छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Sunday, June 25, 2006

भाग-तीन


छत्तीसगढ़, उड़ीसा म मानसून ह सक्रिय होगे, लगातार सात दिन ले झड़ी करे रहय । केलो नदी ह उफान मारत रहय । रायगढ़ शहर के निचली बस्ती अऊ नदी नरवा के तीर म बसे झुग्गी झोपड़ी कच्चा मकान म बह गय रहय । ऊँहा के मनखे ल ऊँच स्थान के स्कूल म ठहराय गय रहय । धान के फसल मन रेत पानी भर गय रहय । केलो नदी के पानी ह महानदी म जाके मिलथे । मांड नदी घलो चन्द्रपुर बालपुर संगम बनाय हे । चन्द्रपुर गाँव के आसपास इलाका ह बाढ़ म डूब गय रहय । बालपुर गाँव के नदी तीर के मकान मन नदिया म मिलगे रहय । पुरा ह बालपुर म घूस गे । भागा भागा होगे । सब झन जान बचाके भागिन । गाँव के बीच म पीपल के बड़े रूख रहय । थोरून ऊपर टीला म रइय । सब गाँव भर के जुरिया गे । जान बचाय बर भगवान से पारथना करे लगिन । चिन्तामणि पांड़े जमींदार परिवार मन गाँव छोड़के रायगढ़ म बसे गे रहिन । बाढ़ म बचे खुचे धान रूपिया पईसा रहिच महानदी के बाढ़ म बहिगे । अऊ सड़ गे । पन्द्रह दिन म बाढ़ के पानी उतरिच । सबके हाय जीव होईच ।

महानदी के बाढ़ म चारों खूटी पानी च पानी । महासागर जईसे दिखय । बड़े-बड़े पेड़ धारासाही होके बहगे रहय । बाढ़ के बिनास तो महानदी बसे तीर गाँव में देखे बर मिलय । जईसे पिरथी म पहिली महापरलय होय रहिस । सारा संसार पानी म डूब गे रहिस ओही । महानदी के बाढ़ ह बिनास लीली खेले रहिस । आसपास के गाँव ह पहिली ले खाली हो गय रहय । पसु पक्छी, रूख-राई सब बह गे रहय । मात्र बचे रहय, पीपर के पेड़ ।

अईसे बिनासकारी बाढ़ छत्तीसगढ़ उड़ीसा म पहिली बार आय रहय । का कहिवे । बाचे खुचे भूखा मन्से मन बीमार पड़य और भूख म मर जावैं । अइसे बिनासकारी बाढ़ ले मुक्ति पाय बर पांड़े जी के परिवार रायगढ़ के बैकुण्ठपुर म आके बस जाथे ।

पंडित मुकुटधर पांड़े जी ह पहिली ले नटवर हाई स्कूल म अध्यापक हो गय रहय । साहित्य साधना करय । राजा चक्रधर सिहं अपन दरबार म उनला दण्डाधिकारी बना दिच । पं. मुकुटधर पांड़े दरबारी कवि बने ले मना कर दिच । स्वाभीमानी रहिच । अपन आदत के अनुसार साहित्य सिरजन करय । छायावाद के प्रवर्तक साहित्यकार ऐ । हिन्दी साहित्य के चमकता सितारा रहिस । पांड़े जी ला साहित्य सिरजन के संसकार परिवार ले मिले रहिस हे । पूरा पांड़े परिवार साहित्य के सिरजन करय । बालपुर गाँव नदी के किनारे बसे हे । गाँव के चारों ओर आम के अमराई, पलास अऊ बबूल के घना जंगल दूनों कोती ले नदी भरे रहय । नदी में अपार पानी ही पानी रहय । देस विदेस के पक्छी म सीजन मन आवय अऊ जावय । पक्छी मन कलराव करय । आम अऊ पीपल के रूप म बसेरा बना के अंडा देवय । बच्चा बड़े होवय, उड़े लायक होवय त अपने देख उड़िके चले जावय। बड़ मनोहारी दृस्य रहय । साहित्य के वातावरण रहय । ऐकर प्रभाव पं. मुकुटधर पांड़े जी के ऊपर पड़े रहिस ।

पंडित मुकुटधर पांड़े जी ह बैकुंठपुर म रहय । गोसाला ले दूध पहुँचाय बर कभू-कभू कामदेव चले जवाय । मजदूर नेता रहे कारण सब झन जानत रहय । साहित्य कला प्रेमी होये के कारण कामदेव दूध पहुचा देवय । साहित्य अऊ कला म चर्चा करय । पांड़े जी हा सुन के बड़े परसन्न होईच । अऊ अपन पुस्तक ल पढ़े बर दिच । महानदी, कुररी के प्रति विस्व बोध के कविता ल पढ़ के कामदेव के दुनियाँ बदल गे । कामदेव कविता, कहानी, निबंध लिखें लगिच । संगीत में भी रूचि रहिच । बढ़िया तबला वादक ऐ । पं. मुकुटधर पांड़े जी की साहित्य साधन राजा बहुत प्रसन्न रहय । अकबर के नवरत्न जईसे राजा दरबार म कला, साहित्य, संगीत के कलाकार मन रहिन । रायगढ़ साहित्य कला के रूप छेत्र म देस भर म परसिद्ध होगे ।

रामदेव के खर्चा बड़गे रहय । सात आदमी के खर्चा वेतन से नई पुरय फेर लईका मन के पढ़ाई लिखाई । कामदेव ह घर खर्चा नई देवय । ऐती ओती खर्चा कर देवय । फेर एक लांघन दू उपवास के हालत आगे । रमौतीन पहुत परेशान रहय । कई-कई रात बिना खाय बीत जाय । टेटकी ह चपरासिन स्कूल म बने गे रहय । पुस्पा भौजी के कइना मान के पैंतालिस बछर के एक बिधुर रामसाय बारे से आर्य मंदिर म सादी कर लेथे । टेटकी ह अपन ससुराल मिट्ठमुड़ा म रहे लगथे । संत गुरू घासीदास के सतनाम धमर् म दीक्छा ले लेथे । सुद्ध-साकाहारी सात्विक विचार के हो जाथे । ओकर एको ठन लोग लईका नई होईच । रामसाय के पहिली डउकी के दू लड़की रहय । ओही मन पाल पोसैं । अपन घर म टेटकी खुस रहय । टेटकी के घर जाय ले रमौतीन ल काम बूता जाय करे ल पड़य । अऊ खाय नई मिलच ओकरे सेती बीमार रहय ।

रामदेव ह खर्चा पूरा करे बर कांजी हाऊस के रसीद के पईसा जमा नई करय । अऊ नकली रसीद छपवा के रसीद काटय । करीब साल भर ले कम रासि जमा करिच । मार्च महीना म निरीक्षक जाँच करिच, त पता चलिस कि साल भर म केवल दो हजार रूपिया जमा होय रहया । निरीक्षक के माथा ठनकिस । दूसर साल बीस हजार रूपया जमा होय रहिय । ऐ साल कईसे कम होगे । चार पाँच मोहर्रिर ल लाके जाँच करिच । त लगभग पन्दरा हजार रूपिया के गबन राशि निकरिच । रामदेव ल रूपिया जमा करके नोटिस दिच । फेर कहाँ ले जमा करितिच, घर म फूटे कौड़ी नई रहय । राशि जमा नई होय म रामदेव ल ससपेंड कर देथे । रामदेव मुँह लटकाये घर आथे । रमौतीन कईथे का होगे तोला । रामदेव कईथे मोला ससपेंड कर देहे । मय ह पन्दरा हजार रूपिया गबन कर देह हँव । घर भर म कोहराम मच जाथे । अब का हो ही । बिसाहिन कईथे, पुस्पा पांड़े मास्टरिन के पास जाथंव ।

पुस्पा ल बताथे कि पन्दरा हजार रूपिया के गबन कर दे हे रामदेव ह । निलंबित कर देहे । कइसनों करके बचा ले दाई । बिसाहिन बम फुकार रे रोये लगिच । पुस्पा बहुत सोच समझ के कईथे, जरूर रूपिया जमा नई होय ले, पुलिस थाना म रिपोर्ट हो जाही । रामदेव ल जेल हो जाही । पुस्पा बिसाहिन ल कईथे, रामदेव ल भेजबे । कईसे गवन कर दिस । रामदेव मुँह लटकाये पुस्पा के दुवारी म खरा हो जाथे । अवधराम पांड़े कईते । आ जा । तोला खोजत रहंव । कई दिन ले मालिस नई करे हच । पुस्पा के पास जाके रोवत रोवत बताथे भउजी मोला बचा ले । नईतो जेल हो जाही । अवधराम कईथे, ठीक हे ठीक हे । कल सब ठीक कर देहंव । निरीक्षक ल काल बुलाके लाबे । रामदेव बढ़िया मालिश करिच । पांड़े जी खुश हो जाथे । बाबू जी पुस्पा कहिथे । रामदेव ल पन्दरा हजार उधार दे देवव । धीरे-धीरे छूट दे ही । पांड़े जी कईथे, कईसे रामदेव तोला ईमानदारी ले काम करिबे कहे रहेंव । तंय बेईमान निकर गय रे । आँसू ढांरत रामदेव कईथे, महराज खर्चा नई पुरत रहिच । रमौतीन के इलाज म हर महीना जादा खरचा हो जाथे । तभो ले ठीक नई होय हे ।

दूसर दिन रामदेव ह निरीक्षक ले लेके पुस्पा पांड़े के पास जाथे । कईथे पन्दरा हजार रूपिया के रसीद काट दे, अऊ बैंक म जमा करा देवे । रामदेव जेल जाय ल बाचगे । अवधराम कईथे, साहेब ल कईवे एला बहाल करके स्कूल म चपरासी बना देवय । कांजी हाऊस ले हटा देवय । पुस्पा के तबीयत ठीक नई रहय । हाँथ पाँव दरद रहय । रामदेव आज तेल मालिस कर दे । बढ़िया सरसों तेल म लहसून डाल के गरम कर दे । ठण्डा हो ही तं लगावे । पांड़े महराज किंदरे ल चल दिच । पुस्पा ह हाथ पाँव के जोड़-जोड़ म तेल मालिश कराईच । पीठ, हाथ पाँव म मालिश करिच । मालिस बढ़िया करिच । कईथेष साठ साल के बुढ़िया होगे हंव । कुछ दिन रिटायर हो जांहव । मोर सेवा जतन तही ह करवे । मोर ससुर के ऊपर पन्चानवे साल से जादा होगे हे । बुढ़ापा बने ठकर-ठकर चलत हे । तोर मालिश से अच्छा हो जाथे । रामदेव कईथे, भउजी तही ह नौकरी लगवाये, अऊ तही ह बचाये । ओतके बेरा चन्द्रप्रकास अऊ चन्द्रकला पढ़ के आ जाथे । चन्द्रकला कईथे का होगे माँ तबीयत तो ठीक हे । बुढ़ापा म सरीर साथ नई देवय बेटी । जोड़ जोड़ बढ़ गये हे । तेल मालिस से दरद ठीक होथे ।

जुलाई म कालेज खुलथे । पुस्पा सेठ किरोड़ी मल शा. महाविद्यालय म लइका मन ल प्रथम वर्ष म भरती करा देथे चन्द्रकला अऊ चन्द्रप्रकाश ल भाई बहिन समझय । कालेज म छात्र संघ चुनाव होथे । चन्द्रकला अधिक नम्बर के आधार म कक्षा प्रतिनिधि चुने जाथे । काँलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रम म चन्द्रकला बढ़ चढ़ कर भाग लेथे । चन्द्रकला के कत्थक नृत्य के बहुत प्रसंसा होथे । नाटक म भाग लेथे । खेल-कूद म आगू रहय । चन्द्रकला के नाम कालेज म परसिद्ध होगे । चन्द्रकला बी.ए.प्रारम्भिक प्रथम श्रेणई म पास हो जाथे । चन्द्रप्रकास भी प्रथम श्रेणी म पास होथे । बी.ए. द्वितीय वषर् भी उत्तीर्ण हो जाथे । बी. ए. अंतिम म प्रवेश लेथे । छात्र संघ चुनाव म चन्द्रकला खड़े होगे । चुनाव के प्रचार म दूनों गुठ के छात्रों म झगड़ा हो जाथे । मारपीट के साथ काफी तनाव हो जाथे । छात्र संघ चुनाव म भारी बहुतमत अध्यक्छ के चुनाव जीतथे ।

चन्द्रप्रकास पांड़े ह विजय जुलूस छात्र मन के निकालथे । फटाका, ताम झाम, बैंड बाजा के साथ निकालथे । रायगढ़ सहर म धूम धड़ाक हो जाथे । छात्रसंघ अध्यक्छ चुनाव हारे प्रत्याशी पप्पू अग्रवाल ह अपन साथी मन के साथ हमला बोल देथे । दूनों गूट म खूनी संघषर् होथे । चन्द्रप्रकास के सिर म चोट लगथे । चन्द्रकला के हाथ पैर म मामूली चोट रहय । लगभग चालीस छात्र अस्पताल म भरती रहय । कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, भेंट करें, अस्पताल आयें । मारने वाला छात्र मन ल गिरफ्तार करे अऊ घायल मन ल मिले बर आथे । रायगढ़ सहर में 144 धारा लागू कर दे रहय । पुस्पा अऊ रामदेव काफी चिन्ता करीन । अस्पताल म भरती चन्द्रप्रकास अऊ चन्द्रकला ल देखेबर गईन । चालीस छात्र मन भरती रहय । पुस्पा सब झ न से पूछिच । सब झन कहिन के चन्द्रकला के कोई गलती नई हे । पप्पू अग्रवाल अऊ साथी मन जबर दस्त हमला करे हें । हमला म बचाव तो करे ल परही । कई दिन कालेज म हड़ताल होगे । रायगढ़ सहर बंद होगे । सबके माँग रहय कि पप्पू अग्रवाल ल गिरफ्तार किया जाय । पप्पू अग्रवाल वोहिच रात रायगढ़ ले जबलपुर भाग गै । अस्पताल ले ठीक होके छुट्टी म अपन-अपन घर आ जाथे ।

पुस्पा ल रिटायर होये दू साल हो गय रहय । जो भी रूपिया पईसा मिलिच, बैंक म जामा करा दिस । अवधराम पांड़े जी बीमार पड़े के कारण सन्तान्वे वर्ष के उमर म काल कवलित हो जाथे । पांड़े जी को वसीयत के अनुसार सारे सम्पत्ति के मालिक चन्द्रप्रकास हो जाथे । पुस्पा अकेल्ला हो जाथे । चन्द्रकला अऊ चन्द्रप्रकास कालेज पढ़े जले जावत । दिन भर पुस्पा घर म पड़े रहय । कभू कभी रामदेव पुस्पा ल देख के चले जावय । पुस्पा सोचथे कि भाटापारा के मकान, जमीन ल बेचके रायगढ़, म मकान खरीद लेहंव । वईसी भी घर के खर्चा चलत नई रहय । चन्द्रकला कईथे माँ मय नगरपालिका म कलर्क के नौकरी कर लेहंव । नगरपालिका अध्यक्छ ले जान पहचान बनगे हे । मालूराम अग्रवाल नगरपालिका के चुनाव लड़ के आय रहय । चन्द्रकला के रूप रंग ला देखके मोहाय गय । मालूराम कईथे, काल मय मेडम पुस्पा के घर म आहंव ।

दूसर दिन मालूराम अग्रवाल पुस्पा मेडम के घर आ जाथे । कईथे मेडम तोर नोनी ह बहुत सुन्दर है । नगरपालिका म नौकरी माँगत हे । नौकरी मय तो लगवा देहंव, फेर मोर सेवा जिनगी भर करे ल परही । पुस्पा कईथे कईसे कहत हव अध्यक्छ महोदय । मालूराम अग्रवाल कईथे, चन्द्रकला ल विधायक भी बनवा देहंव । पूरा खर्च मय उठाहंव । पुस्पा कईथे, सेठ जी एकर ददा-दाई ल पूछ ले बताहंव । मालूराम ल चाय पिलाके बिदा कर देथे । चन्द्रकला कईथे माता जी जो सर्त रखते, मोला मंजूर नई ए । भले मय भूखे मर जाहंव । फेर अइसन नौकरी नहीं करव । पुस्पा ह रमौतीन ल देखे बर जाथे । घर के सब्बेंच बीमार पड़े रहय। रमौतीन दस दिन ले उठे नई रहय । पुस्पा रामदेव ल बहुत फटकारथे। हाय मोला बताय काबर नहीं । रामदेव के दाई ददा मन सौ बरिस पार करके मर जाथे । रामदेव ह कोनो किसिम ले क्रिया कर्म ल निपटाथे । पाँच पंच ल भोजन कराके दसकमर् करथे । चन्द्रकला ल पता नई रहय के रमौतीन अऊ रामदेव के पिता हे । काबर बचपन से पुस्पा देवी ह पालत पोषत रहिच । पुस्पा ह पढ़ाईच लिखाईच अऊ नौकी भी लगवावत रहिच । रामदेव ल कईथे रमौतीन ल अस्पताल ले जांव । ये ले कुछ पईसा । सरकारी अस्पताल म रमौतीन ल भरती करा देथे । एक महीना म ठीक होके आ जाथे ।

रमौतीन के बीमारी म चार पाँच सौ रूपिया दवाई ओखर के लग जावय । कई हजार रूपिया के उधार म बूढ़ गे रहय । रमौतीन के टूरी चन्द्रबदनी ह भात रांधय । घर के काम ल बने कर लय । दसवीं तक पढ़े रहय । लड़का चन्द्रसेन ह ग्यारहवी तक पढ़ेगे रहय । लहंग लंढ़ग अवाढ़ गरदी करत घूमत रहय । रामदेव ह ददा अऊ दाई के मरे ले गोसाला के काम भी करै । दूध बेच के काम चलावै । रमौतीन ठीक होये ले, गोसाला के गोबर, कचरा, चन्द्रबदनी के संग साफ करै । जईसे तईसे घर ह चलत रहिस ।

मालूराम अग्रवाल ह चन्द्रकला ल नगरपालिका म कलर्क बना देथे । चन्द्रकला तेज तर्रार, नाक म माछी नई बैठे देवय । चन्द्रकला जब सम्हर पकर के जाय, देखनी हो जाय । अईसे लगय, कोई सिनेमा के हीरोइन जात रहय । आफिस, दफ्तर अऊ तहसील कलेक्टर कार्यालय म चन्द्रकला के रूप रंग अऊ गुन के चर्चा होवय । चन्द्रकला ह बड़े बाबू दीक्षित ले काम सीखय । दीक्षित कहय बेटी काम सीख जाबे त जिनगी भर काम आही । मन लगा के काम सीख गे । सबे पुरूस कर्मचारी मन तीर आय के कोसिस करैं । फेर चन्द्रकला ह घास नई डालय । मालूराम हे बार बार चन्द्रकला ल आफिस म बुलावय । सब कर्मचारी देखत रहय । आपस म कानाफूसी करय के अध्यक्छ महोदय ह पटाय के कोशिश करत हे । फेर ओला सफलता नई मिलत हे । चन्द्रकला ह फटकार देवय । कहय अध्यक्ष महोदय कहै, मैं तोर संग बिहाव रचाहूं । गलती काम नई करंव । मालूराम बहुत लालच दिच । तभो ले वोहर नहीं मानिच । अईसे तईसे कई साल बीत जाथे ।

इन्टरभू खातिर चन्द्रप्रकास पांड़े ह, म.प्र. लोकसेवा आयोग के परीक्षा रायपुर म देते । परीक्षा पास हो जाथे । साक्षात्कार इंदौर म जाथे । पुस्पा कईथे बेटा आजकाल बिना रूपिया के कोई काम नई होवै । पईसा के जुगाड़ करे बर परही । चन्द्रकला पुस्पा विचार करथे । जईसे भी हो पईसा के जुगाड़ करके इंदौर जाना हे । चन्द्रप्रकास के नौकरी लगवाना हे । बहुत चारों तरफ जान पहिचान से पईसा माँगय । फेर ओमन कहय बीस हजार रूपिया अभी नईये । पुस्पा कईते बेटी चन्द्रकला मोर बात मानबे का । मालूराम सेठ जी से रूपिया उधार माँग ले । बहुत पईसा वाला हे । चन्द्रकला कहिथे दाई तई ह माँग । रामदेव ल पुस्पा कईथे, अध्यक्छ जी बुलाय हे कहिथे ।

रामदेव नगरपालिका के दफ्तर म अध्यक्छ के कमरा म पुस्पा पांड़े के पात कहि देथे । मालूराम कईथे, मेडम ल कहिबे । आज रात के 9 बजे के बाद आहंव । रामदेव पुस्पा ल बता देथे । पुस्पा ह मस्त खाना बनाय के देखत रहय । ठीक रात दस बजे मालूराम ह दरवाजा के संकरी ल खटखटाथे । चन्द्रप्रकास पाँव छूथे । पुस्पा देवी आ के सोफा म बईठाथे । चन्द्रप्रकास ह बईठक म पाँव छूके बईठ जाथे । बेटी तय बात कर । मय खाना लगावत हंव । मालूराम ल दाई बेटी बढ़िया भोजन कराथे । पुस्पा देवी ह अपन बात ल रखिते । मालूमराम जी कईथे बीस हजार रूपिया अभी तो नई हे । कहीं ले जुगाड़ करे बर परही । पुस्पा देवी ह हाथ पाँव जोड़थे । चन्द्रकला ह चिरौरी बिनती करथे । ठीक हे कहिके चल देथे । पुस्पा देवी कहिथे बेटा तोर नाव म भाटापार म दूमिंजला मकान हे ओला बेच दे । चन्द्रप्रकास कईथे दाई अभी कोन लेही, फेर किराया दार मन खाली भी नई करय ।

पुस्पा पांड़े अऊ चन्द्रप्रकास बिहंचे के पेसेन्जर म भाटापारा चल देथे । किरायेदार किशनमल मोटवानी ल कईथे, आप लोग मकान खाली कर देवें । मकान ल बेचत हंव । किसनमल कई बार खरीदे बरकह चुके रहिस । अवधराम पांड़े ह नहीं कह देवय । किशनमल कईथे, तीस हजार रूपये म मोला बेच देवव । पुस्पा देवी पचास हजार रूपिया बोलथे । चन्द्रप्रकास कई दलाल मन से बात करथे । कोई तीस हजार से ज्यादा नई बोलय । बहुत सोच बिचार के पुस्पा कईथे, बेटा तोला ऐ घर म रहना नईये । फेर नौकरी के बात हे । तोर मन आतिच त बेच दे । चन्द्रप्रकास कईथे दाई तय जईसे जाहबे, अईसे कर मय तो बहुत परेशान होगे हंव । यदि पईसा के जुगाड़ नई होत हे, मोर किस्मत म छोड़ दे । पुस्पा कईथे, बेटा ऐ चीज बस काबर काम आही । अगर तोर नौकरी लग जाही त जीवन भर काम आही पुस्पा अऊ चन्द्रप्रकास हताश हो जाथे ।

किशनमल मोटवानी ह कईथे, पांड़े मेडम पईसा के जुगाड़ नई होत हे । यदि रजिस्ट्री करा दे तो मय रूपिया पन्दरा हजार दे सकत हंव । आजकल रायपुर जाके रजिस्ट्री करा देव । पुस्पा कईथे ठीक हे । दूसर दिन उपपंजीयक कार्यालय म रजिस्ट्री हो जाथे । आधा रकम दे देथे । पन्दरा हजार रूपिया लेके रायगढ़ चले जाथे । चन्द्रकला ल बताथे कि पन्दरा हजार के बेवस्था होय हे । चन्द्रकला कईथे, माँ ज्यादा परेशान होय के जरूरत नइऐ । मय कोन दिन काम आहूं । एक भाई के नौकरी लगाय बर मय तन भी बेच सकत हंव । पुस्पा के आँखी ले आँसू आ जाथे । चन्द्रप्रकास ल कईथे, देख तोर दीदी ह पईसा के जुगाड़ करे बर अपन ल गिरवी रखे बर तियार हे । इंदौर जाय बर पाँच दिन बाँचे रहय, मालूमराम ह मौका के तलास म रहय । चन्द्रकला कईथे सेठ जी तोर शर्त माने के लिये तियार हूँ । फेर मोरो सर्त हे । मोर घर, मकान, पक्का, बनवा देबे। मोर जीयत ले खाना, खरचा देय ल लगही । मोर नाव एक लाख रूपिया के फिक्स डिपाजिट म जमा करादे । सेठ जी कईथे, अभी तो नही हो सकय । पर मय वादा करत हंव । जो बात बोले हच, मय कर देहंव । चन्द्रकला कईथे, बीस हजार रूपिया माँ के हाथ मे देदे । हमन इंदौर जाथ हंव साथ म चल । वही होटल म रूकबो । मालूराम तियार हो जाथे । मर तोर भाई ल नौकरी लगवा देहंव । पी.एस.सी. मेम्बर साहब पहिचान के हे । चन्द्रकला कईथे तब अतेक नाटक काबर करवाये । मालूराम कईथे, नाटक तो तुमन करत हो । पुस्पा देवी ह करत हे । यदि मोर बात ल मान लेते त अतका भटके ल का पड़ितिच । चन्द्रकला कईते । दाई रूपिया के बेवस्था हो गय हे । सेठ जी संग म इंदौर जाहंव कहत हे । पुस्पा कईथे ठीक हे बेटी काम हमर हो जाही ।

दूसर दिन रायगढ़ से बिलासपुर ट्रेन म बइठ के चले जाथे । बिलासपुर से इंदौर ट्रेन में जाथे । छत्तीस घंटा के बाद म इंदौर पहुँचथे । बस स्टेन्ड के पास मया होटल म दो कमरा बुक कराथे । स्नान करके मालूराम तियार होगे । सब झन तियार होके । पी.एम.सी.मेम्बर साहब के पास जाथे । मेम्बर साहब रायगढ़ जिला के निवासी रह । मालूराम कईथे, मेम्बर कईथे, ठीक हे आप लोग आये हो । इहां दलाल के चक्कर म मत परिहा । इहां दलाले दलाल घूमत हे । नौकरी के नाम म करोड़ों रूपिया कमा लेवत हे । आप मन जईसे आय ह वईसे चले जाव । चन्द्रप्रकास कईथे, दो दिन बात साक्छातकार हे । साक्छातकार के बाद वापस रायगढ़ चले जाथे । मालूराम जी कईथे, पार्टी फंड का चंदा तीस हजार लाय हन । मेम्बर साहब कईथे, ये सब नई चलय भाई । यदि तुमन नई मानत हव, भगवान बजरंग बली के मंदिर म चढ़ोत्तरी चंढ़ा के चले जावंय । भगवान के भोग समझ के प्रसाद ग्रहण कर लेही । ऐला मंदिर बनवाये के काम आ जाही । मांय पईसा ल नई छुवंव । चन्द्रप्रकास नाम व रोल नम्बर दे दे । चन्द्रकला ह रोल नम्बर व नाम लिखके देथे । पुस्पा कईथे बेटी काम तो हो जाही । मालूराम कईथे, मय आय हंव कईसे काम नई हो ही ।मालूराम चन्द्रकला, पुस्पा ल कईथे तुमन मोरे काम ल करिहां त बनही । रेजी डेन्सी कोठी ले बस स्टेंड होटल म चल देथे ।

हाथ पाँव धोके मालूराम कईथे, मंदिर सामने हावय चला दर्सन करे जाबो । पुस्पा कईथे, चवल सब झन दर्शन करीन । महामाया, गणेस के भव्य मंदिर रहय । सिव मंदिर पास म रहय । सिव लिंग के फेरा लेके चन्द्रकला कहिथे तहूं ह संकल्प ले कि तय हम जीयत भर एक दूसर के साथ देबे । पति पत्नी के रूप म रईबो । पुस्पा देवी कईथे, ठीक हे मय गवाह बने हंव । चन्द्रप्रकास भी ह गवाही रईही । चन्द्रप्रकास कईथे माँ का होत हे । मय समझ नई पावत हंव । पुस्पा कईथे, बेटा तोर नौकरी लागाय के सौदा होत हे । कईसे सौदा दाई । मालूराम जी ह बीस हजार रूपया देय हे । फेर बेटा बेस म कई हजार रूपिया उधार म देय हे । ओही पईसा के उधारी छूटे के संकल्प होते हे । पर माँ ऐ ला समाज तो नई मानहीं ।मोला समाज के फिकर नई हे । का समाज ह तोला पईसा देईच हे । नहीं । फेर समाज ल कोन पूछय । पुस्पा कईथे बेटा जऊन भगवान करावय । उही म हमन के भलाई हे । चन्द्रकला कईते । भईया समाज के मोला कोई डर नईये । मय जिनगी काट लेहंव । फेर मोर भाई के नौकरी लगना चाही । पुस्पा देवी भी कईथे, नौकरी लग जाय, सब उधारी छूट जाहय । चन्द्रप्रकास ल कईथे, देख चन्द्रप्रकास तोर दीदी ल अपन जिनगी ल गिरी रखत हे । तोला ऐकर बदला म चन्द्रकला के पालन पोसन करे बर परही । चन्द्रप्रकास कईथे ठीक हे माँ । एक भाई के लिये बहन गिरवी होत हे त मय काबर नई कहिहंव । चन्द्रकला के आँसू टपक जाथे । मालूराम कईथे चलव भूख लगथ हे, होटल म अराम से बात करवय ।

भोजन करके होटल म चले जाथे । पुस्पा देवी चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास एक रूप म अऊ मालूराम सेठ जी एक कमरा म ठहरे रहय । पुस्पा देवी कईथे बेटी तुमन सोवव । चन्द्रप्रकास तयं साक्छात्कार के तियारी कर मंय बात करके आवत हंव । पुस्पा देवी ह सेठ जी से चिरौरी बिनती करथे । के चन्द्रकला के जगा म मय सेवा करे बर तियार हेव । मालूराम कईथे नहीं । मोला तो चन्द्रकला के सेवा चाहिये । ठीक हे सेठ जी फेर मोर बात माने ल परही । चन्द्रकला के जीवन भर पालन पोषण मकान, अऊ विधायक बनवाय परही । मालूराम हाँ कहि देथे ।

पुस्पा देवी ह रूप ले निकल के चन्द्रकला के पास आ जाथे । कईथे, सो गे बेटी । चन्द्रकला कईथे, नहीं माँ । आँख बंद करके गुनत रहेंव । किस्मत कहाँ ले कहाँ ले जाथे । मय सादी करके घर बसाहंव के सपना देखे रहेंव । बाल बच्चा के संग खेलहंव । घर बच्चा के किलकारी ले गुंजही । मौज मस्ती ले जीवन बिताहंव । पुस्पा कईते । बेटी सबके सपना पूरा नई होय । वइसे तोर सपना पूरा नई होवय । जरूर तोर प्रतिभा, कला, संगीत ला देखके विधायक चुने जावे । चन्द्रकला कईथे माँ कहाँ राजा भोज अऊ कहीं गंगू तेली । ओमन के पास कुछ भी नई ये । कईसे चुनाव जीत के विधायक बनिहंव । नहीं बेटी । यदि तय ठान लेवे त जरूर विधायक मंत्री बन जावे । पुस्पा कईथे, जाव विधायक बने के संकल्प करा ले । नईतो बाग जाही । मरद बहुत मीठे लबरा होथे । काम निकले के बाद पूछय नहीं । चन्द्रकला कईथे माँ विधायक बने के आसीस दे । राजनीति के दलदल म जीत के आँव । पुस्पा कहिथे । जा बेटी मोर आसीरबाद हे । युद्ध जीत के आबे । नारी अऊ पुरूष के अंतव्दंद के युद्ध ऐ । हमेसा नारी के विजय होथे । पुस्पा के आँसू टपक जाथे । एक माँ एक बेटी ल के सौदा करत हवं । चन्द्रकला घर म होथे त विदा करतेंव । बैण्ड बाजा बजतीज । डोली चढ़तीज यहां चल बेटी । विदा कर तोर पलंग तक पहुँचा देत हव ।

मालूराम रूप म परफ्यूम छिड़क देय रहय । बढ़िया सुगंध आवत रहय । चन्द्रकला जईसे कमरा म घूसते । भक ले सुंगध आते । वाह बढ़िया सेंट छिड़के हस । चन्द्रकाल पलंग म जाके बईठ जाथे । स्वागतम्, स्वागतम्, चन्द्रकला । चन्द्रकला पलंग म बईठ के गपसप मारथे । कईथे । काह सेठ जी बढ़िया मजबूरी के फायदा उठावत हच । बिना बिहाव करे सब काम करबे फबत हे । थोरकुन सोच, नरक जाय ल बच । नारी के मजबूरी के फायदा उठाना उचित नो हय । पुस्पा देवी के मजबूरी के फायदा उठात हच । मालूराम कईथे, देवी जी अईसे होतिच त मांय रायगढ़ म फायदा उठातेंव । फेर तोर माँ, भाई के संग म आय हंव । मय तो जबरदस्ती नई करंव । मय भी बड़े सेठ हंव । मोरो इज्जत हे समाज म । यदि तोर इच्छा नई हे त चलेजा । चन्द्रकला कईथे, फेर मोर भाई के नौकरी झन लगय । मोला विधायक के चुनाव लड़ना हे । तोला कांग्रेस से टिकिट दिलाना परही । जईसे भी हो । तोला काम करे बर परही । मालूराम कईथे, मेडम ऐ समझ जब भी चुनाव हो तय विधायक अऊ मंत्री बने । मोर जतक पूंजी हे लगा देहंव । सेठ जी तोर बड़े बड़े लड़का अऊ लड़की हे । तोर घरवाली मोटी, काली, थूलथूल हे । मोला देखही त का कहही । चन्द्रकला तोर बर अलग से मकान बनवा देहंव । साम सबेरे घर म अऊ रात तोर संग बिताहंव । मालूराम कईथे रात के बारह बजे गे हे । चल सोबो । चन्द्रकला कईथे, मयं समरपन करत हंव तोला जो कुछ करना या सेवा लेना हे ले ले । मालूराम अग्रवाल कईथे बाथरूप ले कपड़ा बदल ले ।

चन्द्रकला कपड़ा बदल के आ जाथे । चन्द्रकला के विस्वास बढ़ जाथे । कोई चीज के डर नई रहय । जीवन म एक न एक दिन समरपित होतेंव । चन्द्रकला के सुन्दरता, सरीर के बनावट, सुडोल सरीर, नरम नरम हाथ, ऊंगली, नाक नक्स सुन्दर । पास म जाके । स्पर्स मात्र ले आनंदित हो जाथे । मालूराम संतुष्ट हो के कईथे, मोर जीवन के आनंद के क्षण मिले हे । मय भूला नई सकंव । मालूराम ल कईथे, मुँह दोवय म मालूराम गर म पाँच तोला चैन ल पहिरा देथे । रात लाईट बंद करके सो जाथे । चन्द्रकाल म कली से फूल बन जाथे । जीये मरे के कसम खाये । चन्द्रकला रात जागरन के कारन देरी म जागिच । स्नान करके माँ के पास चल देथे । माँ के पाँव छूथे । माँ आसीरबाद देथे । विधायक बन । नाम कमा अपन माँ बाप के नाम ऊँचा कर । चन्द्रप्रकास साक्छात्कार के तियारी करत रहय ।

मालूराम ह एक दिन कईसे काटे जाय, मांडू जाय के योजना बना लेथे । पुस्पा देवी ल चन्द्रकला कईथे, दाई हमन घूमे मांडू जाबो कहत हन । रात रूक के काले सुबह आ जाबो । चन्द्रप्रकास के साक्छातकार 3 बजे शाम के हे । होटल म टेक्सी वाला आ जाथे । चन्द्रकला सूटकेस म कुछ लूगरा अऊ नाईटी रख के होटल ले निकल जाथे । पुस्पा कईथे बेटी घूम फिर के आ जावव । चन्द्रप्रकास कईथे जाना माँ तहूँ ह मांडू के किला देख के आ जावे । पुस्पा कईथे नही बेटा । चन्द्रकला ल जान दे । तोर संग तो रहना चाही । तंहू ह ठीक से तियारी कर । कईसे कईसे प्रश्न पूछथे, पता लगा ले । अच्छा तियारी करे लगथे । चन्द्रकला, कईथे जाथंव माँ । पाँव छूथे । जा बेटी जा हाथ हिलावत टेक्सी म बईठ के मांडू के लिये रवाना हो जाथे ।

टेक्सी धार रोज म दउड़े लगथे । जगा जगा बढ़िया ढाबा । पास पास म ढाबा म होटल ले सस्ता खाना मिलय । इंदौर ले टेक्सी मऊ छवनी पहुँचथे । मऊ म चाय पीथे । छावनी क्षेत्र म सैनिक बैरक, सैनिक गाड़ियां, तोप खाना, बरे बड़े युद्ध के पात खड़े रहय । मऊ ले गाड़ी धार रोड म दउड़े लगिच । मऊ ले घाटी पार करके धार पहुँचथे । धार के भोजसाला ल देखथे । कुछ देर बाद धार से मांडू के लिये चले जाथे । मांडू का किला पहाड़ी के ऊपर बने हे । चारों ओर पहाड़ी दूर दूर तक गाँव के नामों-निसान नहीं । टेक्सी किला के दरवाजा के पास रूक जाथे । किला ल बाज बहादुर ह बनवाये हे । किला खण्डहर होवत हे । पत्थर के मजबूत दीवार हावंय । कई घंटा तक किला ल देखय । चन्द्रकला कईथे वाह ! क्या सीन है । हरा, भरा सीन । दूर तक पेड़ ही पेड़ । चन्द्रकला कईथे सेठ जी अपने प्रियतमा के लिये बाज बहादुर सुल्तान ह किला बनवाय हे, तंय का बनवाबे । मालूराम कईथे, तोर यादगार म महुं ह बिलासपुर म मकान बनवा देहंव । थक हार के पेड़ के नीचे पथरा म बईठ जाथे । मांडू के किला देखे लाईक हे । पर्यटन विभाग द्वारा पर्यटन होटल किला म खोले हे । मालूराम कईथे, आज होटल म रूक जाथन, कल सुबेरे इंदौर चलबो । होटल म एक कमरा बुक कराथे । चाबी ले लेथे । चाय के आर्डर देके चल देथे ।

रूप पुराना किला के बड़े बड़े रूम को बनाय रहय । एकदम खुला, किला म तेज हवा आवय । होटल म मात्र चन्द्रकला मन रूके रहय । खिड़की खोलके देखिच । वेटर ह चायपानी लेके अ जाथे । रात म भोजन के आर्डर देथे । वेटर ल भेज देथे । चाय पीके चन्द्रकला बाथरूप म कपड़ा बदले चल दिच । दिन भर थके के कारण हाथ-पाँव पानी म साफ धोईच । आके पलंग म लेट जाथे । मालूराम ह स्नान करके बाथरूम से निकरथे । मालूराम ह थोड़ा कमजोरी महसूस करत रहिस । वीटा गोल्ड के केपसूल खाथे । चन्द्रकला कईथे, महू ल देना । एक केपसूल खा लेतेंव । रात के खाना साढ़े आठ बजे वेटर लगा देथे । भोजन करके सूते की तियारी करिथे । रात म मधिम लाईट जलत रहिथे । चन्द्रकला परफ्यूम, इत्र म छड़कथे, रूप बढ़िया महकथे । मालूराम कपड़ा उतार के पलंग म बईठथे । चन्द्रकला झूम जाथे, काबर पुरूष के हाथ ह गुदगुदी लगत रहय । चन्द्रकाल मुस्काईच । वहा क्या चीज हे । मय तो निहाल हो गयी । चन्द्रकला चूमे लगथे । चन्द्रकला गरम हो जाथे । दूनों झन संतष्ट होके सो जाथे । जीवन म सही आनंद एही ले मिलथे । आनंद के अतिरेक, प्रेम के अंतिम क्षण, ओ पल याद रहिथे रात देर सो जाथे । सुबह जल्दी उठ के स्नान, करके टेक्सी म बईठ के इंदौर ग्यारह बजे होटल पहुँच जाथे ।

पुस्पा ह पूछथे बेटी अच्छा हे मांडू, चन्द्रकला कईथे, बहुत बढ़िया हे माँ । तोला कल ले गय रहितेव मजा आ जातिच । पुस्पा कईथे, बेटी तुमन के संग दार भात म मूसर चंद भय नई बनंव । तुमन ल मजा नई आतिच । तुंहर मौज मस्ती के उमर हे । मय बाद म मांडू देख लेहंव । मालूराम कईथे, बहुत बड़े किला हे । बाज बहादुर महल देखने लाइक हे । चारो तरफ पहारे च पहार हे । घने कटे जंगल हे । पर्यटन विभाग के सस्ता होटल हे । जंगल म मंगल । जीवन के आनंद के दिन गुजरीच । पहली किस्सा कहानी म परी के आनंद खुसी होय के बात सुने रहेंव । पर मोला तो चन्द्रकला के संग स्वर्गिक आनंद आय हे । जीवन म खुशी के रंग जिंदगी अध्याय ह पूरा होइच हे । चन्द्रकाल कईथे, तोर संग म हमू ह स्वर्ग ल देख ले हेंन । जिनगी म कन्या अऊ कश्मीर ल घुमा देबे ।

चन्द्रप्रकास साक्छात्कार के तियारी करत रहिथे । चन्द्रकला कईथे, एक बजे हे चलव आटो ले लेथंव । वहाँ जा के कुछ पूछबे पाछबे । दो बजे पी. एस. सी. कार्यालय पहूँच जाथे । साक्छात्कार वाले लड़के ऊपर रहय । साथ म जवईया मन प्रतीक्षालय हाल म बईठे रहय । ऊमन चिन्ता रहय कि साक्षात्कार कईसे होय हे । एक लड़का बिलासपुर के विजय अनंत आईच । सब जुड़ जाथे । का का प्रश्न करिच हे । विजय अनंत कइथे, बोर्ड म पाँच झन विषय विशेषज्ञ मन बईठे हे । पहिली तो नाम शैक्षणिक योग्यता, खेलकूद, कहाँ के रहने वाला पुछथे । म.प्र. में कितने जिले हैं । महानदी कहाँ से निकलती है संत गुरू घासीदास के जन्म स्थान कहाँ हे । उनके सात सिद्धांत बताइये । जय स्तम्भ किसे कहते हैं । सफेद झंडा का क्या संदेस है । कामर्स के विशेषज्ञ प्रश्न करथे, प्रत्यक्षकर अऊ प्रत्यक्ष कर बताइये । सेल्स टेक्स अधिनियम कब बना था । परिवहन निगम क्या है । तीसरे विशेषज्ञ पुलिस विभाग के संबंध म पूछथे । चौथे विशेषज्ञ पूछथे भारत और चन युद्ध कब हुआ था । पानीपत का प्रथम युद्ध कब कहाँ हुआ था ? कलिंग युद्ध कब हुआ था ? मुहम्मद गेरी कौन था ? वियज बताथे जईसे बनिच प्रश्न के उत्तर मय दे हवं । चन्द्रप्रकास के पसीना छूट जाथे । मोर मुँह से आवाज नई निकरत रहिस । डर म गला सूख गे रहिस । पसीना, पसीना देख के अध्यक्ष महोदय एक गिलास पानी मँगाथे । अध्यक्ष एक अंतिम प्रश्न पुछते कि माननीय गणेशराम अनंत जी क्या लगते है ? विजय अनंत बोलथे मोर जाऊजी ऐ । तो जाओ विजय तुम्हारा चयन हो गया । दो महीना बाद नियुक्ति पत्र पहुँच जायेगा । विजय ह साँस ल जल्दी जल्दी लेत रहय । संहस भरहा बताईच । एक दूर के कुर्सी म बईठ के पसीना ल सुखवाईच । जब ठीक होगे त उठ के बाहर निकरिस । मालूराम कईथे, बाबू तोर नियुक्ति तो पक्का हे । का कहिबे भईया इंहा तो हजारों लोगन घूमत हे, हमन कोन खेत के मूली आन ।

चन्द्रप्रकास पांड़े ह ओही ढंग ले तियारी करथे । ठीक तीन बजे साक्छात्कार चालू हो जाथे । प्रतीक्षालय म बईठे रहय । एक, दो, तीन के बाद चौथे क्रम म चन्द्रप्रकास के नाम चपरासी पुकारिच । चन्द्रप्रकास सब ल नमस्कार करिच । सभी सदस्य लोग बोले बैठिये चन्द्रप्रकास पांड़े जी । आपका पूरा नाम बताईये ? चन्द्रप्रकास बलराम रामदेव पांड़े । अध्यक्ष बोलता हे यह बहुत ल्बा नाम हे । हां सर बहुत लम्बा नाम हे । मेरे माता पिता ने क्या समझ के रखा हे, वही लोग जानें । शैक्षिक योग्यता मार्कसीट इधर दीजिये । मार्कसीट देखकर सदस्य – आप तो सभी कक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो । हयर सेकेन्ड्री, बी. ए. प्रथम श्रेणी, एम.ए. अर्थशास्त्र द्वितीय श्रेणी । क्या कारण हे ? आप अर्थशास्त्र एम. ए. अंतिम में पढ़ाई में कमजोर हो ? इसलिये प्रथम श्रेणी पास नहीं हुये । चन्द्रप्रकास- सर मेरी बदकिस्मती हेसर परीक्षा के समय मेरे दादा जी का देहांत हुआ था । ठीक हे, सदस्य बोलता है । दूसर सदस्य, केलोनदी कहाँ से निकलती है । चन्द्रप्रकास-सर रायगढ़ के पास, धरमजय घडुघोड़ा की पहाड़ियों से निकलकर मांड नदी में मिल जाती है । मांड नदी महानदी में मिल जाती है । रायगढ़ जिले के किस स्थान को नाम लोक कहते हैं । चन्द्रप्रकास, तपकरा क्षेत्र को । जशपुर के पास परसिद्ध औघड़ आश्रम कहाँ है । चन्द्रप्रकास – जशपुर नगर से 12 कि. मी. दूरी पर घने जंगलों की बीच सोगड़ा आश्रम है । सदस्य – आप आश्रम के बारे में कुछ जानते हो ? चन्द्रप्रकास – जी हाँ सोगड़ा आश्रम में अवधूत भगवान राम औघड़ बाबा के आसरम हे । तीसरे सदस्य – पांड़े जी आप सभी में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हे । बताईये ? राजस्व विभाग की पद संरचना क्या है ? चन्द्रप्रकास विचारने लगता है ? मुँह से जवाब नहीं निकलता । पानी माँगता है । चपरासी पानी लाता है । पानी पीने से गला तर हो जाता है । डर थोड़ा कम होता है । चन्द्रप्रकास-संभाग में कमिश्नर जिले में, कलेक्टर तहसील में एस.डी.एम. तहलीलदार, नायाब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, अंतिम में पटवारी होता है । सदस्य, पटवारी के क्या काम है ? सर भू अभिलेख तैयार करना भू राजस्व वसूलना, किसानों की भूमि का खसरा नक्सा तैयार करना । सासकीय कार्यों का गाँवों में क्रियान्वयन करना । सभी सदस्य लोग हँसते हे । वाह पांड़े जी आपने भी सभी प्रश्नों का जवाब सही तरीके से दिया है । आप तो प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो । कहीं अच्छी जगह नौकरी लग जायेगी । जाईये । अपना मार्कसीट ले जाईये । इतना कहने पर चन्द्रप्रकास पसीने पशीने हो जाता है । मात्र जमीन में गिरना बाकी रहता है । जल्दी-जल्दी सीढ़ी उतरता है ।

चन्द्रकला, पुस्पा, मालूराम पुछथे । कईसे प्रश्न के जबाब देहे । सब प्रश्न के जवाब तो सही देदेंव । फेर सबोच सदस्य मन हाँसिन । अऊ कईथे, चन्द्रप्रकास आप तो प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हे । कहीं दूसरी जगह नौकरी लग जायेगी । जाओ घर जाओ । चन्द्रकला, पुस्पा, ससंकित हो जाथे । मालूराम कईथे, साम के मय बंगला जाहंव अऊ पूछ के आहंव । चन्द्रकला, पुस्पा, मालूराम, चन्द्रप्रकास, कार्यालय ले बाहिर आ जाथे । टेम्पो बईठ के होटल आ जाथे ।

चन्द्रप्रकास मुँह लटहाय बईठे रहय । चन्द्रकला, पुस्पा समझाते बेटा तोर नियुक्ति हो जाहय । जा तय हाथ, पाँव धोके सिव मंदिर म भगवान के पूजा करलव। मालूराम अपन कमरा म चल देथे । चन्द्रकला भी हाँथ पाँव धोये बर बाथरूप म घूस जाथे । कपड़ा बदल के पलंग म बईठ जाथे । पुस्पा ह चन्द्रकाल ल कईथे बेटा हाथ मुँह धोके चल पीले । चन्द्रप्रकास नीचे उतर के मंदिर म दर्शन करे चले जाथे । भगवान से विनती करथे । भगवान मोर नौकरी लगवा दे । कोनो पद म हो जावय । पर नौकरी लग जाय । एक किलो मोतीचूर के लड्डू चढ़ाहंव । मालूराम कईथे मय मेम्बर साहब से मिलके आवत हंव . मालूराम जले जाथे । मेम्बर के बंगला के नगर सैनिक ल चौकीदार कईथे, साहब अभी नई मिलय । कब सुबह नव बजे आ जाईये । मालूरमा कईथे चौकीदार जी मय रायगढ़ ले आय हंव । जबरदस्ती मालूराम के चिट्ठी ल दिच । सैनिक कईथे । जा बुलाय ले । मालूराम जी मय रात म किसी ल नहीं मिलव । हमर पीछू सी.आई.डी., सी.बी.आई, एल.आई.बी. वाले पीछू पड़े रथे । ऐकर कारण हम न नई मिलन । मिलके त रात दिन भीड़ लग जाही । मय रायगढ़ जिला के मोर निवास स्थान जशपुर एक माह बाद जाहंव । रेस्ठ हाउस म मिलव । कोई घबराये के जरूरत नईये । यदि बजरंग बली चाही त ओकर काम बन जाही । इंदौर म तुमन झन रहवं । जल्दी घर चले जावव । मालूराम मुँह लटकाये होटल चल देथे ।

चन्द्रकला अपन माँ ल कईथे, दाई मोर मन कहत हे काम हो जाही । माँ बेटी के मेहनत रंग लाही । पुस्पा कईथे बेटी तोर बलिदान दे देहंव तोर करजा ह कईसे छुटाही । चन्द्रकला कईथे माँ तोर करजा के एक पईसा अभी छुटच हँव । माँ के करजा ल कोई छूटे नई सकय । मय प्रयास करे हंव । मोर भाई के नौकरी लग जाय । पुस्पा के आँसू टपक जाथे । चन्द्रकला ढांढस बंधाये । ये बरस नई ओही त अगले बरस जरूर हो ही । चन्द्रप्रकास ल कईथे, अगले साल से अच्छा तियारी कर बईठ ऐ । हाँ बहिनी । जरूर जादा तियारी करके बईठव । आदमी ह मिहनत कर सकत हे । फल तो भगवान दे ही । बहिनी तोर मेहनत अऊ माँ के आशीष मोर साथे हे । जरूर मोर नियुक्ति हो जाहय । ओतके बेरा मालूराम आ जाथे । चन्द्रकला कईते आव, आव बहादुर सिपाही । युद्ध जीत के आय हच या हार के । मालूमराम कईथे, न जीत न हार । रायगढ़ आवंत हंव कहिस ऊहे मिलवे । चन्द्रकला कईथे तोर मुँह लटके हे । चल ठीक हे । ऐ साल नई तो अगले साल । चल बहुत भूख लगत हे । मालूराम कईथे, खेती कोड़ के आय हच । तोला भूख जादा लगत हे । पुस्पा कईथे बेटा चन्द्रप्रकास चल भोजनालय में खाना खा के आबो, चन्द्रप्रकास, कईथे माँ आज स्पेसल खाना खाबो । ओहू ह त नीचे हावय । मालूराम कईथे चल बने होटल म खाबो । प्लेट सिस्टम होटल म चले जाथे । मालूराम वेटर ल बुलाथे । क्या क्या बना हे ताजा, सब्जी, क्य हे । वेटर कहता हे सर ये सूची हे देख लिजीये । चन्द्रकला कईथे, दो दाल फ्राई (देशी घी) दो मलाई कोप्ता, पापड़, अचार, दही, मक्के की रोटी, तंदूरी रोटी । मालूराम कईथे । तब तक टमाटर के सूप ले आव । सूप, सलाद और पापड़ वेटर रखकर जले जाथे ।

मालूराम कईथे, ऐ ह बीयर बार ये । चन्द्रप्रकास ल कईथे कुछ चलथे जी । बीयर, कभी कभी चल जाथे । चन्द्रकला ल कईथे, तोर बर बीयर मंगवात हंव । नहीं कहि देथे । बीयर के एक बोतल वेटर रख के चल देथे . चन्द्रप्रकास दो गिलास बीयर बनाथे । मालूराम कईथे चीयर्स, चन्द्रकला पानी के गिलास लेके कईथे, चीयर्स बढ़िया भोजन करके उठ जाथे । टेबल म बईठे योजना कल के बन जाथे । चन्द्रकला कईथे, काल दाई ल इंदौर घूमाय के योजना हे । काल टेक्सी लेके दिन भीर घूमबो । होटल म ओके । गप मारके अपन-अपन कमरा म सो जाथे । चन्द्रकला मौज-मस्ती के मूड म रईथे । मौज-मस्ती करत रात म कब नींद पड़ गीच, पता नई चलिच ।



क्रमशः

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