छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Sunday, June 25, 2006

भाग-चार

चन्द्रकाल जलदी-जलदी स्नान कर तियार हो जाथे । मालूराम जी कईथे, लउहा तियार हो जा । बहुत हाथ म दरद होथे । एक हप्ता म शरीर टूटगे हे । चन्द्रकला कईथे, डाक्टर के पास सूजी लगवा लेवे । जलदी स्नान करके तियार हो जा । टेक्सी नीचे खड़े हे । दाई ल इंदौर घूमाना हे । चन्द्रप्रकास अऊ माँ तियार बईठे हे । मालूराम जी सफारी सूट पहिन के दूलहा डउका जईसे, परफ्यूम लगा के आ जाथे । महर महर कर रहय । चन्द्रकला कईथे वाह क्या परफ्यूम लगाये हो बरात म जा रहे हो । होटल से नीचे उतर के टेक्सी म बईठ के भ्रमण म निकल जाथे । सबसे पहिली महल को देखथे । अन्नपूर्णा मंदिर, गनेस मंदिर, गार्डन, आखिर म राजाबाड़ा देखे बर जाथे । राजबाड़ा म रेडीमेड के कपड़ा बच्चा मन बर लेथे । चन्द्रकला ह चार पाँच ठन कीमती लूगरा खरीदथे । पुस्पा देवी के दो लूगरा, चन्द्रप्रकास बर सर्ट व पेंट मालूराम सब झन बच्चा मन बर रेडीमेड कपड़ा खरीदथे । राजबाड़ा से समान खरीद के टेक्सी के पास जाथे ।

पुस्पा ल टेक्सी स्टेन्ड म बलराम पांड़े जईसे एक फादर दिखथे । पुस्पा हड़बड़ा जाथे । चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास, मालूराम कईथे, येकर चेहरा बलराम जी से मिलत हे । फेर येल फादर के ड्रेस म हे । जब ले चन्द्रकला होये हे । तब ले घर नई गय हे । मालूराम ल कईथे, जावव तो पूछ के देखव । का नाव हे । डरत, डरत पूछथे । माफ कीजियेगा, सर आपका नाम क्या है ? मैं रायगढ़ से आया हूँ । नगरपालिका के अध्यक्ष मालूराम अग्रवाल मेरा नाम हे । फादर जवाब देथे । रायगढ़ के नाम सुनके चमक जाथे । फादर कईथे, मेरा नाम फादर बेंजामिन फ्रांसिस है । चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास, अऊ पुस्पा पांड़े आ जाथे । पुस्पा पांड़े पास जा के देखथे तो कईथे, तोर पिता जी ये । फादर कईथे क्या बात कर रहे हैं । मेरा कोई बेटा नहीं हैं । पुस्पा पांड़े पाँव पड़थे । चन्द्रप्रकास, चन्द्रकलाह पैर पड़थे । फादर कईथे, हाँ हाँ याद आ रहा है । मेरा जन्म रायगढ़ के दरोगापारा में हुआ था । हम लोग अधिकारी बंगला में रहते थे । फेर पुस्पा देवी याद दिलाथे । तोर पिता जी ह नगरपालिका म सेक्रेटरी रहिच । मैं तोर पत्नी पुस्पा अंव । मय सिक्छिका रहें व । फादर के उमर पचहत्तर साल हो गय रहय । चश्मा म आँखी बहुत कम दिखय ।

फादर बेंजामिन कईते चलव घर म बात चीत करबो । मालूराम कईथे, चलो अच्छा होईच । पांड़े जी मिल गे । पुस्पा देवी के पुराना दिन याद आ जाथे । फादर अपन पत्नी रोमा से परिचय कराथे ये मेरी पहली पत्नी पुस्पा देवी, ये चन्द्रकला बेटी, ये चन्द्रप्रकास बेटा, और आप मालूराम जी अग्रवाल नगरपालिका अध्यक्ष रायगढ़ के । रोमा अऊ फादर बेंजामिन बहुत खुश होथे । चन्द्रकला कईथे हमर किसमत हे हमन ल माँ के साथ बाबू जी मिलगे । फादर ह पूछिथे । कईसे आय हव इंदौर । चन्द्रप्रकास सब ल बता देथे । फादर कईथे, चन्द्रप्रकास यहाँ तो बहुत गोलमोल चलता है । मय ईश्वर से प्रार्थना करूँगा, जरूर सुनेगा ।

रोमा कईथे, भोजन करके जाईयेगा । मालूराम कईथे, नहीं नहीं । फादर निवेदन करथे । मेरा अपना खून, मेरा पत्नी बच्ची हे । अपने घर में हे । क्यों सरमाते हो । मालूराम कईथे, फादर हम लोगों को रायगढ़ वापस जाना भी हे । पुस्पा देवी कईथे, ठीक हे भोजन यहाँ करबो । चन्द्रकला बेटी, चन्द्रप्रकास माँ के भोजन बनाय म सहयोग करव । लाव मय सब्जी काट देथंव । अग्रवाल जी हा पूछथे । फादर कितने बच्चे हैं ? फादर बताथे । तीन लड़कियाँ हैं तीनों विदेश मे पढ़ रही हैं । वही शादी कर ली । माँ बाप को पता नहीं है ।

फादर कईथे, मोर करम के फल भोगत हंव । महूँ अपन पिताजी के बात नहीं माने हंव । आहेसने मोर लड़की मन मोर बात नई मानत ऐ । चन्द्रप्रकास सुनत रईथे । कईथे, पापाजी, दादी जी तोर पाँच साल पहिले खतम हो गया है । सब्बेच सम्पति मोर नाम म वसीयत कर देहे । वसीयत म ये भी लिखे हे । मोर चिला ल मुखाग्नि मोर बेटा बलराम झन देय । फादर कईथे मेरा बद किस्मती है मय अपना धमर् दलकर ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया हूँ । परंतु मुझे कोई अपसोस नहीं हैं । मैने अपनी धर्म बदलकर अच्छा कया, आज फादर हूँ । मेरी तीनों लड़कियाँ विदेश में हैं । लाखों रूपया बैंक बैलेन्स है । पुस्पा के आँसू टप टप गिर जाथे । कईथे, पांड़े जी मोर बर कुछ छोड़े रहितव । मय आज तक तुहर भरोसा म दिन काटे हंव । सघवन होके विधवा बने हावय । मोर दुःख ला कोन सुन ही । फादर कईथे, पुस्पा जी आज सत्तर साल के हो गय हंव । कुछ दिन जईसे काटे हंव वईसे कट जाही ।

सब झन एक साथ डाइनिंग टेबल में बईठ के भोजन करथे । चन्द्रकला कईथे, बाबू जी रायगढ़ आहू । नहीं बेटी अभी नहीं आऊँगा । मेरी अर्थी जरूर मेरी मातृभूमि में मिलेगी । मैं वही दफन होऊँगा । पिता जी के सराफ लगे हे । इहां मोरो कोनो नईये । फादर होने के कारण सब मेरा हे । संसार मेरा हे । पुस्पा देवी कईथे, तोर बेटा के नौकरी जरूर लगवा देहव । चन्द्रप्रकास चन्द्रकला फादर के पता नोट कर लव । फादर के नेम प्लेट म लिखे रहय । फादर डाक्टर बेंजामिन फ्रांसिस, रेसीडंसी एरिया इंदौर । फोन नं. 31796 । रोमा ह पुस्पा देवी ल गले मिलके बहुत रोथे । बहन मैने, बहुत दुःख दिया है । मेरे कारण तुम्हे दुःख मिला है । मय ईश्वर से क्षमा मागूँगी । रोमा विदेसी कपड़े । परफ्यूम, एअर बेग, सूटकेस, अऊ पाँच हजार रूपिया देथे । चन्द्रप्रकास ल कईथे बेटा ये आपका घर है । सारी सम्पत्ति तुम्हारी हे । मेरी बच्चियाँ विदेश में है । मय भी विदेश चली जाऊँगी । जब भी जरूर हो । आप आ जाईयेगा । चन्द्रप्रकास चरण छूके प्रणाम करथे । रात के दस बज गय रहय । मालूराम कईथे, चन्द्रकला अब चलो । पुस्पा देवी फादर के पाँव म गिर जाथे । रो रो के कईथे, पतिदेव मोहू ल तारदेव । अब जादा दिन के जिनगी नईये । फादर आशीष देथे । चन्द्रकला, अऊ चन्द्रप्रकास घलो ल आसीरबाद देथे । मालूराम जी परनाम करके होटल म चल देथे । रात म थके होय के कारण जल्दी सो जाथे । रायगढ़ बर काल शाम के 4 बजे गाड़ी रहय ।

फादर बेंजामिन फ्रांसिस ल रात र नींद नई आईस । रात भर करवट बदलत रहिस । फादर के मन एक नारी ल छोड़े के अपराध बोध धर कर दिच । पुस्पा के का अपराध रईस हे । तेला मय छोड़ देवं । मात्र चालीस चाल के उमर तक लईका नई होइच । बेचारी पुस्पा पूरा जीवन ल पति रहिके, बिना पति के सुख के काट दिच । अऊ बेटा ल बेटी ल पढ़ा के नौकरी बर जूझत हे । चन्द्रप्रकास पांड़े बर कुछ नई कर सकेंव । बाप होय के धिक्कार हे । पिता धर्म के पालन नई करे हंव । फादर रात भर आँसू बहात रहै । रोमा कईथे, डार्लिंग क्यों परेशान हो रहे हो । कल चर्च जाकर ईश्वर से माफी माँग लेना । सब ठीक हो जायेगा । यदि आपका विस्वास नहीं है तो कल सुबह होटल माया जाकर पुस्पा बहल से माफी माँग लेना । चन्द्रप्रकास अऊ चन्द्रकला से मांफी माग लेना । रोमा बढ़िया सलाह देथे । रोमा कहती है । डार्लिंग “पुस्पा बहन जवानी में बहुत खूबसूरत रही होगी । क्योंकि आज सत्तर साल की उमर में आकर्षक सुन्दर है ।“ कहा भी गया है । “ये खण्डहर कभी बुलंद इमारत रही होगी ।“ फ्रांसिस के बीते दिन के याद ताजा हो जाथे । कईथे, मेम वास्तविक में रायगढ़ सहर में सबसे सुन्दर महिला थी । मय लट्टू की तरह घूमता था । बहुत प्यार दुलार करता था । पुस्पा भी उतना प्यार करती थी । दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे । रोमा कहती है, फिर क्यों छोड़ दिये । फादर बताता है । मेरा सर्विस भोपाल में लगने के कार भोपाल आ गया । पिताजी वृद्ध थे बिमार थे । उनकी सेवा के लिये घर में रहना जरूरी था । मय बीच-बीच में घर जाता था । पुस्पा की नौकरी सिक्छिका के पद पर नगरपालिका रायगढ़ में हो गया था । भोपाल से बहुत दिन बाद जाने लगा । फिर आपके मोह जाल में फँस गया । आज भी फँसा हूँ । अपने परिवार जाति धर्म से अलग विधर्मी बन गया हूँ । डार्लिंग यहाँ फायदे में हो । आज फादर बन गये हो । फादर बोलथे हाँ हाँ । रोमा कहती है जल्दी चर्च में प्रार्थना करते हैं ।

फादर बेंजामिन फ्रांसिस चर्च से मांफी माँग कर आ जाते हैं । परंतु मन का अपराध बोध कम नहीं होता । आंतरिक मन बार बार अपराध बोध से बता रहा था । फादर तुम्हें बिना मांफी माँगे प्रभु ईसु माफ नहीं करेगा । फादर माता मरियम से माफी माँगता है । परंतु शाँत नहीं हो रहा था । फादर कार निकाल कर पार्क कर देता है । फिर अंदर जातकर रोमा से कहता है । कि प्रभु ईसु के सोने की तीन क्रास केली फोर्नियां से बच्ची ने भेजी हैं । उसे देना, में चन्द्रप्रकास को दूँगा । रोमा कहती है ठीक हे डार्लिंग मेरे तरफ से बहुत-बहुत प्यार कहना । क्योंकि वंस चलाने के लिये बेटा ते हे । चन्द्रप्रकास का इंदौर में अपने पास रखेंगे । किसी अच्छी सुन्दर मेम से उसकी शादी चर्च में करा देंगे । ठीक है डार्लिंग कहकर । फादर कार से होटल पहुँच जाता है । काउन्टर में रूम नम्बर पूछकर तीसरे मंजिल के कमरा नं. 19 एवं 20 में पहुँच जाता हे बाहर से बेल बजाता है । पुस्पा दरवाजा खोलती है । फादर को देखकर भौचक्क रह जाती हे । पुस्पा कभी सोची भी न थी । पुस्पा पलंग म लेके बैठा देथे अऊ चरण स्पर्श करथे ।

फादर फ्रांसिस पलंग म बईठ के कईथे, देवी जी मय रात भर अपराध बोध से सो नही पाया । मुझे प्रभु ईसु भी माफ नहीं किया । इसलिये देवी जी मुझे माफ कर दो । फादर के आँख से आँसू टपक जाथे । पुस्पा देवी तो जोर-जोर रोथे आँसू बहाके । दुःख हल्का कर लेथे । माँ के रोवई ल सुन के चन्द्रप्रकास जाग जाथे । चन्द्रकला भी आ जाथे । चन्द्रकला फादर के चरण स्पर्श करथे । फादर आसीरवाद देथे । सुखी रहो । चन्द्रप्रकास पलंग ले उठके परनाम करथे । चन्द्रकला कईथे, बाबू जी का होगे । फादर कुछ नहीं होगे हे । मय जिनगी भर आप लोगो को दुःख दया हूँ । इसलिये मांफी माँगने आया हूँ । मुझे सब कोई माफ नहीं करिहव । मोर आत्मा ह कलपत रहिहे । मन भटकत रहिहे । पुस्पा देवी कईथे फादर आप मोर पतिदेव आव । तोर जीयत ले मय दूसर लनई स्वीकारे हंव । तुहार गोड़ म मय तरिहव । माफी तो मोला माँगना चाही । काबर मय तोला अपना अंचरा बांध के नई समझ सकेव । एक पत्नि ह अपन पति के सुख दुःख म काम नई आईच । मय अपन पति ल नई समझ सकेव । ओला रोक नई पायेंव । ये हा मोर गलते हे । पुस्पा गोड़ म गिर के मांफी माँगे लगथे । फादर पुस्पा ल पाँव ले उठा के हिरदे ले लगा लेथे । आँसू आ जाथे । कईथे छत्तीसगढ़ी नारी के संस्कार आज भी बाकी हे । मय छत्तीसगढ़ी संस्कृति को प्रणाम करता हूँ । एक आप देवी हो । एक रोमा डण्डे बेलना से मारती हे । आज भी मारती पीटती हे ।

फादर आँसू पोछ के कईथे, बेटा चन्द्रप्रकाश मय तो बगड़ गहेंव फेर तय झन बगड़बे । प्रभु ईसु आपकी साहयता करे । सोने के क्रास को चन्द्रप्रकास के गले म डाल थे । एक क्रास पुस्पा देवी ल पहिनाथे । चन्द्रकला कईथे, बाबूजी कुछ गड़बड़ तो नई होवय । फादर कईथे नही बेटी । मुसीबत म प्रभु ईशु काम आही । फादर बीस हजार रुपिया भी देथे । पुस्पा देवी कईथे, हम ला रुपीया नहीं चाही । आप कभू मिलगय तो लाखों रुपिया ला जादा हे । सबके आंख म आँसू आ जाथे । मरम छुवइया परसंग आ जाथे । दुःख के आँसू बह जाथे ।

चन्द्रप्रकास ह फादर ल गाडी तक छोड़ के आथे । पाँव छूके परनाम करथे । फादर कार म चल देथे । चचर् म जाके प्रभु ईशु, माता मरियम के प्राथर्ना करथे । प्रभु ईशु गलती ल माफ कर देथे । मन में शांति आ जाथे अपराध बोध से मुक्त हो जाथे । चर्च से फादर बंगला म जाथे । फादर से पुछथे मिल लिये अपने औरत बच्चों से । हाँ मय माफी माँग लिया । रोमा कहती है बहुत अच्छा अपनी गलती स्वीकार कर माफी माँगना ।

चन्द्रकला कईथे , दाई जब किस्मत चमकते ह छप्पर फाड के । पुस्पा कईथे नहीं बेटी दूसरे के सम्पत्ति ह पचय फरय (फलय) नहीं । चन्द्रप्रकास किस्मत वाला हे । चन्द्रप्रकास के नौकरी अब लग जाही । चन्द्रकला बहुत खुश हो जाथे । मालूराम आ जाथे । कईथे, फादर आय रहिस । सब देय रहथे बताईच । मालूराम कईथे, चलव नास्ता पानी कर लव । बिलासपुर इन्दौर एक्सप्रेस से जाना हे । होटल से नीते भोजनालय म चले जाथे । बढ़िया स्पेसल थाली चार मंगाथे । सुद्ध साकाहारू भोजन । मस्त खाना खाके पान चाबाथे । रायगढ़ जाय के तियारी करे लगथे । बहुत समान होगे रहय । दो टेक्सी म होटल के बील देके टेसन चल देथे । इंदौर बिलासपुर एक्सप्रेस ठीक समय म छूट जाथे । छत्तीस घंटे बाद बिलासपुर पहुँचथे । मालूराम कईथे , आप मन जावव । मय पाछू आहंव । पुस्पा कईथे ठीक हे सेठ जी । चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास रायगढ़ आ जाथे । रात के भोजन करके सूत जाथे । बिहनहा राम देव आ जाथे । चन्द्रकला आफिस जाय के तियारी करत रथे । पुस्पा पांडे भोजन बनाय के तियारी म रहय । रामदेव बजार से सब्जी ले आव । रमौतीन के क्या हाल हे । रामदेव कईथे, का बतांवव भऊजी बीमारी नई छोड़त हे । चन्द्रसेन अऊ पूरनिमा ठीक हे । रामदेव बाजार से लउहा सब्जी लेके आ जाथे । चन्द्रकला सुन्दर छरहरी युवती दिखत रहिस । नवा लूगरा लाय रहय । खाना, खाके, लूगरा पहिन के निकलिच, देखईया देखते रह जावय । कोन मेडम आ गे हे ।मताय हथिनी, हिरणी जईसे झूम झूम के चलत रहिच चन्द्रकला अपन कुर्सी ल साफ करके बईठ जाथे । हाजिरी रजिस्टर म दसतखत कर देथे । चन्द्रकला के सहेली सहकर्मी म कईथे, दीदी तोर रुप के निखार आ गे हे । का का करे हच दीदी । चन्द्रकला का ला बताव । अपन सहेली मन इंदौर, माण्टू, घूमेय के बात बताईच । चन्द्रप्रकास के नौकरी लग जाही कहिच । साक्छात्कार पी.एस.सी. के बढ़िया गय हे । चन्द्रकला अपन रोजिना के फाईल ल निपटाईच । बडे बाबू अऊ सी.एम.ओ. साहब ल भी इंदौर के बारे में बताईच । साम साढ़े पाँच बजे आफिस छुट्टी के बाद घर चल देथे ।

रमौतीन बीमार हालत म धीर – धीरे पुस्पा दीदी ल मले जाथे । रमौतीन ल सब कुछ बता देथे । चन्द्रकला के रुप म निखार आय रहय । रमौतीन कईथे दीदी । चन्द्रकला ल मोर बेटी कउन किहहे । चन्द्रकला रमौतीन के पाँव छूथे । चन्द्रकला कईथे मोर दूदी ठ माँ हे । दूनों के रुप रंग मोला मिले हे । सरीर रमौतीन दाई ले अऊ गुन पुस्पा दाई ले । पुस्पा, रमौतीन गाल ल चुम लेथे । चन्द्रकला तय भाग मानी हच । तोर छोटे बहिनी अऊ भाई हे । ओहू मन ल नौकरी लगवा दे । ठीक हे दाई । चन्द्रप्रकास के नौकरी लग जाय पिहली । चन्द्रकला इंदौर ले लाने कपडा समान ल देथे । रमौतीन माँ पूरनिमा ल आज भेज देबे । रात मोर संग सूतही पूरनिमा रात 9 बजे आ जाथे । पूरनिमा बडी माँ के पैर छूथे । सुखी रहो आसीस देथे । पुरनिमा संग चन्द्रसला भोजन करके सूते के तियारी करथे । चन्द्रकला अपन कमरा म सो जाथे । पुस्पा ह जागत रईथे ।

चन्द्रकला, पुरनिमा ल कईथे, बहिनी दरवाजा बंद कर दे । बहिनी हाथ पाँव दरद देथे । हाथ पाँव दबा दे । तेल ले आ । चन्द्रकला कपडा उतार देथे । पुरनिमा तेल पीठ हाथ, पाँव म लगाथे । छाती म तेल लगाथे । ठीक से मालिश कर बहिनी बहुत दरद हे । पूरनिमा कईथे दीदी जरुर कोई बात हो ही । पूरनिमा जांघ म तेल लगाथे । चन्द्रकला जोर से से दबवाथे । बहुत दरद देत हे । जरुर कोई घटना होय हे दीदी । चन्द्रकला बताथे । मय इदौर म बिहाव कर डारेहंव । पति पत्नी के संबंध स्थापित होय हे । सात दिन म कुसीयार कस चुहंक डारे हे । पुरनिमा दीदी के चुमा लेथे । तभे तो दीदी कली से फूल बन गे हच । पूरनिमा पीठ मे तेल लगा के मालिस करथे । मालिस, करते करते चन्द्रकला के नींद पड जाथे । पूरिनमा साया, चादर ओढ़ा के संग म सो जाथे । पूरनिमा सोचते दीदी ह पूरा आनंद लेहे हे । पूरनिमा चपट के सो जाथे । पूरनिमा के नींद नई पड़य । दीदी के देहं ल रगड करके सुख करथे । पूरनिमा पसीना पसीना हो जाथे । पूरनिमा ल थोड़ा गीला महसूस होईच । ऊँगली में छूके देखिच । चीपचीपा पदार्थ लगिच । बाथरुम जाके । साफ सुथरा होके आ जाथे । चन्द्रकला नींद म मस्त हो जाथे । पूरनिमा सांत होके, दीदी से चिपट के सो जाथे ।

पुस्पा देवी सुबह जलदी सोके उठ जाथे । चाय बना के रख देथे । चन्द्रकला, बेटी चन्द्रकला । पूरनिमा के नींद खुल जाथे । दरवाजा खोलथे । बहुत टाईम होगे हे । चन्द्रकला ल जगा दे । पूरनिमा दीदी कहके जगाथे । तन मा कपडा नई रहय । उठ के पेटीकोट, पोलखर लूगरा पहिनीच । बाथरुम म घूस जाथे । शौच, ब्रुश करके तब सोफ म आके बईठ जाथे . पुस्पा चाय लेके देथे । चन्द्रकला कईथे, माँ हाथ पैर म दरद बहुत रहिच । रात म पूरनिमा तेल मालिस करिय । पैर दबावत रहिच । मोर नींद परगे । अभी जागे हंव । कई दिन ले नींद पूरा नई होय रहिच। आज पूरनिमा के संग निडर होके सोय हवं । पूरनिमा कईथे, दीदी बहुत सोय हच । कुछु के पता नई होईच । चन्द्रकला कईथे, बहिनी लगातार आठ दिन ले सोय नई रहेंव । चाय के चुस्की. दूनों बहिनी लेके पीथे । चन्द्रकला कईथे, दाई बढ़िया चाय बनाय हच । आठ दिन के बाद अच्छा चाय पीये बर मिलिच हे । नवभारत पढ़त, पढ़त चाय खतम करते थे । पुस्पा कईथे, बेटी लउहा नहा ले मय खाना बनात हंव । पूरनिमा कईथे, बडी माँ स्जी ल दे । मय काट देथंव । आलू गोभी, मटर पकाथे ।

चन्द्रकला बाथरुम म नहाय चले जाथे । साबुन से रगड – रगड के नहाथे । बढ़िया साबुन से स्नान करके निकलथे । पूरनिमा टावेल देथे ।पूरनिमा कईथे दीदी बहुत सुन्दर दिखत हच । चन्द्रकला कईथे तहू तो बहुत सुन्दर हच । मोर ले का कम हच । तय तो मोर ले सुन्दर हच । तोर जल्दी बिहांव करे ल परही । कपडा पहिन के पूजा करथे । दस बजे खाने के टेबल म बईठ जथे । आफिस जाय बर कपडा पहिन के तियार हो जाथे । बढ़िया नया लुगरा निकाल के पहिनथे । पूरनिमां संग देथे । जल्दी – जल्दी बेग रख के आफिस चल देते थे । बडे बाबू अऊ सब झन देखथे रहि जाथे । कईसे सज के आय हे । दुल्हन जईसे । सहेली मन पूछथे । कतका के लूगरा ए । चन्द्रकला कईथे, पाँस सौ रुपिया के लूगरा ए । चन्द्रकला रुटिन के काम करत रईथे ।

मालूराम दफ्तर म आके बईठ जाथे । सब पार्षद मन घेर के बईठ जाथे । अपन अपन समस्या ल रखिथे । अध्यक्ष महोदय, बडे बाबू ल नोट कराथे य़ एक पार्षद दीरु पीके बडे बाबू से हुज्जत करथे । सब कोई ल देख लेने के धमकी देथे । गाली गलोच म उतर जाथे । चन्द्रकला कईथे काबर गाली देतहच भईया । चन्द्रकला के गोठ सुन के गुस्सा जाथे, कईथे छिनार, किसबिन, दूसर जगह मौज मस्ती करत हच , हम ल काबर नई दच । सब कर्मचारी गुस्सा होके ओला मारे ल दउड़थे । चन्द्रकला के गुस्सा बढ़ गे । चन्द्रकला कईथे , भड़वा रोगहास, दारु पीके आफिस म गाली गलौच देत हच । महूँ ल अनाप – सनाप बोलत हच । तोर दाई, बहिनी नई हे रे साला । चप्पल उतार के चार चप्पल मारिच । सब कर्मचारी मन पकडी। पार्षद भागते जाय य़ चन्द्रकला चप्पल लेके दउडाईच पार्सद टाउन हाल ले बाहर भाग गये । पार्षद के नंगाई से नगरपालिका कार्यालय ल कमर्चारी मन बंद कर देथे । पार्सद के खिलाफ पुलिस म रिपोर्ट दर्ज करा देथे । पार्सद के गिरफ्तारी के माँग करथे ।

दूकर दिन अखबार रायगढ़ संदेश के मुख्य पृष्ठ म छपथे । नगरपालिका के पार्सद की चप्पल से पिटाई । नगरपालिका के महिला कर्मचारी सुश्री चन्दर्कला के साथ अभद्र व्यवहार के कारण पार्सद की चप्पल से पिटाई की गई । नगरपालिका कर्मचारियों ने काम बंद कर दिये । पार्सद के खिलाफ कार्यवाही के लिये रायगढ़ बंद करने का निर्णय लिया गया है । पुस्पा अखबार पढथे । चन्द्रकला बताये नहीं अतेक बड़ घटना घट गइस । नहीं माँ । मय बताने वाला रहेंव, दिमाग खराब होने के कारण नई बता सकेंव । पुस्पा ल सब बताथे । माँ गाली के साथ इंदौर म जोके गुलछर्रा उड़ावत रहे, हमन ल मालूम नई हे हमर संग काबर नई जावच । चल कतका पईसा लेवे । मोर गुस्सा बढ़गे चार चप्पल पीट देंव । पुस्पा कईथे बोटी ठीक करे भड़वा ल मार के । पार्सद होके दारु पीके हुल्लड करथे बडे बडे अखबार म मुख्य पृष्ठ समाचार छपथे । कलेक्टर कमिश्नर पुलिस अधिक्षक, नगर पालिका आके पूछताछ करथे । रायगढ़ बंद शांति पूर्वक निपट जाथे । नगर पालिका के घटना मुख्य मंत्री ल कलेक्टर जानकारी देथे । चन्द्रकला के साहस के सबे जगा चर्चा होथे । महिला कमर्चारी मन चंद्रकला के सम्मान करथे । चन्द्रकला के हिम्मत बाढ़ जाथे । चन्द्रकला साहस से काम करथे । सब कर्मचारी अऊ पार्सद मन चन्द्रकला से डरे लगथे । चन्द्रकला बढ़िया जीवन बिताय लगिच । नगरपालिका कमर्चारी संघ के अध्यक्ष बन जाथे ।

मालूराम अग्रवाल के पत्नी ह तीन दिन ले खाना पानी छोड दे रहय ।मालूराम ह कहय मर जाहंव । तय काबंर अईसे करे । आज बडे – बडे पेपर म आय हे । मालूराम के रखैल बनगे हे । मालूराम कईथे, अईसे कोई बात नईऐ । विपक्ष वाला मन जबरदस्तू झूठी अफवाह उडाय देय हे । रायगढ़ सहर के गली, सोर घर घर म मालूराम के चर्चा होत रहय । मालूराम ल का होगे हे । पत्नी अऊ बडे बड़े पाँच लडका अऊ तीन लड़की हावय । लड़की मन बिहाव करे के लायक होगे हे । मालूराम पागल होगे हे । अग्रवाल समाज के पंचायत होथे । अग्रवाल समाज ह सख्त हिदायत देथे । तय अपन घर परिवार ल देख । राईस मील, कपड़ा दुकान, मकान किराया, कागज का धंधा । जऊन मन लगय कर । फेर ऐ धंधा छोड़ ।

मालूराम पत्नी ल बहुत समझाथे फेर नई मानिच । लोग लईका मन ल घर के खरसिया मईके चल देथे । मालूराम के छिछा – लेदर खरसिया ससुराल वाले मन करथे । मालूराम एक महीना बाद खरसिया जाके पत्नी सरला देवी से माफी माँगथे मोर गलती होगे अब नई करंव । कार म बईठा के ले आथे । पहिले जईसे परिवार चले लगथे । मालूराम कुछ दिन ले चन्द्रकला से मिले नई जावय । पुस्पा कईथे, बेटी सेठ जी परिवार वाला हे । टूरी मन के बिहांव करने वाला हे ओकरे सेती तोर ले दूरिया बनात हे । टूरी के सादी निपटा के फेर आय लगही ।

चन्द्रकला कईथे माँ कब तक नगरपालिका के मकान म रहिबो । जमीन लेके छोटे मोटे मकान बनवा लेथन । छोटे पडत हे मकान ह । चन्द्रकला पूरनिमा ल कईथे, कईसे सूखत जात हच । चल महिला डाक्टर दिखा देथंव । डाक्टर ह पूछिथे काकर संग सोथे । चन्द्रकला कईथे मोर संग सोथे । पूरनिमा के मानसिक स्थिती ठीक नई हे । अलग सुलाओ । विपरीत सेक्स के प्रति विरक्ती हो गे हे । साथ सोय म बढ़ही । गोली के परची लिख देथे । पूरनिमा गोली खाय अगथे । चन्द्रकला कईथे, आज मोर संग मत सूत । जा के अलग सो । चन्द्रकला पुस्पा अपन अपन पलंग म सो जाथे । पूरनिमा ल नींद नई आईच । जाके चन्द्रप्रकास के संग सो जाथे अऊ दरवाजा बंद कर लेथे । चन्द्रप्रकास हडबडा जाथे । पूरनिमा कईथे, मय अंव नींद नई पडत ये । डाक्टर महीला के संग सो ल मना करे हे । पूरनिमा रपोट के सोये लगथे । चन्द्रप्रकास घलो गरम हो जाथे । कसके पोटार के चुमे लगथे पूरनिमा मानसिक रोगी रईथे । निसफिकिर होके आनंद लेथे । रातभर नई सो सकिन । जागते – जागते रात कटगे । पूरनिमा जल्दी जल्दी उठ के अपन पलंग म जाके सोगे । चन्द्रप्रकास ह दस बजे तक सोवत रहिस । पुस्पा अऊ, चन्द्रकला बार – बार जगाथे नई उठिच । चन्द्रकला आफस चले जाथे । पूरनिमा के मानसिक स्थिति ठीक होगे रहय । पूरनिमा अपन घर चल देथे । चन्द्रप्रकास देरी म चाय पीथे । पुस्पा कईथे बेटा आज लेट कईथे जागे । माँ रात म कोई मोर कमरा म मोर संग आके सोगे रहिच । नींद म मय समझ नहीं पायेंव । रात भर जागे ल पिड़च । चन्द्रप्रकास स्नान, भोजन करके लायब्ररी चल देथे ।
क्रमशः
by-www.srijangatha.com

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