छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Sunday, June 25, 2006

भाग-पाँच

रायगढ़ जूट मील के मजदूर संघ के हड़ताल के तीसरा दिन रहय । कामदेव कईथे, पूरा रायगढ़ सहर बंद कराये ले माँग पूरा होहय । जूट मील प्रबंधन सस्ता दर म लेबर बिहार ले आय रहय । धीरे धीरे करके छत्तीसगढ़ मजदूर ल निकारथ रहय । कामदेव ल पता चलथे । जूट मील म लगभग एक हजार मजदूर म पाँच सौ बंगाल, उडिसा, बिहार के अऊ 500 मजदूर पूरा भारत देश के रहय । कामदेव समर्थन जूटाय बर नगरपालिका जाथे । चन्द्रकाल कामदेव कका के पाँव छुथे । सुखी रहो बेटी । कामदेव पूछथे रामदेव भईया कईसे हे । चन्द्रकला कईथे दाई ह बीमार रईथे । लईका मन ठीक हे । कामदेव कईथे जूट मील म मजदूर के हड़ताल चलत हे । तीन दिन होगे । मैनेजमेंट के आँखी नई खुलत ऐ । कामदेव कईथे बेटी नगरपालिका कर्मचारी संघ के सहयोग चाही । चन्द्रकला बडे बाबू दीक्षित, उपध्याय, ठाकुर सिंह, श्याम लाला यादव, नंदू पटेल, श्रीमति बोहिदार, जयंत बोहिदार, निधि सफाई कमर्चारी से समथर्न देय बर कईथे , मिटिंग के समय एम. ए. गफ्फार भाई आ जाथे । कामदेव नमस्कार करथे । चन्द्रकला से गफ्फार भाई कईथे, बेटा, जूटमील मजदूर संघ ल सहयोग देना है । फेर तय नगरपालिका कमर्चारी संघ के अध्यक्ष अच । मिटिंग म तय होथे ।

गफ्फार भाई ट्रेडयिनयन किंसल, तृतिय वर्ग कमर्चारी संघ सफाई कांग्रेस, नगरपालिका कमर्चारी संघ । हमाल, रिक्सा, चालक संघ जूटमील संघ लगभग दो हजार लोगों की जबरदस्त जुलूस निकालथे । बैड बाजा के साथ दो किमी लम्बी जुलूस नारे बाजी करत जात रहिस । आगू – आगू चन्द्रकला, गफ्फार भाई, कामदेव, लक्ष्मण सिंह ठाकुर चलत रहिन । कलेक्टर कार्यालय ल चारों ओल ले घेर लेथे । कलेक्टर प्रसन्न कुमार दास ल पता चलथे । पुलिस अधिक्षक विजय वाते ल टेलीफोन करके बुलाथे कलेक्टर म माँग पत्र चन्द्रकला ह दिच । कलेक्टर साहब मील मैनेजर ल बहुत डांटिच । कल माँग पूरा होना चाहियें । नहीं तो मील में ताला लगवा दूँगा । मैनेजर कहथे सर सेठ जी से सलाह लेके बताहंव । मैनेजर के पीछे पुलिस अधीक्षक ल लगा देथे । कलेक्टर साहब बाहर जुलूस के सामने बोलथे । मजदूर के ज्यादा से ज्यादा माँग पूरी की जायेगी । नही तो जूट मील बंद हो जायेगी । मैनेजर पर पुलिस विभाग दबाव डालथे । चन्द्रकला, गफ्फार भाई, कामदेव, कलेक्टर साहब के जय जयकार करथे । हँसी खुशी के साथ जुलूस वापस रायगढ़, जूट मील के सामने धरना स्थान म आ जाथे । जुलूस आमसभा के रुप म बदल जाथे । कामदेव ह सभा ल सम्बोधित करथे । हडताल ल समर्थन देय बर, चन्द्रकला अऊ नगरपालिका के कर्मचारी साथी मन एम. ए. गफ्फार भाई तृतीय वगर् कमर्चारी संघ. बैंक कमर्चारी संघ कृष्ण चंद्र भारद्वाज, सबे जूरे भाई बहिनी मन ला धन्यवाद देथे । अऊ अस्वासन देथे के रायगढ़ के सब मजदूर भाई बहिनी सब एक हन । गफ्फार भाई, चन्द्रकला सभा ल सम्बोधित करथे । मजदूर एकता ल बनायें रखे बर सलाह देथे । मैनेजमेंट ल चेता देथे , के माँग पूरी नई करही तब तक धरना जारी रईही । सभा समाप्त हो जाथे ।

कामदेव चन्द्रकला ल, घर तक छोड़े जाथे । कईथे बेटी मोर लाज ल बचा दे हे । पुस्पा कईथे, चाय बनावत हंव। चाय बिस्किट कामदेव खाथे । दिन भर के थके । धरना स्थल में चल देथे । सभी धरना म बईठे मजदूर संग बईठ जाथे । धरना ल चालीस दिन होत रहिस । जूट मील प्रबंधन ह अपन कार्यालय कलकत्ता ले जाथे । बार बार के हड़ताल से उत्पादन कम हो जाथे । ऐकर कारण बहुत घाटा म चलथे । कलकत्ता से कलेक्टर ल फोन आथे के प्रबंधक कमेटी ह जूट मील बंद करके निर्णय लेय हे । दूसर दिन गेट म बड़का ताला लटका देथे । बाहर बोर्ड म लिख देथे । अनिश्चिचकाल के लिये मील बंद किया जाता हे । मैनेजमेंट रईथे कलकत्ता । कामदेव अऊ संगवारी मन के हवा गुल हो जाथे । जूटमील एरिया म हाहाकार मच जाथे एक महीना तक मजदूर मन देखथे । फेर मील खुले के आस नई दिखिच । मजदूर संघ म जबरदस्त लड़ाई मारपीट हो जाथे । कई मजदूर ल जेल जाना पड़थे । कई मजदूर अस्पताल म भरती हो के इलाज कराथे । पुलिस विभाग के सुरक्षा के लिये पुलिस चौकी चाकी के स्थापना करथे । मील बंद होये ले वहाँ लूटमार, चोरी, डकैती बढ़ जाथे । पुलिस विभाग परेसान हो जाथे । कलेक्टर साहब बोलते हे सर आप मील को चालू करवा दे । कलेक्टर के प्रयास के बाद भी जूट मील के ताला नई खुलिच ।

चन्द्रकला स्नान करके आ जाथे । पुस्पा कईथे बेटी आज का रांधव । चन्द्रकला कईथे, दाई आज मूनगा, बड़ी बना । पुस्पा दूनों मिलके भोजन बनाथे । पुस्पा कईथे, बेटी चन्द्रप्रकास के रिजल्ट कईसे नई निकलत हे । चन्द्रकला कईथे माँ एक दो दिन म निकरईया हे । चन्द्रप्रकास घूम के आ जाथे । चन्द्रप्रकास पी.एस.सी. के रिजल्ट पता कर ना । तीनो जने एक साथ बइठ के जेवन जेथे । चन्द्रकला कईथे, दाई तोर हाथ के सब्जी बहुत मिठाथे । चन्द्रप्रकास कईथे, मुनगा बड़ी खाय म मजा आगे । चन्द्रप्रकास कईथे, दीदी रात म पूरनिमा ल नींद नई आवय । मनोचिकित्सक से जाँच करा दे । पूरनिमा ल हिसटिरिया के दौरा पड़े लगे हे । बाद म ओहा पगली हो जाहय । पुस्पा कईथे, बेटी काल अस्पताल लेके चले जाव । खाना खा के सो जाथे ।

बड़े बिंहचे रमौतीन आके बताथे । के चन्द्रकला बेटी, पूरनिमा ह कईथे पगली जईसे बात करत हे । जऊन टूरा ल देखथे । हाँसे लगगे बुलावत रईथे । नवा गोता के पहिचान नई करत हे । कभू कभू दोहा जईसे पथे । जोर जोर से हाँफत रहिस । बेटी पूरनिमा ल बचा ले । चन्द्रकला कईथे, चल मय जाथव । चन्द्रकला घर जाथे । पूरनिमा देख के हांसे लगथे । वाह दीदी आगय । चल घर अंदर । चन्द्रकला ल चूमे लगथे । सरीर के साथ खेले लगथे, वाह क्या सुन्दर हे दीदी । चन्द्रकला कईथे, रे चन्द्रसेन रिक्शा ले आ भाई । रिक्सा म बईठार के डाक्टर बसु मनोचिकित्सक के पास ले जाथे । डॉ. बसु देखके बात समझ जाता है । पूरनिमा को इंजेक्शन लगाकर सुला देथे । दो इंजेक्शन अऊ लगाथे । अस्पताल में भरती करा देथे । पूरनिमा ल ग्लूकोज के बाटल भी चार लगाथे । पूरनिमा पूरा पूरा ठीक नहीं होवय । अंदाजन एक महीना ले अस्पताल म भरती रईथे । चन्द्रकला रोजिना शाम सबेरे जावय । आखिरी दिन परची लिखा के घर ले आथे । थोरकन ठीक हो जाथे । डॉक्टर सलाह देथे । पूरनिमा के जल्दी सादी कर दव । सेक्स की कमी के कारण ऐकर बीमारी हे । एकर बर तगड़ा लड़का चाही । जो इच्छा पूरा कर सकय । नई तो पूरा जीवन भर बीमारी रहही ।

नवभारत पेपर म लोक सेवा आयोग के रिजल्ट निकले रहय । चन्द्रकला के नजर पड़थे । चन्द्रप्रकास पांड़े के नाम ढूढ़त रहिते । डिप्टी कलेक्टर डी.एस.पी., कोषालय अधिकारी, आबकारी अधिकारी नाम नई रहय । नायब तहसीलदार के सूची लम्बा रहय । चन्द्रप्रकास के नाव हे । बीस नम्बर म । चन्द्रकला कूद बईठिच । दउड़त दाई लबताईच कि चन्द्रप्रकास के नायब तहसीलदार म चयन होगे । पुस्पा देवी खुस हो जाथे । भगवान ल धन्यवाद देथे । चन्द्रप्रकास ल जगाथे चन्द्रकला ह । कईथे तोर नायब तहसीलदार म होगे हे । ये नव भारत ल देख ले । चन्द्रप्रकास आँखी रमिजत, रमिजत देखथे । नायब तहसीलदार म नाव रथे । अऊ संगी साथी के नाव देखथे । विजय अनंत के नाव परिवहन उप निरीक्छक म रथे । नई नाव जसपुरिहा के लड़का मन के नाव रहय । चन्द्रप्रकास जलदी नहा के तियार हो जाथे । चाय पीके सहर कती चले जाथे । अपन मित्र सुनील सांडिल्य के इहाँ पहुँच जाके बताथे, मोर चयन नायब तहसीलदार म होगे हे । चन्द्रप्रकास होटल से एक किलो लड्डू खरीदथे ।

चन्द्रप्रकास सबसे पहिली रमौतीन दाई के पास जाथे । दाई के पाँव छूथे । रमौतीन ल बताथे, मोर नायब तहसीलदार म चयन हो गय हे । रमौतीन ल लड्डू देथे । दाई तोर दूध पीके बड़े होय हंव । रमौतीन आसीस देथे । बेटा बड़ा आदमा बन । पूरनिमा ल दो लड्डू देथे । चन्द्रसेन घलोक लड्डू देथे । रामदेव बर दो लड्डू छोड़ के आथे । चन्द्रप्रकास माँ के मुँह म लड्डू खवाथे । चन्द्रप्रकास कईथे माँ मय बहुत खुश हंव । चन्द्रकला आफिस म लड्डू बटवाथे । मालूराम ल टेलीफोन में बताथे । मालूराम कइथे, आज रात के घर आहंव । खाना वहीं खाहंव ।

चन्द्रकला होटल ले बढ़िया मिठाई 1 कि. ले आथे । बाजार ले सब्जी भी साथ ले आथे । पुस्पा ह साफ करके सब्जी, दाल, भात पूड़ी बनाथे । मालूराम ठीक 9 बजे पहुँचथे । चन्द्रप्रकास पैर छूथे । आसीस देथे । सुखी रहो । सब झन नीचे पीड़ा म बईठ के जेवन जेथे । मालूरमा त म उहें सूत जाथे । मालूरमा से चन्द्रकला कईथे, एक मकान पाँच कमरा के खपरा बनवा दे या गोसाला के पीछे जमीन म पक्का मकान बनवा दे । हाँ कहिके मौज मस्ती करके सो जाथे । बिहनहा मार्निंगवाक म जाके घर म सो जाथे । मालूराम के पत्नी सरला ह रात भर गूंगवात रहिस । जईसे पहूँचिस आगी बरगे । भंग-भंग ले आगी बर गे । जईसे, पाईच, गाली दिस । अऊ चार पाँच झाडू भूत उतारिच । परंतु ओ भूत तो मन के अंदर कर गे रहय । मालूराम चुप चाप सोगे । सरला देवी आँसू बोहावत रहय । लईका मन पीट पाट के गुस्सा शांत करिच । तोर अतके चरबी चाढ़े ह त ले मय आवंत हंव । सरलादेवी के गुस्सा बाढ़ जाथे । मन हथिनी अऊ ओहर परी ऐ । ओकरे सेती मोहा गय हच । मय रोज रोज के झंझट ले ओला लेके आजा मोरो गोड़ दबाही । फेर तोर झंझट ले छुट्टी पा जाहंव । मालूराम गुस्सा सांत करे के उपाय करथे गुद गुदाथे । सरला देवी टस से मस नई होईच ।

मालूराम ह कईथे देवी जी तई हं काम आवे । ओ तो चार दिन के मौज मस्ती कर ए । तय कुछ भी हच बरे बिहाई अस, कतको होही त मोर रखैल कहाही । सरला देवी कईथे, तय राजा महाराज अच । रखैल ल रखवे । मालूराम फुगा कर चिमचाली करे कस करथे फेर सरला देवी कईथे, बस बस ओतके बर आय । अऊ मोला कहा के सुख देय हच । मालूराम कईथे, करोड़ो के सम्पत्ति तोर नांव म हे । बाल बच्चा हे । रायगढ़ सहर के बरे सेठाईन अच । सरला देवी कईथे । यदि मय इ करलेवं त, तोला कईसे लगही मालूराम चूप हो जाथे । मालूराम कईथे मजाक म देवी जी तोर लड़का के मुँह मन तो स्यामलाल से मिलथे जलथे । गरूवा गोरा के गोबर उठावत रहिच । सब लईका मन के चेहरा मिलथे जुलथे । सब झन कईथे, सरला देवी कईथे, तोर चेहरा नहीं मिलत ऐ । थोड़े थोड़े मिलत हे । फेर सब झन कईथे, तय मान ले । थोर कुन सरम तो कर बेसरम होगे हच अऊ घरवाली ल बेसरम कहत हच । सरला देवी के चेहरा मुरझा जाथे । मालूराम के तीर निशान लग जाथे । सरला देवी तिलमिला जाथे । मय पतिव्रता नारी अंव तोर छोड़ मुँह कोकरो देखेवं नई अवं । खरसिया के मन कहत रहिन । मय त थोड़ो कहत रहेंव । मालूराम कईथे, चल पुराना बात ल छोड़ तहूँ करे हच अऊ महूं ह करे हवं । अब अपन अपन रद्दा म चलिन । काम धंधा के बात करिन ।

सरला देवी ह अपन अपमान समझिन । ठीक के मार लईका मन चेहरा तोर संग नहीं मिलत हे । तई तो घोंघट बिलवा हावच । मोला बिलई बोलत हच । तू मन दुकान म बईठ बईठ का करथव तेला महिला मन ल नई मालूम कईथा । दुकान म काम करवईया रेजा, मजूदर संग का गलत काम नई करव । मय बहुत दिन ले सुनत आत हंव । के रेजा, मजदूर, मन दुकान साफ करवाई के बहाने बुलावे के गलत काम करथव । बाप, बेटा, नाती, एक दीन ले दुकान म पारी पारी बईठ के काम चला लेथवं । घर म खाना खाके लात तान के सो जाथव । महिला मन कोई दुःख, पीरा, अऊ कुछ नहीं चाही । रात रात भर जागत रथे बिचारी मन । काला बतावय अपन दुःख ल । तू मन ला नोट गिले ला फुरसत नईये । सेठाइन मन भी अन्न खाथे । कहाँ बाइर निकारे । जो भी घर बाहर नौकर, चाकर, आवारा टूरा मन मिल जाथे ऐको मुँह मारलेथे । का फरक पड़ जाथे । मालूराम हार मान लेथे । श्रीमती जी तोर ले मय नई पुर पाँवव । चल भाई दूनों के हिसाब किताब बरोबर । हमन के झगड़ा म पूरा समाज ह बदनाम हो जाही । कोन काला पीला करत हे । मोला मतलब नईये । मोर ऊपर आरोप बट्टा लगावत हे । अपन करम ल नई देखत ऐ । चल मय तो कमसे एक झन से बिहाव करके अलग रखें हवं । सादी बिहाव करना अपराध तो नोहय । दूसर कोई तो अवैध, चोरी छिपे करथे । मय खुल्लम खुला करे हंव । ऐका कोई ल एतराज नई होना चाही ।

मालूराम के भाई पिताजी मन बहुत समझाथे । फेर लैला के मजनू चन्द्रकला ल नई छोड़ सकिच . सब कोई थक हार गयं । मालूराम के नगरपालिका अध्यक्ष के कार्यकाल पाँच वर्ष पूरा हो जाथे । मालूराम अध्यक्ष पद से हट जाथे । नगरपालिका रायगढ़ म महावीर गुप्ता ल प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष बना देथे । अध्यक्ष से बोलके चन्द्रकला के पदोन्नति निम्न श्रेणी लिपिक से उच्च श्रेणी लिपिक करवा देथे । चन्द्रकला बड़े बाबू बन जाथे । महावीर गुप्ता के गोपनीय बात ह चन्द्रकला ल मालूराम ल बता देवय । ओह बाजार म आजावय महावीर गुप्ता बहुत परेशान हो जावय । महावीर गुप्ता ह परेसान होके चन्द्रकला के ट्रांसफर जसपुर नगरपालिका करवा देथे ।

मालूराम अपन इज्जत के दाँव समझ के ट्रांसफर रूकवाये के बहुत प्रयास भोपाल जाके करिच । फेर ट्रांसफर नई रूकिस अंत म थक हार के चन्द्रकला ह जसपुर म ज्वाईन कर लेथे । चन्द्रकला के चर्चा सबे सुने रहय । मालूराम ज्वाइनिंग कराय चले जाथे । अपन रिस्तेदार के यहाँ रूक जाथे । चन्द्रकला नगरपालिका धर्मशाला म कमरा किराया लेके रहे लगथे । चन्द्रकला ल जशपुर के वातावरण भाये लगथे । चारों ओर जसपुर के महल सुन्दर, जंगल, पहाड़, झरना, नदिया, प्रपात, साल सागौन के घने वन । इंहा मन ल बड़े सान्ति मिलथे । जसपुर नगरपालिका बिहार रांची से लगे हुए हे । कभू कभू रांची भी चले जाय । श्री सत्रुध्न सिंह सोम मुख्य न.पा. अधिकारी के संग काम करे म तकलीफ नई होय । रायगढ़ के काम लेके आ जावय ।

चन्द्रकला जसपुर से 12 कि.मी. के दूरी म सोगड़ा आश्रम हे । देखे बर जाथे । भगवान राम अबधूत औधड़ बाबा आय रहय । सब भक्त जन दर्शन, आसीरबाद लेय आय रहय । भक्त जन दूर, दूर देश भर से पहुँचे लगिन । भगवान राम के चरन म गिर जाथे । बाबा बहुत दुखी हंव बाबा जी मोर ट्रांसफर रायगढ़ से जसपुर होगे हे । बेटी घबरा मत । जल्दी जसपुर से ट्रांसफर हो जाही । अऊ जब भी चुनाव हो ही विधायक बनबे । तोला राज योग भी लिखे हे । चन्द्रकला खुश हो जाथे । अऊ मोर किस्मत कब चमकही । बच्ची भगवान पर भरोसा रखो । जाओ सुखी रहो । दीन दुखिया की सेवा करो । चन्द्रकला गुरूजी के परम सिस्या बन गे । सोगड़ा आश्रम म सेवा करे लगथे । बाबा जी सेवा भावना से प्रसन्न हो जाथे । मालूराम बीच-बीच म जसपुर नगर पहुँच जावय । नागरिक लोगन ल अच्छा नई लगय ।

चन्द्रप्रकास के नायब तहसीलदार के पद म उज्जैन जिला म पदस्थापना हो जाथे । पुस्पा ह चन्द्रप्रकास के संग उज्जैन चले जाथे । उज्जैन के घटिया तहसील में पोस्टिंग होथे । उज्जैन से घटिया चले जाथे । दो वर्ष के परीवीक्षा अवधि म नियुक्ति होय रहय । चन्द्रप्रकास पटवारी, आर.आई. कोटवार, तहसीलदार के काम सीखथे । शांति व्यवस्था, दण्डाधिकारी के अधिकार के कानून पड़थे । पुस्पा देवी उज्जैन के महाकालेश्वर के दर्सन करे बर जाथे । भगवान महाकालेश्वर के विधि विधान से पूजा करथे । लाख, लाख सुक्रिया देथे । भगवान ल महाकाल के नगरी म बहुत स्वागत होथे । क्षिप्रा नदी म भी स्नान करथे । भगवान से प्रार्थना करथे । भगवान मोर गलती ल क्षमा कर दे । चन्द्रप्रकास के संग पुस्पा देवी रहे लगथे ।

रायगढ़ के मकान खाली रईथे । रामदेव अऊ चन्द्रसेन के हवाले कर देथे । कभू-कभू चन्द्रकला आके रूकथे । चन्द्रकला एक महीना के छुट्ठी लेके इंदौर चले जाथे । रमौतीन अकेला पड़ जाथे । रामदेव बुढ़ापा मा काटा नई कट सकय । चन्द्रसेन ह कुछ काम करय । गोसाला के गोबर कचरा ल रमौतीन अऊ पूरनिमा साफ कर देवय । रमौतीन के तबीयत खराब रहय त पूरनिमा ह साफ करै । दूध लेय बर सुनील सांडिल्य गय रहय । पूरनिमा देख के हाँसथे । सुनील सरमा जाथे । पूरनिमा कईथे, आज बाबूजी कोई नईये । डरत डरत सुनील गोसाला के पिछवाडा परछी म चल देथे । पूरनिमा ह पकड़ लेथे । सुनील डरत, डरत वोकर ले पिट जाथे । पूरनिमा कईथे, रोजिना आय कर । मय अकेला घर म रईथंव । सुनील दूध लेयबर रोजाना जाय लगिच । पूरनिमा के बीमारी विपरीत सेक्स के अनाकर्सन खतम नई होय रहय । बीमारी ठीक हो जाय कहिके, पूरनिमा काम कराय । रमौतीन एक दिन देख लेथे । सुनील घबरा जाथे । माती जी पूरनिमा के सादी करे बर तियार हंव । रमौतीन कईथे चल घर म बात करबो ।

रामदेव आफिस जाय बर तियार होत रहय । रमौतीन कईथे सुनथ जी पूरनिमा नोनी हे सादी करिहंव कईथे, एती आव । सुनील सांडिल्य से पूछये – कहाँ निवासी आय । का काम करतच । सुनील बताथे मय तार विभाघ म उपयंत्री के पद म काम करत हंव । प्रभारी एस.डी.ओ. टेलीफोन्स हूँ । बिलासपुर का रहने वाला हूँ । मेरा बड़ा भाई सूरत में ओ.एन.जी.सी. में कार्यपालन अभियंता हे ।

रामदेव पूछथे, घर म कोन कोन हे । माँ, पिताजी, भाई बहन पाँच झन बिलासपुर म हावय । माँ बाप भी नौकरी म हे । बिलासपुर म तिमंजिला मकान अऊ मल्हार में सात एकड़ जमीन हे । रामदेव अऊ रमौतीन कईथे, बने फसे हे मुर्गा ह । सुनील ल कईथे, सादी कईसे हो ही । कोर्ट मेरीज कलेक्टर के आधू कर लेबो । रमौतीन कईथे, बेटा पूरनिमा ल हिस्टिरिया के दौरा पड़थे । बता देना ठीक हे । सुनील कईथे, हिस्टिरया कोई बीमारी नईऐ । जब सादी हो जाही तब ठीक हो जाहय । रमौतीनु रामदेव, पूरनिमा से पूछथे । तोर का मन हे । पूरनिमा बोलथे । मय चार महीना ले सादी कर डारे हव । मोला कोई आपत्ति नईये ।

रामदेव कईथे बेटा कल वकील साहब से मिलके सपथ पत्र आवेदन कलेक्टर साहब ल देय परही । नंदे वकील साहब के पास आबे । दू झन गवाही ले आबे । मय पूरनिमा ल लेके आहंव । वकील साहब के समझ शपथ पत्र अऊ आवेदन म दूनों झन क हस्ताक्षर कराथे । गवाही के रूप म पूरनिमा के पिताजी, अऊ जूनियर वकील संतोष मिश्रा के हस्ताक्षर करके कलेक्टर सहाब के अदालत म पेस कर देथे । सुनील अपन दू झिन दोस्त ल गवाही बना लेथे । कलेक्टर साहब एक महीने बाद के पेशी देथे । सुनील के साथ पूरनिमा रहे चले जाथे । रमौतीन अऊ रामदेव के हाय जी होईच । पूरनिमा के संसो फिकिर करीच । जल जईसे भी हो । पूरनिमा के सादी हो गय । बहुत बढ़िया खानदारी लड़का मिले रहय ।

चन्द्रकला ह उज्जैन ले टेलीफोन करके पूछथे । रायगढ़ के का हाल चाल हे । कामदेव बताथे, पूरनिमा के सादी सुनील सांडिल्य टेलीफोन एस.डी.ओ. रायगढ़ से कोर्ट मेरिज होईचे । पूरनिमा अपन घर म खुश हे । ओकर बीमारी ठीक होत हे । सुनील सब कुछ बता देहंव । रामदेव कईथे, बेटी तहूं त बिहाव कर लेते तो अच्छा होतिच चन्द्रकला कईथे अब मोर संग चालीस साल के ऊपर म कोन सादी करही । मय तो सादी मंदिर म दस साल पहिली, सेठ जी ले कर लेइंव । मय एक खूंटा से बंध गे हंव । अब सादी नहीं करवं । मय अईसे खुस हंव । चन्द्रसेन के का हाल चाल हे । दाई के तबीयत तो ठीक हे । रमौतीन एक दम ठीक होगे । पूरनिमा के फीकर म बीमार पड़त रहय । अभी बने हे । चन्द्रसेन के भी कोनों कोती नौकरी लगा देते तो अच्छा रहितिच ठीक हे रायगढ़ आके बात करहूँ ।

चन्द्रकला, दाई के कहिथे, दाई पिताजी से बात रायगढ़ कर रहेंव । बताईच कि पूरनिमा के कोर्ट मेरिज होगे हे । अपन घर म खुस हे । ओकर पति ह एस.डी.ओ. फोनस् रायगढ़ हे । बड़े घर के लड़का ये । बिलासपुर के रहईया ऐ । पुस्पा देवी बहुत खुश होथे । बेटी अच्छा होगे । पूरनिमा सुखी रहय । चन्द्रप्रकास ल पूरनिमा के सादी के बारे में बताथे । सुनील के नाम बताथे । चन्द्रप्रकास कईथे माँ मोर दोस्त ऐ । मोर संग घर म कई बार आय हे । चन्द्रप्रकास कईथे, चलो बहुत अच्छा हुआ । उस दिन म खुसी के वातावरण रईथे । चन्द्रकला कईथे, भाई जी तोर बिहाव भी कर देतेन । पुस्पा भी हामी भरथे । चन्द्रप्रकास कईथे, माँ लड़की खोजे के काम तुंहर । मय हाँ कहत हंव । चन्द्रकला कईथे, चन्द्रप्रकास बाबूजी इंदौर रईथे । एको दिन मिले हच । चन्द्रप्रकास कईथे, दीदी दू महीना पहिली इंदौर गय रहेंव । घर में रहेंव । तब पड़ोसी मन बताईच । फादर बेंजामिन फ्रांसिस अपनी छोटी बेटी अलका राय के घर केली फोर्निया गय हे । फादर वहाँ से रोम अऊ लारा एंजिल्स भी जाहय । एक साल तक नई आवय । कब से गाय हे पता करेथच । चन्द्रकला कईथे, रायगढ़ से अतक दूर ह आयेरहंव त इंदौर जाके देखि आहंव । पुस्पा देवी ल कईथे चल माँ काल जाबो । हाँ हाँ जाबो । चन्द्रप्रकास एक टेक्सी भेज देना । सुबह यहाँ से निकलबे । चन्द्रप्रकास कईथे, माँ पिछले बार हमन मिले रहेन त बाबूजी बहुत खुश होगे । रोमा माँ भी खुश होगे । के मोर बेटा नईये त चन्द्रप्रकास हे ।

चन्द्रकला कईथे, बाबूजी अच्छा आदमी हे । देखे न माँ ऐ कतका प्यार करिच । माफी माँगिच । फादर होगे गोड़ ल पकड़ लिच । हमन ल तीन सोने के क्रास देय हे । 100 ग्राम शुद्ध सोना के । तीनों मिलाके 300 ग्राम हे । आज के दर में ढेड़ लाख रूपिया के हे । फेर कपड़ा, सूटकेस, पचीस हजार रूपिया । सब कोर कसर ल निकाल दिच रहिच । चन्द्रकला कईथे, चन्द्रप्रकास बाबूजी के पास जाये कर । कम से कम करोड़ो रूपिया के सम्पत्ति इंदौर म हे । चन्द्रप्रकास कईथे, दीदी फेर भाटापारा म सात एकड़ जमीन हे । लगभग दस लाख के भूमि हे । चन्द्रकला कईथे, भाई रे तय हो अईसे करोड़पति भागमानी हच । पुस्पा कईथे जेकर दो दो बाप अऊ दो दो माँ हावय अऊ दो दो बहिनी हे त भागमानी होवे करही । चन्द्रकला कईथे, माँ जब दाना के लिये तरसत रहेंव त कोई नई पूछत रहिन । आज करोड़पति हंव । चन्द्रकला कईथे, भाई रे एक बढ़िया से मेम ढूढ ले ।

पुस्पा अऊ चन्द्रकला इंदौर जाय बर स्नान, चाय, नास्ता, करके तियार बईठे रहय । चन्द्रप्रकास घटिया के थानेदार ल कहे रहय । टेक्सी थोरकुन देरी म आईस । टेक्सी से सीधे इंदौर रेजीडेन्सी एरिया चर्च के पास फाद फ्रांसिस के बंगला म पहुँच थे । घंटी चन्द्रकला दबाथे । रोमा दरवाजा खोलथे । चन्द्रकला माँ के पैर छूके परनाम करथे । सुखी रहो कईथे, आईये, आईये, अंदर आईये । पुस्पा देवी से गले मिलके रोमा सुवागत करथे । चन्द्रकला कईथे, फादर कहाँ हे । पूरे एक महीने बाद आये हैं । सब ठीक हे वहाँ बहने । हाँ हाँ सब ठीक हे । आप लोगों के बारे में बतायें तो बहुत खुस हुए । भारत आने पर रायगढ़, जाने के लिये कहा है । चन्द्रप्रकास कहाँ है मेरा बेटा । चन्द्रकला कईथे, माता जी चन्द्रप्रकास उज्जैन के पास घटिया तहसील में नायब तहसीलदार होगे हे । पाँच साल से जादा होगे । पहली पोस्टिंग घटिया होय हे ।

रोमा कहती है वाह मेरा बेटा साहब बन गया हे, हमें आप लोगो ने नहीं बताया । पुस्पा कईथे, बहन पत्र लिखी थी । शायद पत्र आपको नहीं मिला । केलीफोर्निया से लाई ड्रायफूट, मिठाई, खिलाती है । बहुत सारे गिफ्ट आयटम बच्चे लोगों ने भेज दिया हे । यहाँ मय क्या करूँगी । अगले साल लासएंजिल्स आऊँगी । चन्द्रकला कईथे, माताजी हम लोगों को भी विदेश घुमाई ये न । नहीं बेटी । आपको ईसाई धर्म स्वीकारना पड़ेगा । पासपोर्ट वीसा भी बनवाना पड़ेगा । वहाँ के रिश्तेदारों के नाम पता भी चलना चाहिये । ठीक है मम्मी । हम लोगो के किस्मत में नहीं जाना लिखा है ।

फादर फ्रांसिस बाहिर ले जल्दी आथे । कईथे आज मैने प्रभु ईसु से अपना घर परिवार, बेटा से भेंट हो कहा था । मैने प्रार्थना भी किया था । प्रभु ने मेरा प्रार्थना स्वीकार कर लिया । फादर के पाँव छूके प्रणाम चन्द्रकाल करथे । सुखी रहो आशीष देथे । पुस्पा देवी चरण म गिर जाथे । फादर पुस्पा ल उठा के सीना म चिपका लेथे । नहीं देवी तुम्हारा स्थान चरण नहीं छाती हे । तुम्हारा कर्म सिर बिठाने लायक है । मुझे गर्व हे कि तुम मेरी पत्नी हो । मय अभागा हूँ, जो तोर जईसे नारी को छोड़ दिया था । पुस्पा के आँसू झरर बहे लगथे । पुस्पा कईथे, फादर आप मेरा दुःख का अहसास तो कर रहे हैं । यदि स्त्री होते तो पता चलता कि स्त्रियों का क्या-क्या तकलीफ से दुःख है । फादर फ्रांसिस कहता है, हाँ मय तुम्हारा दुःख जानता हूँ । रोमा भोजन ठीक से कराये । केलीफोर्निया से लाये समान दिखाथे । रोमा कहती यहाँ क्या करूँगी । रोमा कहती है बेटा हमारा नयाब साहब बन गया है । उसके लिये एक सुन्दर से मेम ढूँढ दो । चन्द्रकला कहती है बाबू जी जल्दी हो जाय तो अच्छा । मोर पा रायगढ़ म रईसी । फादर को याद आता है कि हमारे मित्र सुबोध कां जी की पुत्री भी नायब तहसीलदार है । सायद चन्द्रप्रकास के बेच का ही होगा । मय बात करके देखता हूँ ।

साम 4 बजे चन्द्रकला कईथे, बाबूजी घर जाबो । फादर कईथे ठीक हे बेटी, चन्द्रप्रकास को मिलने के लिये बोल देना । पुस्पा देवी, चन्द्रकला परनाम पाँव छूके करथे । हाथ हिला के विदा करथे । फादर कईथे । बेटी मय रायगढ़ जाना चाहता हूँ । ठीक हे बाबू जी आईये । पुस्पा मुस्कावत रहिथे । पुस्पा के अंतर द्वंद्व सुरू हो जाथे । बेटी चन्द्रकला मोर किस्मत ठीक नईऐ । काबर तोर बाबूजी ल रायगढ़ आहंव कहत है । भरी जवानी म रद्दा देखत देखत आँखी पीरा गय रहिस । आज मरे के बेरा सत्तर साल म पति मिलत हे । चन्द्रकला कईथे, ठीक है माँ । बुढ़ापा म पति पत्नी ल एक संग रहना चाही । बुढ़ापा म एक दूजे के सहारा बनना पड़थे । रोमा माँ तो साथ म हे । कतक बढ़िया बात करत रहिच । बढ़िया रहत हे । का कमी हे । चन्द्रकला, पुस्पा देवी के मनोदशा जान ले थे । कईथे, दाई चन्द्रप्रकास ल जल्दी भेज देथन ।

चन्द्रकला घटिया पहुँच के सब बात बता देथे । चन्द्रप्रकास अपन स्मृति म जोर देथ । तब पता जलथे । नायब तहसीलदार के बेच में सुश्री शीला चतुर्वेदी रईथे । शीला के पिता डिप्टी कलेक्टर इंदौर म रईथे । चन्द्रप्रकास दूसर दिन इंदौर जाके फादर से मिलथे । फादर चन्द्रप्रकास के साथ सरकारी बँगला म श्री बालकृष्ण चतुर्वेदी के इहां जाथे । चतुर्वेदी जी ल परिचय फादर देथे । ये मेरे पुत्र चन्द्रप्रकास तहसीलदार घटिया है । चतुर्वेदी जी फादर अऊ पांड़े सरनेम म चकरा जाथे । फादर कहता है । कि चतुर्वेदी मय बी ब्राहम्ण हूँ । मेरे परिवार अभी भी ब्राह्मण है । सिर्फ मय भर रोमा से दूसरी शादी कर ईसाई बन गया हूँ । मेरा पुत्र तो ब्राह्मण है । चतुर्वेदी जी ल गड़बड़ लगथे । एती, ओती कहिके टाल देथे । फादर ल कहिथे परिवार वालों से पूछकल बताऊँगा । फादर चन्द्रप्रकास ल लेके चल देथे । चन्द्रप्रकास ल गड़बड़ी पता लग जाथे । टेलीफोन से घटिया के तहसीलदार को चन्द्रप्रकास के बारे में जानकारी देथे । विवाह करने के बाद साफ मना कर देथे । हम लोग सतनामी ब्राह्मण है । पिता ईसाई माता ब्राह्मण । बेटा ब्राह्मण कुछ गड़बड़ हैं । चन्द्रप्रकास ल तहसीलदार हरवार बताथे । चन्द्रप्रकास ल बहुत दुःख होथे । पिता जी ईसाई होय के कारण कई सादी प्रस्ताव खतम हो जाथे । चन्द्रप्रकास निरास हो जाथे । चन्द्रप्रकास फेर कभू फादर से नई मिलिच ।

चन्द्रकला अऊ पुस्पा ल बहुत दुःख लगथे, आज कल भी जाति, धर्म छुआछुत में विस्वास करने वाले लोग भी हैं विस्व के मानव चन्द्रमा, मंगल म बसना चाह रहे हैं । परंतु हिन्दु धर्म को लोग अंध विस्वास में जकड़े हुये हैं । अभी भी ऊँच, नीच की जाति, कुजाति को मान रहे है । चन्द्रकला अऊ पुस्पा रायगढ़ आ जाथे । चन्द्रकला कुछ दिन रहिके । जशपुर नगर चल देथे । पुस्पा देवी अकेल्ला हो जाथे । पुस्पा ह जसपुर नगर घूमे बर चल देथे । मालूराम भोपाल जाके चन्द्रकला के ट्रांसफर जशपुर से सारंगढ़ नगरपालिका करा देथे । चन्द्रकला पुस्पा ल सोगड़ा आश्रम दिखाय बर जाथे । आश्रम ल घूमाथे । बाबा जी अमेरिका इलाज बर चल दे रहय । पुस्पा देवी ल याद आथे कि बाबा जी के आसीरबाद से मोर पुत्र चन्द्रप्रकास होय हे । बाबा जी बड़ी किरपा है मोर ऊपर । चन्द्रकला कईथे, माँ बाबा जी बोले हे विधायक जल्दी बन जाबे । पुस्पा कईथे, के बाबा जी के आसीरबाद से जरूर एक दिन विधायक बन जाबे । बाबा जी के धूनी से राख ले जाओ । शिष्य गण कहते हैं ।

चन्द्रकला जशपुर से कार्य मुक्त होके सारंगढ़ ज्वाईन कर लेथे । चन्द्रकला भाँठा म किराये के मकान लेके रहे लगथे । चन्द्रकला सारंगढ़ के महल देखे जाथे । बहुत बढ़िया सुन्दर महल हावय । चारों तरब बाग बगईचा । नाला किनारे बाँस के झुंड के झुंड, आम के अमराई, बर पीपर के छाँव, कोयली के कूक, पंछी के कलरव, एक प्रकार ले सुन्दर वाटिका के रूप म हावय । महल म राजा नरेश को रानी ले भंट करथे । चन्द्रकला पैर छूथे । रानी माँ कईथे अच्छा बेटी । चन्द्रकला कईथे । सारंगढ़ के रहवईया आंव । नगरपालिका म बड़े बाबू हंव । रानी माँ कईथे अच्छा बेटी । चन्द्रकला कईथे, माता जी सारंगढ़ कईसे नाव पड़िच । माता कईथे, सारन माने बाँस के पेड़ । पहिली ईह बाँस के जंगल रहिच । कटे जंगल । बाँस के गढ़ ल सांरगढ़ कईथे,

चन्द्रकला पूजा बर मंदिर कोती जाथे । लकड़ी के तलवार पड़े रहय । रानी माँ बताईच कि बैटी दसहरा के पहिली, याने नवमी के दिन सारंगढ़ म समलेश्वरी माता ल पोड़ (भईसा) बलि चढ़ावय । राज परिवार के रिवाज आय । पुजारी जब पूजा करके लकड़ी के तलवार से गरदन म एके वार करय गरदन धड़ से अलग हो जावय । हजारों मुर्गी, मुर्गा, बकरी चढ़ावय, बलि देवय । मेला लगे रहय । दरबार के तरफ से खजाना खोलय राजा मन । प्रजा पालक रहय । महाराज मन ह ओकरे खेती आज भी महल ल प्रजा मन सम्मान देथे ।

चन्द्रकला कईथे कब ले बंद होगे दाई । बहुत दिन ले बंद होगे । संत गुरू घासीदास के सतनाम आंदोलन चलिस तब से बंद होगे । सतनाम, आंदोलन के प्रभाव म कोई बलि चढ़ाय नई आईन । एक दम पूजा के दिन सुना होगे । गुरू बाबा कहिच कि कोई माता ह अपन बेटा मन ल थोड़े खाथे । ऐ तो पुजारी मन के ढोंग हे । अंध विस्वास हे, नर बलि, पसु पर अत्याचार हे । पाकृतिक न्याय के खिलाफ हे । जबरदस्त सामाजिक क्रांति होईच । समाज म बदलाव आईच । तब ले इहाँ नारियल, फूल, सदा पूजा होत ह बेटी । चन्द्रकला कईथे बहुत अच्छा जानकारी देय हच दाई । टप से पाँव छूथे । रानी दाई ह आसीस देथे । राज करो-सुखी रहो । चन्द्रकला कईथे दाई । बेती मोर माथे म राजयोग लिखे हे । तंय जरूर एक दिन विधायक मंत्री बनबे ।

चन्द्रकला ल सारंगढ़ भाय लगथे । काबर सांरगढ़ पूरा गँवई गाँव हे । सारंगढ़ म इक्कीस ठन तरिया । चारो कोती तरिया ही तरिया । तरिया म पीपर, बर, आम, नीम के पेड़े, बेल, आवला के रूग्व घलो लगे हे । इहाँ सब कोई पुरूष, महिला तरिया पार म नहाथे । मंदिर म पूजा करत रथे । एकदम गंवईहा लगथे । महिला पुरूष लोटा धर के दिसा मैदान जाथें । काबर के महिला मन ला खुला आकास मा स्वांस लेहे बर मिलथे । अऊ पड़ोसिन ले पूछ लेथे “आज का सब्जी रांधबे।“ सुख-दुःख के गोठ भी गुठिया लेथे । चन्द्रकला कभू-कभू पड़ोसिन भउजी के घर चले जावय । रानी सागर के तलाब म साफ सुन्दर पानी रहय । चन्द्रकला नहावत त देखनी हो जावय । चन्द्रकला ह तउरे नहीं जानत रहय । तरिया भी कभू नई नहायच । हाथ पकड़ के सिखा देथे । भउजी कईथे, चन्द्रकला आधार उमर म तोर सरीर कसाय हे । केरा गमौती कस जांघ हे । सुहारी जईसे कनिहा । हिरणी जईसे रखी, करिया घटा कस तोर चूंदी (केस), सुंदर नाक, जन परी, संजावन जईसे, रोब रंग जैसे गाल, गोल चेहरा । तोर छाती ह गोल गेंद जईसे ठस हे । फेर एक बात पूछथंहव बोल भउजी चंदा बोल न । तोर संग सुख दुःख के गोठ गोठियाई दुःख हलका हो जाही । चंदा भउजी कईथे, मय देखतंव तय अकेला रईथच । तोर कय ठन नोनी अऊ बाबू हे । चन्द्रकला सरमा जाथे । चन्द्रकला कईथे भउजी मोर सादी नई होये हे । अइसे काम चलत हे । मय मंदिर म सादी करे रहेंव । ओला समाज ह तो नई मानय । सेठजी बरे आदमी ऐ । ओकर बाल लईका भरा पूरा परिवार हे । राईस मील कई ठन हे । ओहा आज ले मोर पास आथे । ओला पति देव मान ले हंव । खुल्लम खुल्ला पति पत्नी जईसे रईथन । मोला कोकरो डर नईये । जब दूनों झन तियार हन तो कोनो तल का आपत्ति हे । मोला सब जानथे, कुँवारी हे । पर मय कुँवारी नई अवं । सुरछिंधा होके नौकरी करत हंव । अपन मन के खात कमावत हंव । कोई सास, ससुर के झंझट न लोग लईका के । जतका दिन जीवत हंव मौज मस्ती के रतिहंव । चंदा भउजी कईथे, बने करे । चन्द्रकला तोर निरन्य ह ठीक हे । आज नारी ल स्वतंत्र होय के जीये के अधिकार हे । जब पुरूस ह कमाके खवा सकत हे तब नारी ह काबर नई खवा सकय ।

चन्द्रकला कईथे, भउजी देस के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल, न्यायाधीस, कलेक्टर, कमीस्नर, पुलिस अधिकारी, पायलट, वैज्ञानिक, ड्राइवर सभी क्षेत्र म नारी के दखल हे अउ पुरूस से अच्छा काम करत हे तब हमन काबर नई काम करिन । चंदा भउजी कईथे । नोनी चन्द्रकला बीच बीच म मोर नोनी, बाबू ल पढ़ा दे कर । चन्द्रकला कईथे, भउजी टाईम नईये । छुट्टी के दिन पढ़ा देहव । का का नाव हे । मोर टूरी के नाव हे भूरी अऊ टूरा के नाव कुसुवा । चन्द्रकला कईथे भउजी दू झन के । चन्दू बंदू चन्दन अऊ बंदल हे । चंदा भउजी तय परिवार नियोजन काबर नई करवाय अच । तोर भईया कईथे, लईका भगवान पैदा करथे । अतक जमीन जायदाद कोन खाही । खेत म काम करईया तो चाही । भगवान लईका देही त ओकर पोसे के बेवस्था करथे । नहीं भउजी तोला नसबंदी करा लेना चाही । चन्द्रकला कईथे भउजी मय भोपाल म जाके लेप्रोस्कोपिंग नसबंदी करा लेंव हवं । चन्द्रा कहिथे । तोर तो एको ठन लईका नईये । डॉक्टर मन नई जानिच तोर लईका नई होय हे । चन्द्रकला कईथे डाक्टर मन का का देयाही । सरकार ह नसबंदी के लक्ष्य देथे हावय । डाक्टर बेचारा आये केस ल वापस नहीं करय । चन्दा कईथे, तय तो अपन पेट म लात मारे हच । तोर लईका नई होही त वंस कईसे चलही । तय गलती करे हच । स्त्री ह जब प्रसव पीरा नहीं जानही त लईका के सुख कैसे होथे । कईसे जान ही । लईका जनमें बहुत सुख है । चन्द्रकला कईथे भउजी बहुत पुराना बात हे । आज कल लड़की मन लईका नई चाहत हे । जईसे मय मन मस्त घूमत फिरत रईथे । न लईका न फिकर न लईका के फिकर ।

चन्द्रकला कईथे अब एक जनम बर होगे । चंदा कईथे तय तो अईसे मजा लेत हच । का डउका अऊ लइका । स्त्री के का दुःख हे तेला तो जानत हव । बहुत दुःख हे भउजी । जौन पुरूष मन थोड़ा सुघर औरत देखिन पीछू पड़ जाथे । मय तो बहुत परेशान होगे हवं । कई झन आवारा टूरा मन ल चप्पले चप्पल पिटाई भी कर देहंव । चंदा कईथे, तय चन्द्रकला होसियार आस । तभे तो नसबंदी करा लेय हच सब झंझट से दूर । चन्द्रकला कईथे भउजी जब जवान रहेंव त बेरा, कुबेरा आफिस म काम करे बर पड़य अऊ सिधवा मन जईसे टूरा मन झूमत रहय । रोजिना गाली गलौच करंव । मालू सेठ जी ह सलाह दिच । नसबंदी करा ले । अब निसफिकर होगे । अब कोई का करो डर नई ये ।

चन्दा ह अंगना बहारत रहय, ओही समे नान नान टूरी मन सुवा नाचे आथे । बढ़िया टूरी मन लुगरा पोलखर पहने रहय टिकुली, फुंदरी, चूड़ी, पईरी पहने रहय । सात झन टूरी रहय । एक टूकनी म माटी के सुवा अउ दीया बारे रहय । बीच अंगना म टुकनी सुवा ल रख के गोला बनाईन अऊ सुवा नाचे लगिन ।

गीत – रे सुवना कि तिरिया जनम झन लेंव ।
तिरिया जनम तो दुःख के भण्डार रे सुवाना

सब लईका मन झूम झूम के सुना नाचिन । चंदा ह चातल अ एक रूपया दिस । चन्द्रकला कईथे, भउजी लईका मन अभी ले स्त्री मन के दुःख ल जाने के प्रयास करत हे । गाँव के टूरी मन सब सीख जाथे । सहर म तो कोई नहीं सिखावय । चन्द्रकला टूरी मन ल पूछथे का का नैव हे । सब झन बताथे । पाँच रूपिया चन्द्रकला देथे । कईथे, एक गीत अऊ सुनावव । नान नान टूरी मन राम सिया के गीत गाथे । अऊ चल देथे । मजा आगे भवजी, सुवा गीत सुनके । चन्द्रकला कईथे, भवजी एक दिन गाँव देखा देना । चंदा कईथे, कोसीर नदी किनारे के गाँव हे । अभी ऊहाँ रामनामी मेला लगईया हे जाबो । चन्द्रकला कईते का होथे । जब जाबो त देख लेवे ।
क्रमशः
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