छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Tuesday, June 27, 2006

भाग- नौ

चन्द्रकला ह जीप, कार ल रायगढ़ से चन्द्रपुर के चंद्रहासिनी देवी मंदिर के द्वार म रूकवाईच । मंदिर पहाड़ी ऊपर महानदी के तट म हावय । कतको पूरा आवय फेर मंदिर नई बूड़य । पहाड़ी थोकन ऊँचा हे । पुस्पा कईथे, चला उतरव देवी दरसन करेक जाबो । सीढ़ी म चढ़ के देवी जी के दरसन करीन । चन्द्रकला बताईस नवरात्रि म इहाँ, पसुबलि, पक्षीबलि दे जाथे । बकरा बकरी, मुर्गा, मुर्गी हजारों के संख्या म बलि चढ़ाये । बलराम पांड़े मुँह मिचकावत कईथे, बेचारा मूक प्राणी मन के वध करे ले देवी खुस होईच हो ही । न ही । ये तो मन के फेर ऐ । रामदेव बताईच महराज इहाँ असठमी के दिन पांड़ा के वध भी करथे । भईसा के गरदन म तलवार चलते त चिंघाड़ उठते । नर नारी मन देवी जी के जयकारा करे लगते । ओकर मांस ल प्रसाद के रूप म हजारों नर नारी पका के खाथें । चन्द्रकला कईथे, बाबूजी एही अंधविस्वास ल संत गुरू घासीदास जी हा बंद करे रहिस । निरीह प्राणी के जीव बचाय बर प्रकृति के प्रेम करे बर बाबा जी पसुबलि, नरबलि ल बंद कराय रहिच ।

बलराम पांड़े कईथे, गुरूजी के संदेस वैज्ञानिक अऊ तार्किक हे । एक पथरा के मूर्ति ह कईसे खाही मांस, मछली, नर मन ल, मानव ल, ऐ तो अवैज्ञानिक अंधविस्वास हे । ऐ पूजेरी, पंडा मन अपन दुकानदारी, खाय, कमाय के धंधा बना लेय हे चन्द्रकला ह नरियर फोड़थे । नरियर दो टुकड़ा हो जाथे । रामदेव कईथे दे बेटा मय फोड़ देत हंव । पाँच नरियल चढ़ाय रहय । चन्द्रप्रकास देवी जी से माँगेय रहय कि मोर सादी बिन बाधा के करा देबे । रमौतीन अऊ पुस्पा बेटा के बिहाव म नवा लूगरा पहने रहय । पूरनिमा अपन दूनों लईका मन ल देवी दरसन कराके, महानदी के पानी देखत रहय । महानदी म बांध के पानी भरे दिखत रहय । अतका पानी भरे नई देखे रहिच । चिरई, चुरगुन मन उड़त रहय झुंड के झुंड । पूरनिमा बेटी रूना ह ताली पीट पीट के हांसत रहय । बहुत बढ़िया सुन्दर दृस्य दिखत रहय । महानदी ह सबके मन ल मोह लिच ।

चन्द्रकला कईथे बाबूजी जल्दी चलव, दू बजे तक गिरौदपुरी पहुँचना हे । रामदेव अऊ कामदेव ह नारियल के परसाद बाँटीन । अपन अपन गाड़ी म बईठ के सीधा सारंगढ़ भटगाँव से गिधौरी से गिरौदपुरी, सड़क पक्की होगे रहय । काबर मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह जी अवईया रहय । चन्द्रकला गिरौदपुरी के तरिया के पास ठीक डेढ़ बजे पहुँच गे । तरिया के चारों मुंड़ा मेड़ म आमा के रूख लगे रहय । साफ सुन्दर पानी, छोटे झील जईसे दिखत रहय । पानी कभू खतम नई होवय । चन्द्रकला कईथे आमा के छाँव म अगोर लेथन । एके संग जाबो । बलराम, पुस्पा देखथे चारो ओर आदमी आदमी, बस ट्रेक्टर, बइला गाड़ी, जीप, कार, मिनी बस, हजारों के संख्या म खड़े रहय । जेहा जिहाँ जगा मिले रहय भोजन बनात खात पियत पड़े रहय । सड़क म चले के जगह नई रहय । आत रहय, जात रहय । का कहिबे अब्बड़ मेला भराय रहय ।

भारद्वाज साहेब ह तीन कार जीप म भर के अपन परिवार अऊ प्रेमलता के सहेली मन ला लाय रहय । आमा तरी म जीप रूकवाथे । चन्द्रप्रकास देख लेथे । आईये बाबूजी आईये । चन्द्रप्रकास भारद्वाज अऊ सास के पाँव छूथे । चन्द्रप्रकास अपन पिताजी से परिचय कराथे । बलराम पांड़े अऊ भारद्वाज समधी भेंट करथे । पुस्पा देवी, रमौतीन प्रेमलता के मन जानकी से भेंट करथे । सब एक दूसर से भेंट पयलगी करथे । छाया म चादर, दरी बिछा के बईठ जाथे । पुस्पा, चन्द्रकला लूगरा, जेवर, गहना लाय रहय तेला प्रेमलता ल पहिनाथे । प्रेमलता ह सबके पाँव पड़थे । सब कोई आसीरबाद देथे । सुखी रहो । रमौतीन देख के खुस हो जाथे । प्रसन्नता के महौल रहय । सब नवा लूगरा, कुरता पहिन के तियार होगे । चन्द्रकला पूरनिमा ह प्रेमलता ल जेवर म लाद दीन । माथे म बिंदिया, गर म हार, कान म झुमका, पाँव म पईरी, नाक म छार, कमर म कमर पट्टा, सोने के रूपिया । हाथ म कंगनी, अंगूठी, बिछिया, पाँचों पाँव अऊ हाथ म सोने के अंगूठी । पियर कोसा के लूगरा म प्रेमलता बहिनी ह । चन्द्रकला, पूरनिमा, चन्दा, प्रेमलता के माँ अऊ सहेली मन सज के तियार होगे । चन्द्रप्रकास ह सफेद सूट पहिने रहय । सफेद धोती के पगड़ी बाँधे रहय । बहुत सुन्दर दूल्हा, दूल्हान दिखय ।

भारद्वाज साहब ह धोती, कुरता, लूगरा लाय रहय । सब ल दे देते । अपन ह धोती कुरता सफेद रंग के । सफेद धोती के पगड़ी बाँधे रहय । बलराम पांड़े ल धोती, कुरता, पगड़ी पहिनाईच । रामदेव, कामदेव, सुनील सब सफेद धोती कुरता पगड़ी बांधे रहय । सब जाय के तिहारी करे लगिन । मेला म देखनी होगे, का होवत हे । वईसे भी सड़क खचाखच भरे रहय । चन्द्रप्रकास के दोस्त मन आगे रहय । पुलिस थानेदार, तहसीलदार, पटवारी, आर.आई. एस.डी.ओ. साहब मन अगवानी करीन । दो पुलिस वाला मन रद्दा बनावत गईन । पूछय का होही । काकर बिहाव में आय हन । जैत खाम म बिहाव होही । करीब एक घंटा म मंदिर के पास पहुँचीन । बहुत भीड़ रहय । लाखों भक्त जन दरसन बर जुरे रहय । एक कि.मी. लाईन लगे रहय । मेला अधिकारी पुलिस वाला मन मंदिर के पास ले जाथे । मंदिर म बाबा जजी के खड़ाऊ के पूजा करथे । भभूत ल चंदन जईसे लगाते । चन्द्रप्रकास अऊ प्रेमलता बाबाजी के खड़ाऊ म नारियल अगरबत्ती चढ़ाथे । राजमहंत रामसनेही सेदरी वाला ह पूजा कराथे । मोहन, जानकी, बलराम, पुस्पा देवी, चन्द्रकला, चंदा, पूरनिमा, सुनील, रामदेव, कामदेव सब झन पूजा करथे । बहुत भीड़ रहय । पूजा करके जैत खाम के पास आ जाथे ।

राजमहंत, रामसनेही, दीवानचंद, सत्यनारायण, मजनू, नरसिंह, पुन्नूलाल मोहले सासंद बिलासपुर । बिहाव करे बर जैतखाम के पास ले जाथे । प्रेमलता अऊ चन्द्रप्रकास ल बुलाके पास बैइठाथे । चन्दा ह धोती म गाँठ बाँध थे । राजमहंत, रामसनेही ह गुरूजी के आरती गाथे ।

आरती गीत – पहिली आरती जगमग जोति,
हीरा पदारथ बरत मोती हो,
होत आरती सतनाम साहेब के ।

वर-वधू से पूजा कराथे । माँ बाप, सास ससुर सबसे पूजा कराथे । नारियल चढ़ावथे । महंत जी बोलथे, बेटी प्रेमलता तय आगू चलके सात भांवर किंदर ले । सात भाँवर घूम के बिहाव के नेग पूरा करथे । सब झन मन बधाई देथे । महंत जी परम पूज्य गुरू घासीदास बाबा जी की जय, तीन बार बोलाथे । जय सतनाम, साहेब सतनाम । गिरौदपुरी के पहाड़ी म जय सतनाम के आवाज गूंज उठथे । महंत जी ह वर, वधू ल आसीरबाद देथे । महंत जी पूजा आरती कराथे । कंठी अऊ जनेऊ पहिनाथे । करूणा माता ह नरियर अऊ इक्कीस रूपिया लेके । सतनामी बना देथे । बलराम पांडेय कईथे मय अपन नाम ल बदल हूँ । महंत जी ह पात्रे सरनेम रख देथे, बलराम पात्रे होगे । संत गुरू घासीदास जी के जय बोलथे । जय सतनाम के नारा लगाथे । वर वधू ल सब संत, महंत मन आसीस देईन ।

चन्द्रकला अऊ चन्दा कईथे चलव पंडाल के पास बईठ वो वहाँ कुरसी लगे हे । वर-वधू मोहन, बलराम, पुस्पा, पूरनिमा, रमौतीन, रामदेव, कामदेव, सुनील, आके बईठ जाथे । मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह जी चार बजे हेलीकाप्टर से गिरौदपुरी पहुँचीस । अर्जुन संह सीधे मंदिर म जाके पूजा करिच । जैत स्तम्भ म नारियल फोड़च । नारियल के परसाद ग्रहण करीच । जय सतनाम कहिच । सतनाम के जयकार से आकास गूंज उठिस । अर्जुन सिंह के संग म बंसीलाल घृतलहरे, केयूर भूषण, किसनलाल कुर्रे, डॉ. दुमनलाल, बी.आर. यादव, कलेक्टर अजीत जोगी, डॉ. खेलनराम जांगड़े विधायक, मदन सिंह डहरिया, नरसिंह मंडल, के.पी. खांडे, एम.आर. जोलहे, जैतराम सोनी, यू.डी. बद्येल, सुन्दर लहरे, धनेस पाटिला, अऊ कई विधायक मन आय रहय । कलेक्टर अजीत जोगी ह मंच से पहिली अंतरजातीय विवाह करे चन्द्रप्रकास अऊ प्रेमलता ल आसीरबाद देय बर ले गिच । अजीत जोगी बताईच सर ये चन्द्रप्रकास पांड़े नायब तहसीलदार बिलाईगढ़ म पदस्थ हे । मोहन लाल भारद्वाज दुर्ग म डिप्टी कलेक्टर हे के सुपुत्री डॉ.प्रेमलता भारद्वाज से आदर्स विवाह अंतरजातीय जय स्तम्भ म पूजा करके करे हे । अर्जुन सिंह जी आसीस देथे । वर वधू ल पाँच सौ रूपिया भी देथे । मोहन लाल अऊ बलराम पांड़े से भी हाथ मिलाके बधाई देथे । सब मंत्री, संत महंत मन बधाई देथे । चन्द्रकला, पुस्पा, रमौतीन बहुत खुस हो जाथे ।

अर्जुन सिंह मंच म जाके बईठ जाथे । अजीत जोगी जल्दी कार्यक्रम करे बर मंज म अंतरराष्ट्रीय पंथी नर्तक बंजारे के पंथी नृत्य प्रस्तुत करथे । संत समाज गदगद हो जाथे । देवदास बंजारे अपन चिर परिचित आवाज म ।

गीत –
मंदिरवा म का करे जईबो
अपन घट के देव ल मनई बो
पथरा के देवता ह, हालत न डोलत ए ।
काबर पथरा म मूड़ पटकई बो ।
मंदिरवा म करे जईबो ।

पंथी नाच से संत समाज झूम उठिच । मंच म तालियों के गड़गड़ाहट से गूंजाय मान होगे । मंच म अर्जुन सिंह के सम्मान करीन । सफेद धोती के पगड़ी अऊ पंधा डाल के समाज के आप ल सम्मान करीन । बंसीलाल जी ह कुछ माँग रखिच । अर्जुन सिंह जी बोलिच संत गुरू घासीदास बाबाजी बहुत बड़ा काम किया हे करोड़ों लोगों का आदेश दिया है । सतनामी समाज बहुत बड़ा है । मेला स्थल में सड़क है । धर्मसाला, पाटी टंकी बनाने के घोसना करथे । 18 दिसम्बर गुरू घासीदास जयंती के दिन सासकीय अवकास की घोसना भी कर देथे । अंतरजातीय विवाह ल प्रोत्साहित करे बर सासन की ओर पाँच हजार रूपिया । वर वधू ल एक सरकारी नौकरी में प्राथमिकता देय के घोसना भी करिच । मंच म चन्द्रप्रकास पांड़े अऊ डा. प्रेमलता भारद्वाज ल बुलाथे सासन की ओर से सम्मानित करिच । कलेक्टर साहब नोट कर ल चन्द्रप्रकास के पदोन्नति भी दे दी जाथे । अनुसूचित जाति, जनजाति के विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति म बढ़ोत्तरी के भी घोसना कर देथे । अर्जुन सिंह के जिन्दाबाद के नारे भी लगथे । पूरा मेला स्थन, जंगल, पहाड़, पेड़-पौधे अऊ पथरा म भी सतनाम मय होगे रहय । बीस लाख लोग दरसन करे आय रहे । पाँच बजे हेलीकाप्टर म बईठ के अर्जुन सिंह मंत्री, सांसद, कलेक्टर, रायपुर के लिए उड़ गे ।

बलराम मेला देख के अभिभूत हो जाथे । पुस्पा कईथे, अतका बर मेला कभू उमर भर नई देखेंव । चन्द्रकला, पूरनिमा, रमौतीन के मया भूला जाथे । रामदेव तो सपना म नई देखे रहेन कथे । कामदेव कईथे भईया मय एक बार जोसी जी के संग आय रहेंव । ओ दिन ले महू सतनाम ल माने लगेंव । मरे के बेरा म सतनाम साहेब के कोरा म जाग पागे । चन्द्रप्रकास अउ प्रेमलता के सादी म अतका आदमी के उपस्थिति सासन के सम्मान अऊ पदोन्नति होके संग खुसी म प्रेमलता के अंचरा हर भर गे रहय । प्रेमलता अऊ चन्द्रप्रकास के जोड़ो ल देख के देखत रह जाय । प्रेमलता ह सोन परी जईसे दिखत रहय । रानी, महरानी जईसे जेवर, गहना म लदे रहय । सब झन ल सादी म सरीक होय के मजा आथे ।

मोहन, सुनील ल कईथे, बेटा ए मिठाई अऊ नारियल ल बाँट । पुड़ी, सब्जी बना के लाय रहय । वहीं बईठ के खाईन । मुख्यमंत्री के जाय ले सब मेला से जाय लगिन । कई हजार बस, कार, जीप, ट्रेक्टर, बैलगाड़ी के चक्काजाम होवय ल । यातायात क्लियर होय म पाँच घंटे लगगे । छः बजे लाईन लगवाईया मन रात के बारह बजे सड़क म जगा मिलिच । मंच के पास कुर्सी खाली हो गय रहय । करूणा माता, विजय गुरू, आसकरणदास जी, के चरण छुए बर चन्द्रप्रकास अऊ प्रेमलता जाथे । संग म चन्दा, पूरनिमा, चन्द्रकला, पुस्पा देवी भी जाथे । गुरू चरण छुए बर एक नारियल अऊ ग्यारह रूपये लगत रहय । चन्द्रप्रकास रूपिया निकाल के चरणस्पर्स के बाद देथे । माताजी ह आसीस देईच जुग-जुग जीवो, दूधो नहाओ पूतो फलो, अगले बछर के मेला म बाबू धर के आवव । प्रेमलता कईथे माताजी बाबा जी के आसीरबाद मिलही त जरूर आबो । बलराम, मोहन, रामदेव, कामदेव जतका आय रहय, सब गुरू दरसन करीन ।

मंदिर के अंगना म नरिरेच नरियर । गुरूजी के घर म घलोक नरियर भेंट रहय । अन्ताजन बीस लाख आदमी मेला म आसाम, कलकत्ता, बिहार, उड़ीसा, दिल्ली, भोपाल, नागपुर, बम्बई, सूरत, महाराष्ट्र, दुर्ग, राजनांदगाँव, बस्तर, कांकेर, मुँगेली, बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़ के भक्त मन गुरू दरसन करके जात रहय । छत्तीसगढ़ म अतका बड़ मेला कहीच नई भरावय । जबरदस्त मेला गुरू घासीदास जी के कर्म भूमि, जन्म स्थली गिरौदपुरी म भराय रहय । चन्द्रप्रकास के पटवारी, आर.आई., तहसीलदार मन पुड़ी, सब्जी, पानी भोजन करवाईन । रात दो बजे मोहन भारद्वाज कईथे, समधी जी सब चले गीन । हमू मन चलबो । डॉ. प्रेमलता ह माँ, पिताजी, सहेली चन्दा दीदी सबसे गले मिलके रोथे । बेटी बिदा के समय सबके आँखी म आँसू आ जाथे । चन्द्रकला कईथे जादा दूर तो नई रहिबे । ए बिलाईगढ़ अऊ रायगढ़ म रहिबे । भारद्वाज जी ह बेटी ल रूपिया पईसा, सोना, चाँदी भेंट म दिच अऊ आँसू गिरावत कार, जीप म बईठ के दुर्ग चल देथे ।

चन्द्रप्रकास के विभाग वाला मन साथ म रहय । कथे सदो घंटे अऊ रूक जावय । ड्राईवर मन थोड़ा सो ले, ठीक पाँच बजे निकल जाहव । डॉ. प्रेमलता, चन्द्रकला, पूरनिमा अऊ जन्दा ह बईठे बईठे दू घंटा सो गीन । चन्द्रकला के भी नींद पड़गे । रामदेव कईथे चला उठव पाँच बजत हे । रास्ता में नाला म रोकिहो। बाहर भीतर करबो । रामदेव ड्राईवर ल जगाईच । डॉ. प्रेमलता अऊ चन्द्रप्रकास हे जैतखाम के परनाम करथे । बाबा जी हमला आसीस दे, हमर नवा जिनगी सुरू होत हे ।

चन्द्रप्रकास एक कार म प्रेमलता, चन्दा, चन्द्रकला बईठिन । अऊ सीधे नाला के पास रोकिन । सब निवृत होके जीप म बईठ के सीधे रायगढ़ आ जाथे । रायगढ़ म चन्द्रसेन ह घर राखत रहय । मड़वा म वर वधू ल बईठा देथे । सब अपन अपन कमरा म जाके कपड़ा बदल लेथे । चन्द्रकला ह चन्द्रप्रकास के कमरा म प्रेमलता ल ले जाथे । कपड़ा बदल के दातून ब्रस करके तियार हो जाथे । चन्द्रप्रकास ह ब्रस करके तियार हो जाथे । चन्द्रसेन सबो बर चाय बना के ले आथे । मड़वा म बईठ के चाय पीईन ।

चन्द्रकला, रमौतीन, पूरनिमा भोजन पकाय बर लग जाथे । चन्दा, जानकी, पुस्पा प्रेमलता बईठ के साग भटा आलू, मदर साफ करीन । रामदेव कईथे चलव तरिया ले नहा के आ जाथन । बलराम, सुनील, सांडिल्य, अऊ मेहमान मन नहाय तरिय चले जाथे । चन्द्रकला कईथे महिला मन भी घलो नहा के आ जावव । चन्दा ह सब झन ल खवा देथे । जईसे भोजन करथे नींद आ जाथे । प्रेमलता, चंदा, कमरा म जो जाथे मस्त घर, अंगना भरे रहय । चन्द्रप्रकास मड़ा म सोगे रहय ।

चन्दा के बेटी भूरी ह चन्द्रकला ल कईथे, मेडम मोसी प्रेमलता अब ईहे रईही । चन्द्रकाल कईथे काल घर जाबे । एक हफ्ता के छुट्टी खतम होगे । मालूराम ह भोजन ठेकेदार ल पार्टी होही कहिच । लगभग एक हजार के भोजन बनीस । रात आठ बजे से पार्टी होही । मालूराम ह कार्ड छपवा के निमंत्रण दे दे रहय । रात आठ बजे भोजन चालू होईच ।

बिहाव के पार्टी म सहर भर के नामी गिरामी, सेठ, साहूकार, अधिकारी, कर्मचारी, नगरपालिका के अध्यक्ष महावीर गुप्ता मुख्य नगरपालिका अधिकारी सी.एल. वर्मा, सैकड़ों न.पा. के कर्मचारी आय रहय । सब झन बिहाव के बधाई दीन । रात बारह बजे तक पार्टी चलिच । चन्द्रप्रकास अऊ प्रेमलता ल चन्द्रकला दू प्लेट म मीठा ला के खवाथे । प्रेमलता के मुहम रसगुल्ला डालथे । चन्द्रप्रकास ल एक ठन खवाथे । प्रेमलता ह चन्द्रकला के मुँह म रसगुल्ला रखते । चन्दा घलो आ जाथे । चन्दा के बेटी भूरी कईथे मौसी मोर हाथ से एक रसगुल्ला । प्रेमलता रसगुल्लाखा लेथे । एक गुलाब जामुन भूरी ल खवाथे । पूरे परिवार वाला मन बईठ के भोजन करे लगथे । पुस्पा देवी, बलराम कईथे, मालूराम जी बेबस्था अच्छे करे हच बधाई स्वीकार कर । मालूराम कथे । मोर फरज ऐ । मय तो ए परिवार के सदस्य आँव । सुख दुःख काम नई आहंव त कब काम आहंव । सुनील कईथे, मालूराम जी तय ऐ घर के दामाद हच ।अऊ मोर साढू अच । कईसे आन होबे जी । मोर तो बड़े भाई अच । मालूराम अग्रवाल कईथे, भईया तय कोर्ट मेरिज करके सामने आ गय । मय तोनई आ सकेंव मय तो लुका छुपी खेलत हंव । पर चन्द्रकला दीदी तो एक खूटा म बंध गे हे । मालूराम कईथे, यदि चन्द्रकला ह कोर्ट मेरिज करना चाही त मय तियार हंव । पूरनिमा कईथे मोर दीदी ल काबर परेसान करत हव । पूरनिमा के बेटी रूना ह बड़ी माँ चन्द्रकला के गोदी म बईठ जाथे । सब झन भोजन करके अपन अपना जगा म चले जाथे ।

चन्द्रप्रकास के कमरा ल चन्द्रसेन अऊ पूरनिमा मन बढ़िया सजा देय रहय । प्रेमलता ल चन्दा बताईच । आज घर देथे । प्रेमलता कईथे दीदी डॉक्टर मय हंव के मय । डॉक्टरतो तय हच । पर विशेषज्ञ तीन बच्चे के मय । मोर अनुभव जादा हे । चन्द्रकला कईते । एक लोटा पानी रख देहंव । आज तार ईते सोवव । चन्द्रकला अऊ चन्दा समझा के दूसर कमरा म सोये बर चल देथे । चन्द्रप्रकास घूम के आथे । सुनील कईथे, जावो अपन कमरा म सोहा ।
चन्द्रप्रकास जईसे पंलग के पास पहुँचथे । डॉ. प्रेमलता पलंग से उठ के पाँव परथे । चन्द्रप्रकास ह अगरबत्ती जला संत गुरू घासीदास जी के पूजा करथे । अगरबत्ती खोंच देथे । कमरा महक जाथे । खुशबूदार अगरबत्ती रहय । कपड़ा बदल के सोये के तियारी करथे । प्रेमलता अऊ चन्द्रप्रकास एक जान दू सरीर हो जाथे । संग संग जीये मरे के कसम खाथे । सुख दुःख म साथ रहे के संकल्प लेथे । कुछ गपशप मारत मारत नींद पड़ जाथे । प्रेमलतापूर्ण नारी बन जाथे । प्रेमलता के प्रेम फांस म चन्द्रप्रकास फंस जाथे ।

चन्द्रकला सुबह जल्दी उठ के तियार होगे । चन्दा भी तियार होगे । सुबह नव बजे बस रहय । चन्द्रकला ह दरवाजा के कुंडी खटखटाथे । प्रेमलता हमन घर जात हन । चन्द्रप्रकास जाग जाथे । सौच ब्रस करके बईठ जाथे । प्रेमलात कईथे, दीदी आज अऊ रूक जाते, चन्दा दीदी भी जात होही । चन्द्रकला कईथे, मोर छुट्टी खतम होगे हे । पुस्पा कईथे जा बेटी ठीक हे सादी बिहाव होगे । चन्दा ल कईथे बेटी तय मोर संग बेटी ते जादा काम करे हच । तय मोर बेटा के सादी लगा के अच्छा काम करे हच । पुस्पा लूगरा अऊ पैर पट्टी देथे। चन्दा कईथे, दाई ऐ तो भगवान घर से लिखा के आय ह जांवर जोड़ी । मय तो एक निमित रहेंव । चन्द्रकला दीदी चल ओ । जीप म बईठ के जाथे । प्रेमलता ह चन्द्रकला, चन्दा के पाँव परथे । एक साल के भीतर लला, बेटा होवय। छुट्टी के लड्डू खाबो । पुस्पा, बलराम, रामदेव, रमौतीन के पाँव छूके बिदा लेथे । सारंगढ़ बस स्टेण्ड म बस खड़े रहय । चन्द्रकला ह टिकिट कटाईच । चन्दा ह सीट म जाके बईठे जाथे । भूरी ह खिड़की ल झाँक के देखत रहिस ओतके बेरा ट्रक नाहकिस । चन्द्रकला ह जोर से चिलाईच । भूरी अंदर घूस । भूरी अंदर कर लेथे । चन्दा ह एक थपरा मारिस, काबर मूड़ी ल बाहर निकालथच । टूरी रोगही । मरे बर हे का तोला ? चन्द्रकाल देवी आके सीट म बईठ जाथे । चन्दा बांचगे अलहन ले । बस छूट जाथे तीन घंटे बाद सारंगढ़ पहुँच जाथे । चन्द्रकला सारंगढ़ नगरपालिका म उतर जाथे अउ चन्दा ल कईथे, तय रिकसा म समान ले के जा बहिनी ।

चन्द्रकला देवी जाथे । हाजिरी रजिस्टर म दस्तखत करके काम करे लगथे । बड़े बाबू कईथे, चन्द्रकला भाई के बिहाव करके आय हच लड्डू तो खिला । चन्द्रकला कईथे, बड़े बाबू जरूर खिलाहंव, बरात के लड्डू नई मिलय । काबर आदर्स बिहाव गिरौदपुरी मेला म होय हे । ठीक हे फेर चाय नास्ता तो करा सकत हच । चन्द्रकला राधाबाई चपरासिन ल बुलाथे । देख राधाबाई कतका झन बईठे हे । राधाबाई घूम घूम के गिनथे । मेडम पच्चीस आदमी होत हे । चन्द्रकला कईथे राधा बाई तय एक किलो गुलाब जामुन, एक किलो लड्डू होटल से ले आय । तब तक दूसर चपरासी ह पानी पिलाथे । राधाई दउड़त होटल से मिठाई ले जाथे । चन्द्रकला कईथे, ले बड़े बाबू मुँह मीठा कर ले । बड़े बाबू गुलाब जामुन, लड्डू खाथे । नमकीन तो खिला । चन्द्रकला चार पाँच प्लेट भजिया भी मँगाथे । मस्त चाय नास्ता करेक, काम करथे, साम साढ़े पाँच बजे चन्द्रकला देवी घर चले जाथे ।

चन्द्रकला देवी हाथ मुँह धोके तियार होथे ।चन्दा ह चाय लेके आ जाथे । दीदी चाय, तोर संग पीये ले मजा आ जाथे । पूरी बस्ता पकड़ के आ जाथे । बड़ी दाई पढ़ा न । चन्द्रकला कईथे दस पाठ निकाल । भूरी बोलथे । ओ तो पहले पढ़ डारेन ह । चन्द्रकला कईथे, पहाड़ा निकाल । गिनती याद करती है । चन्दा बोलथे धीरे पढ़ । बड़ा पढ़न्ती आय हच । भूरी नाराज होके मन मन में पढ़ते । चन्दा कईथे दीदी बिहाव बने के निपट गे । मय डरत रहेंव । कछू कछू लफड़ा झन होय । सतनाम के कृपा ऐ । सुख, सांति से निपट गे । चन्द्रकला कईथे तोर परभूता म गिरौदपुरी के मेला देखे ल पायेन । मय अतका बड़ मेला कभू नई देखे रहेव । गाड़ी, मोटर, कार, बस, ट्रेक्टर दस हजार से जादा रहिस हो ही । चन्दा कईथे दीदी चार जगा भीड़ ह बटगे हे । छाता पहाड़, नदी किनारे, मेला, अऊ अमृत चरणकुण्ड, लाको नर नारी ईहाँ आके सांति के महसूस करथे । चन्द्रकला ल कईथे, दीदी हर साल हो ही जाबो । हाँ जाबो चन्दा कईथे । दीदी भोजन मय बना डारे हंव, आ जाथे ।

चन्द्रकला भूरी ल पढ़ाय लगथे । भूरी कईथे, बड़ी दाई, प्रेमलता मौसी कहाँ हे । मोला बहुत अच्छा लगथे । बहुत सुन्दर दिखत रहिस । सोन परी कस । सोने के गहना बहुत सुन्दर रहिस । चन्द्रकला कईथे तहूँ पहिनबे भूरी । हाँ दाई महूँ बड़े होवव त जरूर पहिनहव । सोन परी महूँ बन हूँ । चन्द्रकला कईथे भूरी लउहा बड़ी हो जा । तोर बिहाव करबो त जेवर, गहना पहनाबो । भूरी हसत खिलखिलावत, बस्ता लेके भाग जाथे । चन्द्रकला ह पुराना दिन ले खोय लगथे । महूँ ह सपना देखे रहेंव । मोरो बाल लईका होही । घर म किलकारी होही । मय तो खुस होगेंव । किस्मत कहाँ से कहाँ ले जाथे । मय जीवन भर पति सुख, लईका सुख, प्रसव पीड़ा, सास, ससूर, ननद के झगड़ा, हंसी किलकारी मोर गायब होगे । आज भाई के कारण मय अपन जीवन ल होम देयेंव । येहू ह मोर माँ के जन्माय नोहव । तभी ले मय सहोदर मानत हंव । मोरो दा ददा मन जनमा के दूसर के गोदी म डाल दिन । अऊ बेफिकर होके, जीवन बिताय लगिन । चन्द्रकला कईथे, ठीक हे जीवन म कई उतार चढ़ाव आथे । पुस्पा दाई मोला पढ़ाय नई रहितिच त महुँ ह गोबर थापत, साफ, सफाई, कोकरो दुकान म रेजा के काम करत रहितेंव । चन्द्रकला के मन भटकत रहिच सोचथे तो होथे अच्छा होथे, यदि एक बहन ह भाई के नौकरी लगाय बर समरपित दूसर बर हो जाथे त का बिगड़गे मोर, का कमी होगे । मोर शरीर तो ओतकेच बड़ हे । कहीं घटी बढ़ी नई होय हे । मोला बिहाई के सुख तो मिल गे हे सिरफ सम्पूर्ण स्त्री, औरत, नारी नई बने पायेंव । सायद दूसर जनम म एक दरजन बेटा, बेटी जनमा हंव । कोचकीच ले घर भरे रहय । ये ही अंतिम इच्छा होही । मुड़ धरे बईठे रहय ।

चन्दा कईथे दीदी दीदी, पीछू कांछा पकड़ के हिलाथे । चन्द्रकला के आँसू, झरर, झरर बहत रहय । चन्दा कईथे, का होगे दीदी । काबर रोवत ह । कछू नई रे । पुराना दिन याद आ जाथे । सोचत रहेंव कभू महुँ ह शादी बिहाव करके । लईका मन संग खुस रहिहंव । सपना देखे रहेंव । मोरो पति ह सुखे सुख रखिही । मारही पीटही अऊ मनाही । एक दरजन लईका जनमहूँ । औरत मन के दुःख ल सोचत रहेंव । स्त्री मन अपन दुःख आँसू बहा के कम कर लेथे । महूँ ह कम करे हंव । चन्दा कईथे, दीदी तय तो मरद बराबर काम करते हव । कमात अऊ खात हच । सिर्फ कमी हावय मरद के । मरद बिना अतका दिन ल काट डारे । भरे जवानी म कुछ नई करे त बुढ़ापा म का करबे । चन्दा मजाक करथे । दीदी यदि तहूँ चाहत होबे त हमर समाज में बहुत मिल जाहय । जवान जवान टूरा मिल जाहय । चन्द्रकला कईथे, नहीं बहिनी, एक जनम बर होगे । मय सेठजी के खूंटा म बंधागे हंव । ओहू त बुढ़वा होगे । ओकरो जांगर नई चलय तभी ले महीना, दू महीना म खबर लेतेच रथे । अब कुछ नई चाही । बाकी जिनकी अईसने कट जावय भगवान से बिनती हे । चन्दा कईथे दीदी चल भात जुड़ावत होही ।

चन्द्रकला कईथे बहिनी तय मोर पहिली जनम के बहिनी दाई बूढ़ी दाई रहे होबे, तभे अतका मोर धियान रखथच । चन्दा कईथे, दीदी अतका एक स्त्री ह दूसर स्त्री के काम नई आहय त ओकर जिनगी बेकार हे चन्द्रकला मुँह धोके कथे चल बहिनी । समारू ह भूरी अऊ कुसुवा ल बढ़ें बर बईठाय रहय । मेडम नमस्ते चन्द्रकला ल कईथे, सादी अच्छा निपटगे चन्दा बतावत रहिस । हाँ अच्छा निपट गे । चन्दा ह परछी म पीढ़ा बिछा देथे . चन्द्रकला अऊ चन्द्रा बईठ के भोजन करथे । समारू कईथे मेडम सरपंच के चुनाव होवईया हे । चंदा ल सरपंच के चुनाव लड़वाहत कहत हंव । चंदा ह मना करत हे तही समझा चंदा ल । चन्द्रकला कथे । चन्दा बने कहत हे सरपंच पद पर चुनाव लड़ मय तो हंव न । चन्दा कथे दीदी । चुनाव म बहुत ही छीछा लेदर करथे । जबरदस्ती आरोप लगथे । मय चुनाव नई लड़व । चन्द्रकला कईथे, महिला मन ल राजनीति म जरूर भागीदारी होना चाही । जब तक राजनीति म अधिकार नई मिलही ल कईसे लड़बे । चन्द्रकला कथे गाँव गाँव म महिला मण्डल बनाय हन । सब गाँव म महिला सरपंच चुनाव लड़थे । समारू भईया अच्छा बात निकारे ।

समारू कईथे मेडम भात सब्जी, कछु देंव । चंदा कथे बस । भात खा के उठ जाथे । कुछ देर बईठ के सरपंच पद म चुनाव लड़े बर योजना बनाथे । सारंगढ़ सरिया, बरमकेला म सब महिला मंडल ल कहत सब चुनाव लड़य । जीत हार तो लगे रहथे । चन्द्रकला अपन कमरा म आके सोचत सोचत सो जाथे ।

चन्द्रप्रकास के छुट्टी खतम होत रहय । डॉ. प्रेमलता ल कथे । सुहागरात के दिन समय खतम होगे । अब अपन काम म जाहव । प्रेमलता कईथे, मय ईहाँ नई रहे सकव । संग म रहिहव । पहिली के बात अलग रहिच । अब तो पति, पत्नी ल साथ म रहना चाही । जब इच्छा खतम नई हो जावव । चन्द्रप्रकास कईथे चल साथ जाबो । चन्द्रप्रकास माँ से कथे । माँ छुट्टी खतम होगे । कल बिलाईगढ़ जाबो कहत हन । ठीक हे बेटा जावव । हमू मन एक महीना बाद आ जावा । प्रेमलता जाय के तियारी करे लगथे । बलराम कथे अपन घरेलू समान संग ले जाव । जीप किराया म ले लव । सामान भर के लेजाव । पुस्पा देवी कईथे, बेटा ठीक कहत हे तोर बाबूजी बने कहते । चन्द्रप्रकास ह चन्द्रसेन ल कथे जा भाई स्टेण्ड से जीप ले आ । बिलाईगढ़ जाबो । चन्द्रसेन जीप ले आथे । डा. प्रेमलता सब सूटकेस तियार कर डारे रहय । पुस्पा देवी, रमौतीन, बलराम, रामदेव के पाँव छूथे । सब आसीरबाद देथे । ऐही दीन के आवत गोदी भर जावय । प्रेमलता मुस्करा देथे । चन्द्रप्रकास भी चरण छूथे । प्रेमलता कथे मोर दू ठीन सास अऊ दू ठन ससुर हे । जरूर आसीरबाद पूरा होहय । चन्द्रप्रकास अऊ प्रेमलता जीम म बईठ के बिलाईगढ़ बर निकल जाथे ।

चन्द्रप्रकास जीप सारंगढ़ म रूकवाथे । चन्दा दीदी के घर जाथे । प्रेमलता चन्दा से लिपट जाथे । आनंद आगे दीदी । आनंद आगे । बढ़ती उमर म स्वर्ग दिखत हे । जीवन के आनंद, सुख विवाहित जीवन म हे । मोर बेकार पैतीस बछर गईछ । चन्दा कईथे, दीदी अभी तो सुरू होय हे । आनंद ए आनंद मिलही । चन्दा ह अंगना म खटिया बिछा दे रहय । चन्द्रप्रकास के पहिली से परिचित होगे रहय । चन्द्रकला दीदी आ जाथे । तोर कमरा म अभी जवईया रहेन दीदी । चन्द्रकला के साथ कमरा म चल देथे । डॉ. प्रेमलात ह पाँव छूथे । चन्द्रकला माथा ल चूम लेथे । प्रेमलता कली से फूल बनगे रहय । बहुत सुन्दर दिखत रहय । खाट म बईठ के हाल चाल पूछथे । सब ठीक हे बताथे । चन्द्रकला बताथे । चन्दा हे सरपंच के चुनाव लड़त हे । तीन महिला मन खड़े हे । महिला मंडल ले निर्णय होय हे । चन्दा हे सरपंच बनही । सब महिला मन सुनता होगे हे । कोई खड़ा नई होवय । डॉ. प्रेमलता कथे तब तो निर्विरोध सरपंच बन जाही ।

चन्दा हे जाय बनाके ले आथे । सा म बईठ के चाय पीथे । प्रेमलता कईथे बधाई हो चन्दा दीदी । चन्दा कथे । काहे के बधाई । प्रेमलता कथे, सरंपच बने के । अभी पन्दरा दिन बाकी हे । चन्द्रकला दीदी ह बनाही त बनहू । नई तो नहीं । चन्द्रकला कथे । ले आज ले तोला सरपंच बना देंव । जा कुरसी म बईठ जा । चन्दा कथे दीदी तोर आसीरबाद रहिहि त जरूर एक दिन सरपंच के कुसरी म बईठ जाहंव । चाय पीये के बाद प्रेमलता कईथे जाथन दीदी । चन्दा कईथे, भोजन करके जाहा । अभी बना देथंव । चन्द्रप्रकास कथे दीदी आज नहीं । दूसर दिन गोद म लईका लेके आबो । चन्द्रकाल आसीरबाद देथे । प्रेमलता गले मिलके हदहदा हांसथे । चन्द्रप्रकास जीप म बईठे रहय । चन्द्रकला अऊ चन्दा जीप तक छोड़े जाथे । प्रेमलता हाथ हिला के बिदा लिच । जीप धूल उड़ावत नगर से ओझल होगे । चन्दा कईथे, जा बहिनी सुखी रह । चन्द्रकला अपन कमरा म जाके सो जाथे ।

मधुकेसरवानी ह महिला मंडल के मीटिंग अपन घर म बुलाथे । लगभग दो सौ महिला मन भाग लेते । मीटिंग त तय होगे । सारंगढ़ अऊ सरिया, बरमकेला के चालीस सीट म महिला सरपंच खड़े होना चाही । महिला मन ल पूछथे कि कोन कोन इच्छुक ह नाम लिखा दव । मधु ह सबके नाम लिखे लगथे । रानीसागर गाँव से चंदावारे के नाम चन्द्रकला ह प्रस्तावित करथे । कोई विरोध म नाम नई आईच । सरिया से जमुना सर्मा के सिट से उर्मिला रात्रे । चालीस महिला के नाम सूची म लिखाथे । जब भी नामांकन भरे जाहय । सब महिला एक जूट होके परचा भरीहव । सब महिला अपन अपन घर चल देथे ।

कलेक्टर द्वारा सरपंच चुनाव के कार्यक्रम घोषित कर देथे । चुनाव अधिकारी के आधू म चाली महिला, सारंगढ़ से, चालीस सरिया, चालीस बरमकेला से सरपंच पद के परचा भर देथे । बाकी सीट म पुरूष मन बर छोड़ देथे । महिला सीट आरक्षित सरपंच के लिये रथे । सब महिला मन फार्म भरथे । चन्दा ह रानीसागर ग्राम पंचायत भवन म जाथे । चन्द्रकला, उर्मिला, चन्द्रिका, प्रस्तावक अऊ समथर्क पाँच महिला के हस्ताक्छर कराके प्रस्तुत करथे । निर्धारित समय पाँच बजे के बाद कोई महिला मन बिरूद्ध म फार्म नई भरय । साम पाँच बजे चुनाव अधिकारी ह चन्दा ल सरपंच घोषित कर देथे । सारंगढ़ सरिया अ बरमकेला म महिला सरपंच के संख्या 120 से अधिक होगे ।

कलेक्टर हर्समंदर ह महिला मंडल के संयोजक चन्द्रकला देवी ल कामयाबी बर 120 महिला सरपंच निर्विरोध चुने जाय बर बधाई देथे । चन्द्रकला देवी कईथे मय कोई अईसे काम नई करे अंव । ये तो मोर कर्तव्य हे । महिला मन ल जगाना, जागृत करना, अपना स्वाभिमान ल जगाना हे । ये मोर काम ये । हर्समंदर फेर बधाई देथे । सारंगढ़ से कलेक्टर साहब चल देथे । दूसर दिन के अखबार म 120 महिला सरपंच निर्विरोध चुने जाने पर बधाई छपे रहय । चन्द्रकला देवी के प्रशंसा छपे रहय । हर्षमंदर कलेक्टर के शासन को प्रतिवेदन भेज देथे । कार्य के सराहना कर देथे । महिला मंडल सारंगढ़, सरिया के नाम पूरे भारत वर्ष म जाने जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह मधु ल कथे । महिला मंडल के बईठक बुलाले । महिला सरपंच मन के सम्मान करबो । कलेक्टर साहब मुख्य अतिथि होही । रविवार के दिन सरिया म महिला मंडल के बईठक, जमुना, मधु रखथे । बड़े पंड़ाल लगे रहय । गाँव गाँव के महिला सदस्य अऊ नव निर्वाचित महिला सरपंच मन चुरे रहय । चन्द्रकला देवी ह कलेक्टर साहब के स्वागत कराथे । मधु ह महिला सरपंच के सम्मान खातिर पारी पारी सब ल बुलाईच । श्रीमती चंदा बाई सरपंच रानी सागर । एक हजार महिला मन तालियों से गड़गड़ाहट से पंडाल गूंज जाथे । कलेक्टर साहब, पुष्प गुच्छ से सम्मान करथे । महिला मंडल के संस्थापक अध्यक्ष घलो ल सम्मानित करथे । चन्दा खुश हो जाथे । सम्मान बर धन्यवाद कलेक्टर साहब ल देथे । बारी बारी से एक सौ बीस महिला सरपंच के पुष्प गुच्छ से कलेक्टर साहब अऊ चन्द्रकला देवी सम्मान करथे । कलेक्टर साहेब बताथे । विधान सभा के चुनाव नवम्बर में होने वाले हे । देवी जी आप विधायक के लिये तियारी करिये । महिला मंडल के कार्यक्रम खतम हो जाय के बाद । कलेक्टर साहब चल देथे । चन्द्रकला देवी ह सब महिला मंडल के सदस्य मन ल कईथे, विधानसभा चुनाव होन वाले हे । सब तियारी करव । मय चुनाव म खड़ा होवत हंव । आज से संपर्क गाँव गाँव म सूची बनाय बर चालू कर देवव । मय नौकरी छोड़ के चुनाव लड़हूँ । बईठक समाप्त हो जाथे ।
क्रमशः

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