँ रूके के बाद सोगड़ा आसरम चले के तियारी म रथे ।

रामदेव पुस्पा भउजी ल लेके औधड़ बाबा के पास जाथे । बाबा ल कईथे, बहुत दुःखी महिला ये । एकर पति ह भोपाल म दूसर ला रख ले हे । तीन लड़की हे, लड़का एको ठन नई ये, पुस्पा के बच्चा नई होय ये । बाबा जी कईथे बच्चा, पुस्पा माँ बनने वाली हे । मय झाड़ फूक देता हूँ, बाहरी ताकत येला परेशान करत रहिस-तय ह येकर दुःख ल दूर कर देहय, माता के पुत्र होही । पुस्पा पुत्र के आसीरबाद लेके घर आ जाथे । रामदेव ह रमौतीन ल बताथे कि भउजी के बेटा होने वाला हे । बाबा जी ह बताय हे । रमौतीन कईथे महुं ह तीन महीना होगे माहतारी घुचे, रामदेव ल बहुत खुसी होथे कि मय बाप बन जाहंव । बिसाहू अऊ बिसाहिन, टेटकी, अऊ कामदेव सुन के बहुत परसन हो जाथे । बिसाहिन कईथे , लईका के किलकारी घर म गुँजही । टेटकी नाचे लगथे । रमौतीन के माथा ल चुम लेथे । भउजी मोला पहली काबर नई बताये ।

दूसर दिन पुस्पा ह रमौतीन ल भेंट खातिर ओकर घर जाथे । पुस्पा कईथे मोर तीन महीना होगे हे महीना घुचे । तीन महिना पहिले पांड़े जी आय रहिच । चिट्ठी लिख के खुसखबरी भेज देय हंव, आहय त बने नई आय त बने । रमौतीन कईथे, दीदी अकेला कईसे रहिथस । अतक बड़ जिनगी हे । पुस्पा कईथे, बहिनी चालीस बरस कटगे, बाकी उमर भी कट जाहय । मोर ससुर ह सात महिना बाद सेवा निवृत होने वाला हे । साठ बरस होगे हे । बीमार जादा रहिथे । रामदेव बाबू ह मालिस कभू-कभू कर देथे । अकेला भूतनी जईसे पड़े रहथव । नगरपालिका के स्कूल म सिक्छिका हंव । दिन म काम करे चले चाथव । रात बैरी ह बहुत मुस्किल से कटथे । मोर भतीजी हे छोटे हे कक्षा पाँचवी पढ़त हे । का बतावव रमौतीन भरी जवानी म मय विधवा बने हावंव । का कमी हावय मोर म । मय चांहव त दस झन टूरा मन ल चला देहव । महुं ह तो अन्न खाथव । मोरो तो जरूरत हे । एक स्त्री ल दस पुरूस ले जादा सक्ति देय हे भगवान हर । दस के बरोबर एक स्त्री के आवश्यकता हे । कई बार तो सोचथव फांसी लगा के मर जांव । फेर मन नहीं कथे, काबर अपन जिनगी ल खराब करंव ।

पुस्पा रमौतीन ल अपन दुःख के पहाड़ ल बताईच । रमौतीन के आँखी ल आँसू आ जाथे । पुस्पा के आँसू के गंगा फूट जाथे, रोवत-रोवत बताथे, कई झन सगा मन ऐती ओती बात फैला देय हे के ससुर के संबंध हे, काबर ससुर अऊ बूह एके घर म रईथे । ससुर बिचारा बीमार एक कमरा म पड़े रथे । चपरासी मन सेवा जतन करत रथे । यदि मय छोड़ देहंव, तो कोई नईये । मोर सास के मउत पाँच साल पहिली होगे हे । रमौतीन डिलवरी एके संग होवब । रमौतीन कईथे दीदी चाय पीके जाव । लउहा चाय बना के ले आथे । बिसाहिन कहिथे, महराजिन कभू-कभू घर आ जाय कर । पांड़े महराज के हमर ऊपर बहुत करजा हे । रामदेव ल नौकरी लगाय हे । पुस्पा कईथे जाथंव बहिनी संझा होगे ।

नव महीना म रमौतीन के पेठ बने निकरे रहय । देखईया मन कहय दो बच्चा पेट म हो ही । रमौतीन चल फिर नई सकय । टेटकी ह चलावय, नहवावय, भात खवावय । पूरा नरम के काम करय । टेटकी ह रमौतीन ल कहय भउजी टूरी हो ही तोर सही । रमौतीन कहय तोर भईया जईसे बेटा चाही । टेटकी कईथे, दो चार दिन में पता हो जाही । रमौतीन के प्रसव पीड़ा गम गमाव सुरू होगे । बिसाहिन अऊ टेटकी प्रसव के पीरा जानत रहय । जचकी के सबो समान तियारी करके रखे रहय । पुस्पा धरम अस्पताल म चार दिन पहिले से भरती हो गय रहय । पूनम के दिन सुबह पाँच बजे प्रसव पीरा जोरदार होईच । नरस मन कईथे, दीदी बने जोर से धक्का दे, लईका के मुँह ह दिखत हे । पुस्पा के पीरा बढ़ जाथे, पुस्पा ह जोर से चिल्लाथे ऐ माँ, जोर के धक्का देथे । लईका गर्भ से बाहर आ आ जाथे । नरस बाई मन लईका न नहा धोके तियार कर लगथे । पुस्पा पसीना ले तर बतर हो गये रहय । सांस भी फूलगे रहय । आधा घंटा म ठीक होईच । नरस बाई कहिथे । बेटा होय हे, नरस बाई ह धन्यवाद देथे । जादा उमर के बच्चा ये । थोड़ा कमजोर पैदा होय रहय । दूसर दिन रामदेव ल पता चलिच । पुस्पा ल बधाई दिच । ओहू ह रामदेव ल बधाई दिच । ये तो आपके सहयोग से बाबा जी के आसीरबाद से होय हे ।

रमौतीन के प्रसव ह रूक-रूक के आवत रहय । रामदेव कईथे पुस्पा भउजी के अस्पताल म बेटा होये हे । रमौतीन खुस हो जाथे । रमौतीन के दुःख ह बाद मे रहय । न खात बनय, न सोवत । टेटकी कईथे भउजी ये लईका रेगांवत हे । बड़े आदमी, नेता बनही । बड़ दुःख देत हे । रमौतीन के पहिली डिलेवरी रहय, डरत रहय । दूज के बिहन्चे साढ़े पाँच बजे रमौतीन के पीरा ह बाढ़िच । सुईन कईथे बेटी थोड़ कन जोर से धक्का दे । रमौतीन ए दाई कहके जोर से धक्का दिच । बच्चा होगे । सुईन ह बच्चा के साफ सफाई करिच । नया ब्लेड म नेरवा (नाल) ल काटिच रमौतीन के हाय जीव होईच । हल्का लगिच । सुईन बताईच बेटी होय हे । बिसाहिन, टेटकी, ह मुँह देके मुँह मीठा करिन । रामदेव ल टेटकी ह कहिच भईया मोर बक्सीस देवे त बताहूँ । भईया बढ़िया सुन्दर बेटी, लक्ष्मी जनम होये हे । घर म खुसी के ठिकाना नई रहय ।

बिसाहू ह अपन सगा बिरादर अऊ मनटोरा ल, छट्ठी के नेवता दे रहय । रमौतीन छः दिन में नहा धाके तियार होय । बिसाहिन कईथे बहू घर के देवता ल अगरबत्ती, धूप जला के पूजा करथे । टेटकी ह संग म रहय । टेटकी कहिच भउजी सुन्दर दिखथच । रमौतीन कईथे तय पगली हो गय, भला जचकी होय के बाद स्त्री मन सुन्दर दिखही । टेटकी कईथे भौजी तोर रंग म पियर रंग सोने म सुहागा जैसे चमकत हे । अभी ठीक होये म तीन महीना लगही । रामदेव अऊ कामदेव मन अपन-अपन मितान मन ल नेवता देय रहय । रमौतीन सबके पाँव पड़के आशीरबाद माँगिच । दो चार बेटा के दाई बन जाव ।

रामदेव ह छट्ठी म मितान मन ल मस्त दारू, बीड़ी, मुर्गा खवाईच । कामदेव ह कका बने के खुसी म छक के दारू पीईच । छट्ठी म आय पहुँना, सगा मन ल कांके पानी पिलाईन । महिला मन सोंठ, तिली, अलसी के लड्डू खवाईन । दार, भात, मुनगा, बरी के सब्जी पकाय रहय । टेटकी ह रमौतीन भउजी ल खाना परोसिच, बढ़िया स्वादिष्ट खाना बने रहय । मस्त दार, मुर्गा खाके सगा मन अपन-अपन घर चल देथे ।

पुस्पा के माइके ले दाई, भउजी, फूफू, बहिनी आय रहय । बारा दनि म बरही नहाईच । अवधराम पांड़े ह बड़ा जोरदार पार्टी दिच । काबर नई देतिच बहुत दिन के बाद घर म लईका के किलकारी अऊ दादा बने के खुशी म नाचत झूमत रहय । नाती ल गोदी म लेके कुलकत रहय । मोर बंस ल कुल ल चलाय घर आय हे कहिच । पुस्पा तो अपार खुसी म रहय । पुस्पा ह चालीस के उमर म भगवान हे चिनहे रहय । घर परिवार, सगा संबंधी मन खुस हो गिन । अवधराम जी नगरपालिका के कर्मचारी मन ल लड्डू बंटवाईन । सबो पारसाद अऊ अधिकारी मन ल जोरदार पारटी दिच । पांड़े जी के सोर रायगढ़, सहर म होगे । पुस्पा तीन महिना के छुट्टी ले लिच । तीन महिना म बेटा बढ़िया स्वस्थ हो गिच ।

पुस्पा तीन महीना के बाद नौकरी म जाय लगिच । घर म कोनो नई रहय, काकर संग छोड़य । एक दू दिन तो स्कूल संग म ले जाय । पर लईका ह बहुत रोवय । बहन जी चंदादेवी सलाह दिच कि लईका पवईया नौकरानी रख ले । पुस्पा कईथे ठीक कहत हव कईथे, पर कोई नौकरानी नई मिलिच । एक दिन पुस्पा रामदेव के घर लईका ल लेके गईच । बढ़िया स्वस्थ टूरा रहय । चिकना, करिया चमकत रहय । टेटकी, रमौतीन बारी-बारी से गोदी म उठाये । लईका चुप होके हांसय खेले लगिच ।

पुस्पा कईथे मोला लईका धरईया नई मिलत हे । टेटकी तय धरबे का । तोला बीस रूपिया महीना दे देहंव । रमौतीन कईथे, दीती मंहू त घर म रहितंव । दूनो लईका ल देख लेहंव । रामदेव, बिसाहिन कहिथे । ठीक हे । काल ले काम जोवे त छोड़ देवे अऊ ओती ले आबे त ले जाय कर । दूसर दिन पुस्पा ह लड़की बर फ्राक, झबला, टोपी, कुरता, अऊ जतका भेंट, उपहार म मिले खिलौना ल लेके आ जाथे । बेटा ल छोड़के काम म चले जावय । रमौतीन ह अपन बेटी ल एक थल ल, बेटा ल दूसर थल ले दूध पिलावय । दूनों लईका के अच्छा परवरिस होये लगिच । पुस्पा ह अपन तनखा के आधा पईसा रमौतीन ल दे देवय । घर के हालत भी ठीक होगे । पुस्पा के लईका भी ल माँ पिता, दादा, दादी, बुआ के सुख मिल जथे । रमौतीन अपन सगा बेटी से जादा बेटा ल मानय। लईका बने-बने म स्वस्थ सुन्दर दिखे लगिच ।

पुस्पा ह पंचांग देखके नाम धरे के मुहरत निकालथे । रमौतीन, टेटकी, रामदेव ल कईथे, मोर बेटा ह पूनम के दिन होये हे । ऐकर नाव चन्द्रप्रकाश रखत हंव । तोर बेटी ह मंगलवार दूज के दिन होहे वोकर नांव चन्द्रकला ठीक हे । रमौतीन, बिसाहिन, टेटेकी कईथे, तंय जउन नाव धर दे ओही नांव ह सही हे । काबर बेटी ल तोर सही पढ़ाहंव, लिखाहंव अऊ नौकरी कराहंव । मोर बेटी ल पढ़ाय के जवाबदारी तोर हे, तंय मोर बेटी ल गोदी ले ले । पुस्पा कईथे मोर भाग जाग गे, एक बेटा अऊ एक बेटी पा गेंव । अब मोर जिनगी कट जाही । दूनों के मुँह देख-देख के कट जाही जिनगी । रामदेव कभू-कभू पांड़े जी ल तेल मालिस करे बर चल देय ।

सात महीना के बाद अवधराम पांड़े ह सक्रेटरी के पद ले रिटायर हो जाथे । जो रासि मिले रईथे, ओला बैंक म चन्द्रप्रकास के नाम खाता खोलवा के जमाकर देथे । रिटायरमेंट के बाद पांड़े जी नाती, नातिन के संग खेलय । कभू-कभू सहर घूमे बर चल देय । बलराम ल बहोत चिट्ठी पत्री लिखिच, फेर बलराम एक ठन के जवाब नई दिच । अवधराम जी हा मरे ले पहिली वसीयतनामा वकील से लिखा दिच के मोर बाद म सबो सम्पत्ति के मालिक मोर नाती चन्द्रप्रकास ह होही । भाटापारा म मोर पुस्तैनी दो मंजिला मकान, गाँव में सात एकड़ जमीन अऊ बैंक म जमा रासि के मालिक होही । पुस्पा ह बहोत रोकिच । बाबूजी अभी तोर बेटा जीयत हे । ओकरे नाम म चढ़वा देवव । मोला बद्दी देही । बलराम ह कहहि, मोर ददा ल मोहिनी देके कब्जा म कर ले हे ।

पुस्पा बहुत गिड़िगड़ाथे, पर मानिच नहीं । बहुरिया तंय ओकर पक्छ लेथच, जेहा तोला बीस साल ले छोर देहे । सधवा होके तंय विधवा हच, अईसे बेटा ले झन होवय बेटा अच्छा रहितिच । मंय चिट्ठी पत्री भेज के थक गय हंव । बलराम ईसाई धर्म स्वीकार कर ले हे, ईसाई धर्म के महिला ले सादी करके ईसाई होगे हे । अईसे अधर्मी टूरा ल मंय अपन सम्पति ले वंचित करत हंव, ओला कोई अधिकार नई हे । ओला मंय मर जाहंव त चिता म आगी लगाय झन देबे । बलराम ह ऐती के धियान देय ल छोड़ दे हे । बाबूजी कतको छोड़ दे हे फेर मोर पति ऐ, जब तक जीयते हे मय माँग म सिंदूर अऊ हात म चूड़ी पहन सकत हंव । ठीक हे बहु तोर मन भनसाहत हे । अइसे बेईमान ल तय पति मानस हस तोर बड़प्पन ए, तोर संस्कार ऐ । पुस्पा के आँखी ले आँसू टपक जाथे । चन्द्रप्रकाश कईथे काबर रोवत हस दाई । पुस्पा कईथे तोर ददा के सुरता आगे हे । मोर ददा कहाँ हे अऊ ओकर का नाव हे । पुस्पा कईथे बाबूजी भरी जवानी भर दुःख पाय हव । अब चन्द्रप्रकास अऊ चन्द्रकला के आये ले दुःख सिरा गइस । मोला नकठी कहके गय हे । मोर छाती म तीर मारे कस बान लगे रहिस, मोर ममता ल धिक्कारे रहिस । मोर जईसे नारी के अपमान करे हे, ओकर सईतानास हो जाहय, कोढ़ी होके मरही । मोर जीव कलला देहे, ओकर भुगतना ल भुगतही ।

जूट मील म बोनस के माँग करके मजदूर मन हड़ताल कर दिन । जूट मील मैनेजमेंट ल घाटा होगे कहिथे, ऐ साल बोनस के घोसना नई करिच । कामदेव ह मजदूर मन के बात रखिच कि हमन बोनस ले के रहिबो, चाहे हड़ताल महीनों चले । जूट मील के सामने पंडाल लगाके कामदेव भूख हड़ताल म बईठ जाथे । कलेक्टर साहब, एस.डी.एम. ल हड़ताल तोड़े बर बोलथे । के.पी. खण्डे, एस.डी.एम. कामदेव को समझाथे परंतु बोनस के लिये वोहर आड़े रहिथे । मजदूर मन भूख मरे लगिन । रायपुर से मजदूर लीडर अमृतलाल जोसी ल बुलाथे । जोसी जी रायगढ़ जाके मील मालिक किरोड़ी मल से बातचीत करथे । जोसी जी मजदूरों का जोरदार ढंग से पक्ष रखिथे । कामदेव जोसी जी के विचार से बहुत परभावित होथे । जोसी जी हड़ताल खतम करके कामदेव ल, एस.डी.एम. के संग जूस पिलाके हड़ताल खतम करवा देथे ।

अमृत जोसी श्रमिक नेता रायपुर ल कलेक्टर अपन सगला म बुलाथे । रात डिनर करवाथे । साथ म कामदेव भी रहिथे । मजदूर असंतोष के कारण सांति बेवस्था बिगड़ जाथे । कलेक्टर साहब जोसी जी ल धन्यवाद देथे । सेठ किरोड़ी मल जी अच्छा परिचय करा देथे । कामदेव के परमोसन कराके सुपवाईजर बनवा देथे । कामदेव जोसी जी का परम भक्त बन जाथे । जब भी हड़ताल करना रहय जोसी जी ल बुला लेवय । कामदेव के धाक जम गे रहय । कामदेव के बिना जूट मील म कोई भर्ती नई होवय । अमृत जोसी जूट मील लेबर यूनियन के संरक्षक बन जाथे । कामदेव अध्यक्ष, सचिव कृष्णदेव झा बन जाथे ।

रायगढ़ जूटमील म कई बरिस ले बेतन पुनरीक्षण नई होय रहय । सासन के नियम हे हर चार वषर् म वेज वोर्ड के गठन कर दिया जाय । परंतु जादा लाभ कमाय बर मैनेजमेंट कोई सुविधा नई देना चाहिस । कामदेव एक माँग पत्र मजदूर के हित म देइच । दूसरा माँग पत्र भी देईच । मैनेजमेंट के कोई हल चल ई होइच । अंत म कलेक्टर, श्रम आयुक्त ल नोटिस दिस । कि पन्द्रह दिन के बाद यदि वेज बोर्ड गठन नई होही त अनिश्चित कालीन हड़ताल करिबो । कलेक्टर साहब मैनेजर ल बुलाथे । कहिथे कि मजदूर मन के वेतर काबर नई बढ़ावत हो । मैनेजर कईथे । सर मील अभी घाटे में चलत हे । धंधा अभी मंदा है । चीन अऊ भारत के युद्ध के कारण अधिक संकट हे । कलेक्टर साहब कईथे, के अगर मजदूर मन के वेतन नहीं बढ़ायेंगे । यदि हड़ताल होगे तो, हमेसा के लिये जूट मील में ताला बंद करवा दूँगा । मैनेजर ल धमकी के असर होथे । पर सेठ जी ह वेतन नई बढ़ावत । सेठ कईथे भले मील मंद हो जाय, वेतन नहीं बढय ।

कामदेव तीस दिन के बाद भूख हड़ताल म बईठ जाथे । कामदेव ल ट्रेड यूनियन के समरथन मिलथे । अब्दुल गफ्फार भाई ट्रेड यूनियन के नेता रहय । श्री लक्ष्मण सिंह ठाकुर, सुधीर मुखर्जी, ठाकुर प्यारेलाल सिंह जइसन नेता मन समरथन देथे । गफ्फार भाई ह जोरदार नारे बाजी करवाथे । मजदूर मन के हौसला बढ़ जाथे । जूटमील लेबर यूनियन के समरथन म रायगढ़ बंद का आहवान करथे । दूसर दिन रायगढ़ बंद ल पूरा समरथन मिलथे । कलेक्टर सेठ किरोड़ीमल ल कईथे, सेठ जी मदूर संघ से समझौता कर लीजिये । रायगढ़ जिले भर म श्रमिक आंदोलन फैइलथ हे । सेठ जी कईथे मील घाटा म चलत हे मय बंद करे के निरनय ले लेहंव । कलेक्टर कईथे हजारों श्रमिक बेरोजगार हो जायेगे, कुछ सोचकर बतायें ।

कामदेव के हड़ताल के पचीसवाँ दिन चलत रहय । मैनेजमेंट ह बिहार ले लठेत लाथे । रात म सोये श्रमिक मन ल पीटवा देथे । कामदेव के पैर ल तोड़ देथे । लटैत डंडा ले पिटाई करथे । पंडाल ल उखाड़ देथे । सबेच ऐती ओती भाग जाथे । पुलिस ल जब पता चलथे, तुरंत कामदेव ल सरकारी अस्पताल म भर्ती करा देथे । टूटे पैर के इलाज कराथे । ओला दू महीना अस्पताल म लग जाथे । मजदूर मन के बिडोह ल दबाय के तरीका के जोरदार समाचार पत्र म छपथे । प्रमुख समाचार म जूट मील मजदूर के सोसन मजदूर यूनियन अध्यक्ष के पैर तोड़े । अखबारों में कई दिन तक समाचार आईच । पुलिस अनजान हमलावार के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कर लेथे । रायगढ़ जिला म श्रमिक आंदोलन कुचरे बर आलोचना होथे । श्रमिक असांति होये के कारण कलेक्टर के स्थानांतरण हो जाथे ।

हड़ताल क्रमिक रूप से चलथे । मैनेजमेंट ह कामदेव के माँग ल आंसिक रूप ले मान लेथे । नवा कलेक्टर ह मैनेजर ल बंद करे के धमकी देथे । तभीच जाके पचास रूपया प्रति माह बढ़ोतरी के माँग । कामदेव अमृतलाला जोसी ल पूछिथे, पचास रूपिया पगार बढ़ावत हे तोर राय का हे । जोसी बोलथे आंसिक माँग स्वीकार होये हे । मान जावव । जो श्रमिक के अस्पताल म खर्चा होय हे । मैनेजमेंट खर्चा दे ही । एम.ए. गफ्फार भाई कामदेव ल कहिथे कि हड़ताल समाप्त कर दव । दूसर दिन से जूट मील चालू हो जाथे । श्रमिक मन पाँच-पाँच हजार रूपिया एक मुस्त फायदा हो जाथे ।

कामदेव के पैर टूटे अऊ नेतागिरी के कारण परेसान होगे रहय । कभू-कभू खाय पीये बर घर नई आवय । बिसाहिन कईथे ओकरो कोनो कती बिहाव कर देते, तो ओहू खूँटा म बंध बँधा चातिच । टूरा ह नेतागिरी म बिगड़ गे हे । कामदेव ल अस्पताल ले घर ले आई न । पैर म पलस्टर चढ़े रहय । घर म सौचालय के बेवस्था नई रहय । आय जाय म बहुत तकलीफ होईच । बिसाहिन कईथे, कामदेव तोर एरियस मिले हावय । एक कच्चा खोली म लेट्रीन खोली बनवा दे । तोला आय जाय म सुविधा हो जाही, टेटकी कईथे, भईया कुछ पईसा कम होही त पुस्पा भउजी ले लेवा । रमौतीन कईथे एक कच्चा खोली बनवा लेवा । बिसाहू ह तीन हजार ईंटा मँगा ले लेट्रीन रूम अऊ बगल म बाथरूम बनवा देथे । तभी ले भी कामदेव ल सीढ़िया चढ़े म तकलीफ होइस । पुस्पा भवजी कामदेव ल देखे बर आईच । कहिथे का होईच देवर जी । कौन तोर टांग ल टोर दिच । तय संयासी बन जावे अईसे लगत हे । बिहाव करले । नई तो बाद म कोनो लड़की नई देही भउजी ल कथे कामदेव ह । भौजी औधड़ बाबा जी के बात याद हे का कहे रहिच ।

औधड़ बाबा कहे रहिच । तय बहुत बरे आदमी बनवे, नेता बनवे । रायगढ़ सहर म नई रहय । पुस्पा कहिथे । हाँ हाँ बाबा जी के बात यीह उतरथे । बाबा जी के आसीरबाद ले मोर बेटा होय हे ।
जुलाई महीना म स्कूल खुलथे । पुस्पा कहिथे रमौतीन बहिनी । मोर स्कूल म चन्द्र प्रकाश, अऊ चन्द्रकला ल भरती करा देथंव । बने कहिथच दीदी चन्द्रकला के उमर ह पाँच बरिस होगे रहय । पुस्पा ह दोनो लईका मन ल भरती कर देथे । चन्द्रप्रकास के पिता जी के नाम बलराम रामदेव पांड़े । अऊ चन्द्रकला के पिताजी के नाम रामदेव यादव पांड़े । पुस्पा ह दूनो लईका ल बढ़िया पढ़ावय । किलास म परथम आवय । बढ़ाई लिखाई, खेल कूद, संगीत म पहिली रहय । स्कूल के बारसिक कार्यक्रम म राधा-कृष्ण के डरेस, म रहय । बस सब कोई देखते रहय । बढ़िया स्याम सलोना, गोरी नटखटी राधा हे । चन्द्रकला ल सब कोई पुस्पा पांड़े के बेटी समझय । रमौतीन के दो बच्चा एक लड़का अऊ लड़की हो गय रहय । पुस्पा ल नाम धरे रहय । टूरा के चन्द्रसेन टूरी के पूरनिमा रखि । पुस्पा ल माता के सुख मातृत्व के सुख मिलत रहय । ओला कोई कमी नई सतावय । जब भी मन निरास होवय रमौतीन के पास आ जावय । ओकर लईका संग खेल के दूर कर लेवय । पुस्पा अपन बेटा, बेटी कस मानय ।

पुस्पा पांड़े चन्द्रकाल के प्रतिभा ल चिन्ह डारिच । ओला कीत संगीत कत्थक डांस सिखावय । खेलकूद, हाकी, फूटबाल, कब्बडी, बालबाल, बेडमिन्टन, दौड़, ऊँची कूद म भाग लेय देवय । पुस्पा ह अपन गुन ल भरय अऊ प्रेरणा देवय । बेटी माँ बाप के नाम ल ऊँचा कवा हमेशा जीवन म परथम आव । अऊ अंतिम इच्छा हे तुमन पढ़ लिख के अधिकारी नेता बनव । मोर ख्वाइस हे चन्द्रप्रकास डाक्टर बनय । चन्द्रकला हे नेता । भगवान ल हाथ जोरथे मोर बिनती काम हो जाय ।

पुस्पा पांड़े ह चन्द्रप्रकास न नटवर हाई स्कूल म कक्षा नवमी म भरती करा देथे । चन्द्रकला ल कन्या हाई स्कूल म । दू झन मन पढ़े-लिखे म होसियार रहय, हर कक्षा म परथम आवय । चन्द्रकला खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम म प्रथम आवय । घर म कप, सील्ड के भरभार होगे । पुष्पा देख के बहुत खुस होवय । चन्द्रप्रकास पढ़त रहय । हमेशा पुस्तक म गड़े रहय । खेलकूद म धियान नई देवय । कक्षा 11 वीं म प्रथम श्रेणी म चन्द्रप्रकास पास हो जाथे । चन्द्रकला व्दितीय श्रेणी म पास करिच । रमौतीन अऊ रामदेव बहुत खुस होईन । पुस्पा ल बधाई देथे । टेटकी पुस्पा भौजी ल कईथे, भौजी स्कूल म चपरासिन बना लेते । मोरे समय ह कट जातिच । पुस्पा ह नौकरी म लगवा देथे । टेटकी ह पुस्पा के घर बाहर काम भी देवय । रामदेव ह कभू-कभू पांड़े जी ल मालिस करे जावय । पांड़े जी चल फिर नई सकय । एक दम बुढ़वा पन्चान्बे बछर के होगे । पुस्पा के सेवा जतन से अवधराम जीयत रहय ।

गणेश चतुर्थी के दिन राजा चक्रधर सिंह जी कत्थक के प्रोग्राम, गीत-संगीत के रखे रहय । कामदेव ह सुने आय रहय । फिरतू महराज ह कत्थक डांस करय । राजा चक्रधर सिंह जी खुद तबला वादन करिच । बहुत बढ़िया आयोजन होईच । देश-परदेश म रायगढ़ धराना के कत्थक परसिद्ध हे । राजा चक्रधर संगीत प्रेमी रहय । कलाकार, साहित्यकार, संगीतज्ञ मन ला प्रोत्साहन देथे । राजा चक्रधर के कार्यकाल म साहित्य अऊ कला के अति सम्मान होइच । छत्तीसगढ़ कला संस्कृति के पोसक रहिच । रायगढ़ के परसिद्धि बड़े-बड़े दूर तक पहुँचिस । राजा चक्रधर सिंह कला, संगीत प्रेमी रहिस ।

कामदेव कला प्रेमी रहय । राज दरबार म जाके बईठे रहय । तबला बजाय ल सीख गे रहय । कामदेव राजा साहब ल गुरू बना डारे रहय । जहाँ-जहाँ जावय । कामदेव ल ले जावय । रायगढ़ के साहित्य मनीसी मन ल बड़ सम्मान देवय । राज दरबार म पंडित लोचन प्रसाद, पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी, मुकुटधर पांड़े, बलदेव साब, बलदेव मिश्र, फिरतू महराज, आवत जात, रहय । अऊ कवि गोष्ठी म भाग लेवय। कामदेव जरूर भाग लेवय । ओकरो गिनती साहित्यकार म होय लगिच । मजदूर यूनियन के लीडर घलो रहिच । कोई भी हड़ताल कामदेव के बिना सफल नई हो सकय । बड़े-बड़े नेता मन डरय । सेठ जी मन ओकर नाव ले कापय । जो समान ले जाना हे ले जावय । कामदेव ह ईमानदारी से पईसा वापस कर देय । कामदेव लोकप्रिय नेता, साहित्य, कला, संगीत प्रेमी रहय ।
क्रमशः
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1 Comments:

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