छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Tuesday, June 27, 2006

भाग- तेरह

चन्द्रकला देवी विधानसभा सत्र समाप्त होय के बाद रायगढ़, सारंगढ़ अउ सरिया के भ्रमण कार्यक्रम जारी होगे । चन्द्रकला अउ चन्दा देवी, दूनों झन छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से भोपाल से बिलासपुर जाथे । बिलासपुर से रायगढ़, अहमदाबाद एक्सप्रेस से साम 5 बजे पहुँच जाथे । रेल्वे स्टेसन म मंत्री जी ल लेय बर एस. डी. एम. अउ चन्द्रसेन, उप संचालक, पंचायत एवं समाज सेवा श्री पाटले जी आय रहय । चन्द्रसेन सूटकेस कार म रखिस, चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी रेस्ट हाउस के बजाय घर म रूकना अच्छा समझीस । चन्द्रकला देवी ह पुस्पा दाई, रमौतीन, रामदेव के पाँव छूके आसीरबाद लेईस । चन्द्रसेन सूटकेस ल खोली म रखिस । चन्दा देवी जल्दी नहा धो के तियार हो जाथे । चन्द्रकला देवी ह नहा के तियार होके कपड़ा पहिन के तियाह हो जाथे । तब तक रमौतीन दाई ह बढ़िया चाय, बिस्कुट तियार करथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी परछी म पीढ़ा म बईठ के चाय पीथे ।

चन्द्रकला देवी घर म बुला के कह घलो देथे, कवि सम्मेलन अउ स्वागत समारोह के तियारी कईसे चलत हे ? चन्द्रकला देवी स्वंय जा के देखथे । चन्दा देवी सारंगढ़ म रूक के बेवस्था देखत रइ । मधु अउ जमुना देवी महिला मंडल के सदस्य मन ला गाँव गाँव जाके सूचना देथे, सबके उपस्थिति जरूरी बताथे ।

मंच अउ पंडाल एक दिन पहिली से लगत रहय । बहुत बड़े पंडाल अउ मंच बने रहय, पूरा मैदान भर छा दे रहय । पूरा पंडाल भर म दरी बिछा दे रहय । अतिथि मन बर तकिया, गद्दा बिछे रहय । थोरिक दूर म भंडारा के भोजन बनाय के बेवस्था करे रहय । रायगढ़ ले साल, श्रीफन, काजू, किसमिस, बादाम, सेवफल, केला, अमरूद पेटी के पेटी ट्रक म भर के ले जाय रहय । कवि सम्मेलन अउ स्वागत समारोह, सरिया म एक दिन के मेला लग गे रहय । लईका मन बर ढेलुवा, रेहंचुल झुलना, गुपचुप, मिठाई, पेड़ा, उखरा के मेला लग गे रहय ।

मधु, चन्दा देवी, सारंग़ पाँच सौ महिला मन ल बस, ट्रक, बैलगाड़ी म ले जाय रहय । सरिय क्षेत्र के गाँव गाँव के महिला मन आके चार बजे पंडाल भरगे रहय । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी वारे ह अपन हाथ म परोस के महिला मंडल के सदस्य मन ल भात, दार, सब्जी, चटनी खवात रहय । सरिया गाँव म एक दिनी मेला लगे रहय । झमाझम पंथी नृत्य, करमा, घलो होवत रहय । सरिया गाँव के नार-नारी, टूरा-टूरी मन धक्का पड़त ले देखय । सियान कहय, अतका कन भीड़ महिला मन सौ साल म न होय हे । पूरा गाँव म महिला ही महिला ।

रायगढ़ से कवि मन ला लाय बर जीप रेल्वे स्टेसन म लगे रहय । डॉ. बलदेव साव अउ अनंदी सहाय सुक्ल अगुवानी करत रहय । सब कवि मन बाम्बेहावड़ा मेल से आईन । सर्व श्री लक्ष्मण मस्तुरिया, डॉ. विमल पाठक, डा. विनय पाठक, पवन दीवानजी, रामेस्वर वेस्नव, डी. पी. तिवारी, सुजीत नवदीप, नारायन लाल परमार, नंदू लाल चोटिया, रवि श्रीवास्तव, परदेसी राम वर्मा, सुसील यदु, ममता चन्द्राकर, विसम्भर मरहा, श्रीमती प्रभा सिंह आदि सबे कवि मन ले लेके सरिया आईन । चन्द्रकला देवी के निवास म ठहराय के बेवस्था रहय । सब झन के सुवागत करथे । बढ़िया सुस्वाद भोजन कराके कार्यक्रम सुरू करवाईन ।

स्वागत समारोह पहिली रात के आठ बजे शुरू होईस । चन्द्रकला देवी मंत्री पंचायत एवं समाज सेवा अउ चन्दा देवी विधायक सारंगढ़ के सुवागत मधु ह साल अउ श्रीफल, नरियर अउ बड़े फूल के हार से करथे । पंडाल म करतल ध्वनि से सुवागत करथे । जमुना अउ मधू ह चन्दा देवी ल लाल ओढ़ाके सुवागत करथे । बड़े हार पहिराथे, नरियर तको भेंट करथे । करतल ध्वनि से सुवागत करथे । महिला ससक्तिकरण के माडल पूरा राज्य म प्रतम आय के कारण भारत सरकार से पुरस्कार मिल रथे । ओही खुसी म सरिया म सम्मान समारोह होत रहय । लगभग चार से पाँच सौ महिला मन, फूल माला से सुवागत करथे । लगभग दू घंटा से जादा समय तक सुवागत सम्मान के कार्यक्रम चलिस । चन्द्रकला देवी से सम्मान ल नारी के सम्मान कहिथे । जे समाज म महिला के सम्मान नई होवय ओ समाज ह खतम हो जथे, कहिस । आज तक ओत्तक कन सम्मान काकरों नई होय रहिस । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी ह भारी गदगद हो गिस ।

कवि सम्मेलन रात दस बजे सुरू होईस । मंच म सबे कवि मन के पुस्पाहार से सुवागत, चन्दा देवी विधायक अउ चन्द्रकला देवी मंत्री ह बारी बारी से करथे । सर्वश्री पवन दीवान जी, नंदूलाल चोटिया, लक्ष्मण मस्तुरिया, रामेस्वर वैस्णव, अनंदी सहाय सुक्ल, डॉ. विनय पाठक, डॉ. विमल पाठक, परदेसी राम वर्मा, सुसील यदु, डॉ. बलदेव राव, ममता चन्द्राकर, विसम्भर मरहा, श्रीमती प्रभा सिंह, सुरदीप नवदीप । कवि सम्मेलन के संचालन नंदूलाल चोटिया जी करथें । जबरदस्त कवि सम्मेलन के सुरूवात डॉ. विमल पाठक जी के सरस्वती वंदना से सुरू होथे । कवि सम्मेलन म बीस हजार से जादा भीड़ जुटे रहय । आसपास के गाँव के नर नारी टुटे रहय । नंदूलाल चोटिया जी ह अपन निराला अंदाज म संचालन करत रहय । छत्तीसगढ़ी के गीतकार भाई लक्ष्मण मस्तुरिया लाडला कवि के सब झन ताली बजा के सुवागत करय, ताली के गड़गड़ाहट से आकास गूंज उठीस । लक्ष्मण मस्तुरिया जी मंच ल अउ श्रोता मन ल हाथ जोड़के परणाम करथे ।

गीत –
मोर धरती मईया, जय होवय तोर ।
मोर धरती मईया, जय होवय तोर ।।
गीत –
मोर संग चलव ग, मोर संग चलव ग ।
मोर गिरे पटे हपटे मन, अउ परे परे मनखे मन,
मोर संग चलव ग, मोर संग चलव ग ।

सब श्रोता मन झूम उठीस । माहौल कवि सम्मेलन के बन गे । खचाखच भीड़, लक्ष्मण मस्तुरिया जी के वाहवाही होगे ।
नंदूलाल चोटिया जी ह जन कवि अनंदी सहाय सुक्ल, रायगढ़ ल कविता पाठ करे बर बुलाइस । सुक्ल जी ह बढ़िय दू ठन कवित श्रंगार रस के सुनाइस । डॉ. विनय पाठक जी ह छत्तीसगढ़ी कविता सुनाइस । सुसील यदु, रामेस्वर वैस्णव, परदेसी राम वर्मा, डॉ. विमल पाठक, विसम्भर मरहा, डॉ. बलदेव साव, प्रभा सिंह ह नारी ससक्तिकरण बर कविता सुनाइस प्रथम दौर के अंतिम कवि पवन दीवान जी सुनाइस । अपना निराला फकीराना अंदाज म गीत फटकारिस ।

गीत –
मोर गाँव म टूरी रहीच,
चन्दा ओखर नाव ।
गली, खोर घूमत, किंचरय,
चलत त ओहा नागिन जईसे
हांसय त बिजली चमकय ।
करिया बादर कस ओकर केस रहय
कड़कत, घपटत रहय चाल ।
मोर गाँव म टूरी रहय,
चन्दा ओखर नांव ।
पवन दीवान जी ह चार पाँच ठन गीत, कविता सुनाके मन ल मोह डारिस । बहुत वाहवाही लुटिस । वन्स मोर-वन्स मोर कहत रहय । महिला मन हांसत-हांसत मस्त होगे । कवि सम्मेलन सफल होगे । जम के बईठे रहय, कोई टस से मस नई होईन ।

नंदूलाल चोटिया जी दूसर दौर के सम्मेलन चालू करिस । रात तीन बजगे रहय । कवि सम्मेलन सुबह के पाँच बजे तक चलत रहय । सुबह पूरा भीड़ ह एक से बढ़िया कविता, गीत सुनत रहय । मालूराम जी चाय पिलाके सब कवि मन ला रायगढ़ के लिये जीप म बईठा देथे । सब कवि मन गदगद मन से बिदा लेथे । कवि सम्मेलन खतम होय के बाद सब महिला मन अपन अपन गाँव चल देथे । बहुत बढ़िया कार्यक्रम होथे । चन्द्रकला देवी ल कार्यक्रम कराय बर गाँव वाला मन बधाई देथे । चन्द्रकला देवी, चन्दा देवी थोरकुन सो जथे ।

डा. बलदेव साव अउ अनंदी सहाय सुक्ल सब कवि मन ल रेस्ट हाउस, रायगढ़ म रुकवाय रहय । चाय-नास्ता करके थोड़कन झपकी मार के सो जाते । नहा-धो के तियार हो जथे । डा. बलदेव साव कथे चलव पं. मधुकर पांडेय जी ह बैंकुठपुर म निवास करत हे देख लव, अभी तबियत भी ठीक नई हे । जादा दिन के संगवारी नो हय । दो जीम म बईठ के पंडित जी के दरसन करे बर जाते । परछी म लकड़ी के चार कुरसी अउ तखत म बईठारिन । पांडेय जी खटिया म बीमार पड़े रहय । बलदेव साव जाके जगाथे, बबा उठ न ग, जम्मो छत्तीसगढ़ के साहित्यकार अउ कवि मन देखे बर आय हे, कोन अस बाबू, पांड़े जी कथे । मय बलदेव हंव बबा । आँखी ल रमजत उठीस कहिच, बेटा बुढ़ापा म बीमारी नई छोड़त हे । कई दिन ले बुखार आवत हे । बलदेव कथे, बबा दवाई-माँदी खाय हस । बलदेव साव हदूनों हाथ ल पकड़ के उठाथे अउ कुरसी म बइठारथे ।

पंडित जी के दाढ़ी अउ सिर के बाल ह सनपटुवा जईसे सादा होगे रहय । आकर्षक व्यक्तित्व रहय । चिंतक, दार्सनिक, कवि, साहित्यकार झलकत रहय । पंडित स्यामलाल चतुर्वेदी, डा. विमल पाठक, डॉ. विनय पाठक, पवन दीवान, लक्ष्मण मस्तुरिया, रामेस्वर वैस्नव, सुरजीत नवदीप, नंदूलाल चोटिया, श्रीमती प्रभा सिंह, ममता चन्द्राकर, परेदीस राम वर्मा, सुसील यदु अउ बहुत झन कवि मनपांव छू के साहित्य के दिव्य पुरूष से आसीस लेथे । पांड़े जी सब झन ल जानत-पहचानत रहय । कहिस, बलदेव कुछ खिला पिला भई । सब साहित्यकार मन मना कर देथे । स्यामलाल चतुर्वेदी ह तबियत के बारे म पूछथे, पांड़े जी कथे नरम गरम होत रथे । सब झन से साहित्यिक चरचा करथे, प्रेरणा देथे कि जो मन म विचार आवय तेला कागज लेवव । अच्छा से अच्छा साहित्य के सिरजन करव, देश अउ छत्तीसगढ़ के नाम होवय । मोर आसीरवाद हे फलव, फूलव, हरियावव । साहित्य के गंगा म सब झन डुबकी लगा के तरगे रहय । गदगद मन से सबे साहित्यकार मन बिदा लेके अपन अपन घर, गाड़ी से रायगढ़ से चल देथे । कवि सम्मेलन के याद करके आनंदित होत अपन घर चल देथे । छायावाद के प्रवर्तक मुकुटधर पांडेय जी के आशीष के बड़े कई साहित्यकार बन गे हे । रायगढ़ ल पंडित मुकुटधर पांडेय अउ राजा चक्रधर सिंह के नाम से जाने जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह अपन विधानसबा क्षेत्र म दौरा, तीन-चार दिन करीस । घर म जाके महिला मन ल धन्यवाद देईस । महिला बैंक से जरूतमंद ल ग्रामीण उद्योग, कुटीर उद्योग, परम्परागत धंधे, रोजगार बर स्वीकृत कराईस । सरिया, रायगढ़ क्षेत्र म कोई महिला बेरोजगार नई रहय । खेती किसानी के बाद घर म कढ़ाई-बुनाई, सिलाई करय । महिला मंडल के माध्यम से उत्पादित माल ल बड़े सहर म बेचे ले जावय । गाँव गाँव म रेडीमेड कपड़ा बनावय । पेटीकोट, लूगरा, पोलखर के फाल, टी शर्ट, जांघिया, लईका मन के कपड़ा भारी मात्र में बेचे बर सहर भेजे ल लेगय । एखर म महिला मन के अतिरिक्त आमदनी होय लगिस । पिसी हल्दी, मिर्चा, मसाला, पापड़, बरी, आचार, सेव नमकीन, सूती कपड़ा लूंगी, चादर पूरा देश भर म जाए ल लगिस । महिला समृद्धि में सराहनीय कार्य होवत रहीस । ग्रामीण अर्थबेवस्था म महिला मन के भागीदारी सुनिश्चित होये ल गाँव के पलायन के समस्या दूर होगे रहय । काबर खेती-किसानी के बाद हर हाथ ल काम मिले ल लगीस ।

चन्द्रकला देवी महानदी से सिंचाई हेतु उद्वहन सिंचाई योजना चारू करवाईस । सरिया बरमकेला म गरमी म धान, मूंगफली, मूंग, उड़द के खेती करे बर सलाह देवाईस । भूमि वैज्ञानिक मन ल ले जाके मिट्टी परीक्षण करवाईस । गरमी म खेती के सलाह भी दिलवाईस । किसान मन गरमी म धान लगाईस । भरपूर फसल होइस । चारों डहार गरमी म हरा भरा रहय । मूंगफली, मूंग, उड़द के फसल भी अच्छा रहय । गन्न के खेती घलो लगवाईस । सरिय अउ बरमकेला क्षेत्र ह, पंजाब अउ हरियाणा के समान फसल उपजावत हे । गाँव के पलायन के समस्या ह दूर हो जथे । आस-पास गाँव के मन ल गरमी भर रोजगार अउ रोजा-मजूरी मिले लगथें । चारों डाहर खुसाली छा जथे ।

चन्द्रकला देवी सरिया से रायगढ़ आ जथे । पुस्पा देवी अउ रमौतीन दाई ह बाट जोहत रहय, कि मोर बेटी ह कब आहि । चन्द्रकला देवी ह गौसाला म जाके गोवंस के पूजा करथे । चन्द्रकला देवी ह बछिया, गाय मन के पाँव पखार के पूजा करथे । गले मिलके रो डारथे । बीते दिन के याद आ जथे, ये ही गाय के दूध पी के जियत रेहेन । मोर पूरा परिवार ह पलत रहय । ये गोसाला म काम नई करत रहतीन त हमन जाने कहा कलकत्ता, इलाहाबाद के गंदी बस्ती म सड़त रहितेन । चन्द्रकला कथे माता हो, तुमन के बहुत उपकार हे । मय जितय भर नई भूल संकव । रमौतीन दाई देख के रो डारथे । चन्द्रकला ह चुप कराथे । बेटी चुप हो जा, चन्द्रकला कथे, दाई कईसे भूल जावंव । एकर करजा तो चढ़े हवाय । रमौतीन कथे बेटी हमन तो सेवा करत हन । सेवा नई करतेन त कब के गाय मन मर जातीन । चन्द्रकला देवी ह फेर पाँव छू के घर आ जथे ।

रमौतीन दाई कते, बेटी काबर जी छोटे करत हस बने तो पाले पोसे हन । ओतके बेर पुस्पा दाई आ जथे । बेटी ल गुमसुम देख के कईथे, का होगे चन्द्रकला । कुछ नोहे दाई, बीते दिन के याद आ गिस । रमौतीन कथे, दीदी तै बने पढ़ा लिखा के नौकरी लगा देय हस । नौकरी छोड़े के विधायक, मंत्री बन गे हे तभो ले हदरत हे । पुस्पा कईथे, बेटी झर हदर जऊन किस्मत म रथे तउन होही । कर म के लेख ल कोई काट नई सकय । पुस्पा ह चन्द्रकला के माथा म हाथ फेर के केस ल सुलहाथे । चन्द्रकला कते, दाई थोरकन आँसू बहाय ले मन हलका हो जाथे । नारी मन के आँसू ह शस्त्र हे । बड़े बड़े ल काबू म ला देथे । कोई चिन्ता, फिकर के बात नई हे । पुस्पा कईथे, बेटी बड़े बड़े कलेक्टर, कमिसनर, एस. पी. साहब मन से लूट अउ नमस्कार करत हे, कम बड़े बात हे । आज काला नमस्ते करथे । बड़ इज्जत, सत्कार होत हे । पूरा मध्यप्रदेश म उत्कृष्ट कार्य करे हस, ओकर सम्मान तोला मिलिस । भविष्य म अच्छा बने काम करबे त तोर नांव होही । दूनो दाई मन सीख देत रहय । बहुत समझाईन ।

चन्द्रकला कथे, देना दाई भात, अब्बड़ भूख लगत हे । ओही मेरन बईठे खाना, भरपेट खाईस । दाई के रांधे भोजन के बड़ सुवाद रहय । भोजना के बाद चार-दस झन आदमी मन से मिल के सो जाथे । सार्वजनिक जीवन में सुख के साथ दुःख घलो हे । सरिया सम्मान समारोह म महिला मन के अत्तेक भीड़ ल देख के पुरूष समाज सोचे लागिन, यदि अईसन भीड़ सब्बो विधानसभा म हो जाही त पुरूष समाज कहा जाही । नारी मन जाग गे रहय । ओकर स्वाभिमान ह जाग गे रहय । ओकरे कारण महिला मन सासन अउ समाज म समान अधिकार मानय । सरिया, सारंगढ़ क्षेत्र के प्रभाव उड़ीसा, बिहार, बंगाल अउ आंध्रप्रदेश में घलो पड़े लग गिस । सबो राज्य म महिला उत्थान के योजना चलत रहय । नारी उत्पीड़न, बलातसंग, दहेज, छेड़छाड़, मारपीट सब बंद होगे रहय । यदि काकरो संग घटना होतिस त सब झन जुरिया जाय अउ विरोध करय अउ जेल भिजवा देवय । गाँव गाँव म महिला मन शराब, जुआ बंद करा दीन । गाँव गाँव साफ सुधरा, स्वच्छ, सांत वातावरण होत रहय । गाँव म कोई छोट-मोट लड़ाई झगड़ा होवय त आपस म पंचायत ह निरनय कर देवय । राम राज्य के संकल्प सरिया क्षेत्र म पूरा होत रहिस । गाँव के चौपाल म सब निरनय हो जावय ।

महात्मा गांधी जी के ग्राम सुराज के सपना ल सरिया म पूरा होत हे । सबे झन राम राज्य के संकल्पना के अनुसार काम पंच-परमेश्वर मन करत रहय । ग्राम पंचायत के सरपंच महिला रहय । महिला पंच मन के सरपंच जादा रहे । सब चुनाव जीत के आ गिन । सासन म भागीदारी निभावत रहिन । चन्द्रकला देवी के मार्गदरसन म गाँव के उत्तरोत्तर विकास होत रहिस । ग्रामीण कुटीर उद्योग, परम्परागत धंधा सब झन करे लगिन । हर हाथ ल गाँव म काम मिले रहिस । कोई भूख म नई मरय, सबके कोठी म धान भरे रहय । उपर से रोजी मंजरी अलग मिल जावय । पलायन के समस्या दूर होत रहय । नई तो पलायन करके गाँव के गाँव आदमी मन बाल-बच्चा, डौकी-लइका सहित कलकत्ता, इलाहबाद के ईंटभट्ठा म बंधुवा मजदूर बनके जात रहय । पूरा गाँव खाली हो जावव । मात्र घर रखवार डोकरी-डोकरा मन रहय । झार-झार कमाय खाय ल चल देवय । जहाँ बहु बेटी के इज्जत के संग मान सम्मान घलो गंवा के आवय । मारपीट तो आम बात रहय । छत्तीसगढ़ के मजदूर मन के बहुत शोसन होवय । चन्द्रकला देवी ह कई परिवार बंधुवा मजदूर बने रहय, ओला छोड़ा के लाय हे । ओकर रोजी मंजूरी के बेवस्था घलो कराईस चन्द्रकला ल देवी जईसे पूजय ।

कलेक्टर रायगढ़ ल मुख्यमंत्री निर्देश देथे कि चन्द्रकला देवी, मंत्री ह रायगढ़ म हे । ओला सूचना दे दे कि माननीय मदर टेरेसा ह कलकत्ता से मेल द्वारा बम्बई जात हे ओकर सुवागत, सतकार सासन के ओर से चन्द्रकला देवी करही । कलेक्टर साहब ह चन्द्रकला देवी ल सूचित करथे कि मदर टेरेसा कल सुबह पाँच बजे बाम्बे हावड़ा मेल से रायगढ़ के पार होही । राजकीय सत्कार के साथ सुवागत करना हे । चन्द्रकला देवी ह अपन सौभाग्य समझथे कि अत्तेक बड़ महान समाज सेवी के दर्शन करहूँ अउ आसीरबाद लेहूँ । कलेक्टर ल सब बेवस्था करे के निर्देश दे देथे । रात म जल्दी भोजन करके सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी जल्दी से तियार होके रेल्वे स्टेसन पहुँच जाथे । कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एस. डी. एम., तहसीलदार, थानेदार, नायब तहसीलदार फूल-माला, चाय-नास्ता के बेवस्था करके प्लेट फार्म नं. दो म रहय । चन्द्रकला देवी स्टेसन मास्टर के कक्ष म बईठ के इंतजार करत रह । मदर टेरेसा के जगह-जगह सुवागत के कारण ट्रेन आधा घंटा लेट चलत रहय । थानेदार ह पाँच मिनट ट्रेन रोके बर कहीस । कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सब झन बईठ के इंतजार करत रहिन । ट्रेन आय के सूचना मिलथे, चन्द्रकला देवी सरग नसेनी से पटरी पार कर प्लेटफार्म नं. दो म जाते । हावड़ा मेल धड़धड़ावत स्टेसन म रूक जथे । ए. सी. कोच म मदर टेरेसा नीचे उतरथे । चन्द्रकला देवी पुस्पमाला से सुवागत करथे, पाँव छू के परनाम करथे । मदर ह माथा ल चूम लेथे, हाल-चाल पूछथे । कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक अऊ नागरिक मन पुस्पाहार के सुवागत करथे । चाय-नास्ता गाड़ी म रख देथे । मदर ह सलाह देथे कि देवी जी, रायगढ़ म अनाथ आश्रम, सिसु निकेतन, कुष्ठ आश्रम खोलिये । चन्द्रकला देवी सासन की ओर से भूमि अऊ सहयोग के आस्वासन देथे । मदर आसीरबाद देथे । समाज सेवा, गरीब, दीन-दुखियों की सेवा करो । ट्रेन सीटी बजाथे, मदर हाथ हलावत रायगढ़ से बिदा लेथे । चन्द्रकला देवी मदर के इच्छानुसार समाज सेवा म लग जथे । रेल्वे स्टेसन से चन्द्रकला देवी प्रसन्नचित घर आ जे । कलेक्टर ल आवश्यक कार्यवाही के निर्देस भी दे देथे ।

चन्द्रकला देवी मदर टेरेसा से बहुत प्रभावित होथे अउ आजीवन दीन-दुखियों, गरीब, अनाथ, सिसु, महिला, गर्भवती माता, बूढ़ों, कोढ़ी, कलाकार, संगीतकार साहित्यकार के सेवा करे लगथे । रायगढ़ म कुष्ठ आश्रम, शिशु निकेतन, मिसन अस्पताल, नेत्र चिकित्सालय निरमान करवाय बर कलेक्टर अउ समाज सेवी मन के बैठक आयोजित करके सासन के हर संभव मदद के आस्वासन देथे । चन्द्रकला देवी बिलासपुर, रायपुर, राजनांदगाँव, दुर्ग, मुगेली, जबलपुर, भोपाल, ग्वालियर, इन्दौर, उज्जैन, सतना, रींवा, सहडोल, मंडला, छिंदवाड़ा म खोले के आदेश अउ बजट भी समाज सेवा विभाग से उपलब्ध करा देथे । चन्द्रकला देवी म मदर टेरेसा के गुण आय लगथे । मदर मानवता के प्रतिमूर्ति हे, साक्षात देवी माँ बन के समाज सेवा करत हे । जे शिशु के माँ नई हे छोड़ दे हे , ओकर माँ बन के हजारों-लाखों सिसु के माँ बन के पालत-पोसित रहीस । मदर टेरेसा होली मदर, सबके माँ, बहन, देवी रहीस ।

चन्द्रकला देवी संकल्प ले लेथे कि भविष्य म दीन, हीन के सेवा करहूँ । भोपाल बँगला म हमेसा भीड़ लगे रहय । चन्दा देवी ह हरदम साथ म रहय । चन्दा देवी के लईका मन भोपाल म पढ़त-पढ़त होशियार होगे रहय । छत्तीसगढ़ ल भुला गे रहय । कक्षा आठवीं अऊ दसवीं परीक्षा पास कर डारे रहय । चन्द्रकला देवी ल बड़ी माँ कहिके पुकारय,, चन्द्रकला देवी के सीना ह चौड़ा हो जावय । भोपाल म लगभग पाँच बछर बीतत रहय । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी चुनाव के तियारी करत रहय ।

भोपाल के आबो-हवा से चन्दा ह अउ लाल हो गे रहय । वईसे भी पहिली से गोरी-नारी सुन्दर रहीस, पर भोपाल म रहसी खाप-पान से भोपाली बन गे रहीस । लूगरा के जगा म सलवार सूट पहिनस रहीस । पाँच साल के एकदम बदलाव आगे रहय । समारू ह किसान से साहब जईसे सूट-बूट म रहय । एकदम जीवन म परिवर्तन आगे रहय । फर्राटा से स्कूटर, स्कूटी, सायकल चलावत रहय । बढ़िया सुखी जीवन जीयत रहय । मौज-मस्ती से कईसे पाँच बरिस कट गे पता नई चलिस । डॉ. प्रेमलता ह तीन लईका के माँ बन गे रहय । चन्द्रप्रकास हे भोपाल घुमाय बर ले जाथे । चन्द्रकला देवी मंत्री तो दौरा म रायगढ़ चल दे रहय । चन्दा देवी के घर म रूके रहय । तीनों बच्चा मन मस्त खेल-कूद, धूम-धड़ाका मचाय रहय । भूरी अउ कुसुवा भी लईका मन संग खेलय-कूदय । घर किलकारी स गुंज गे । चन्द्रप्रकास फोन से रायगढ़, चन्द्रकला देवी अउ पुस्पा माँ से पात करीस । सब ठीक हे कहिके बताइस । चन्द्रकला देवी कईथे, चन्द्रप्रकास कईसे भोपाल म हस । चन्द्रप्रकास कईथे, दीदी बहुत दिन से प्रेमलता ह बोलत रहीस चल ना भोपाल दिखा दे । प्रमोसन डिप्टी कलेक्टर म कब होही पता लगा लेबे । चन्दा दीदी के घर ठहरे हन । बढ़िया मान सम्मान मिलत हे, सगा बहिनी से जादा मानत हे । चन्द्रकला कईथे, भाई मय तो अभी नई आय सकंव फेर बाद म भोपाल म आहूँ त देखहूँ । प्रेमलता भी फोन से बात करके परणाम परथे । चन्दा देवी भी बात करथे, सब कुछ बने-बने हाल-चाल बताथे ।

चन्दा देवी ह डॉ. प्रेमलता ल भोपाल के बड़े तालाब, जामा मस्जिद, कमला गार्डन, बैरागढ़, अरेरा कॉलोनी, भोजपुर के मंदिर, सिवलिंग, भीम बैठका, केरवा डेम अउ अन्य जगा उदयपुर की गुफाएँ, सैल चित्र, बौद्ध विहार सब ला घुमाथे । मौज-मस्ती से एक हप्ता कट जथे । न्यू मार्केट के सिनेमा हॉल म मुगले-ए-आजम अउ नीलकमल पिक्चर देखथे । प्रेमलता ल भोपाल सहर भा जथे । चन्द्रप्रकास के छुट्टी खतम होत रहीस । चन्दा देवी बढ़िया खाना बना के खिलावय । प्रेमलता भी खाना बनाय लगय, दूनों बहिनी मिल के लेवय । चन्द्रप्रकास अपन पदोन्नति के पता लगाय, वल्लभ भवन सचिवालय गईस साथ म चन्दा देवी विधायकी भी गईस । सामान्य प्रसासन विभाग म पता लगाईस अवर सचिव से पता चलथे कि विभागिय पदोन्नति समिति अगले महीने होने वाला हे । चन्दा देवी कथे कि जरा देख लीजियेगा । सचिवालय घूम के घर आ जाथे ।

चन्दा देवी घर म जाके बताथे, अगले माह डी. सी. पी. होवईया हे जल्दी प्रमोसन हो जाही । प्रेमलता कथे, दीदी जब हो जाय तब मानबो । कई महीना से सुनत हंव, आदेस निकलईया हे । चन्दा देवी कथे, बहिनी सरकारी काम में समय लगथे । चन्दा मजाक म कथे । तोर एक ठन लईका अउ हो जाहय । प्रेमलता लजा जाथे । चन्दा कथे, काबर सरमावत हस ओ । प्रेमलता कथे, दीदी का बतावंव । चन्द्रप्रकास के उमर जादा होगे, मय जवान हंव । प्रेमलता कथे, तभी दीदी ललियाय हस । मस्त गोरियाय हस दीदी । तभे तो तोर जीदी ह मोहाय हे । चन्दा कथे, तैं तो डॉक्टर हस बने दवाई, केप्सूल नई खवाते । प्रेमलता कथे, केप्सूल खवाथंव, तभे तो चलत हे । नई तो डोकरा हो गे हे । कत्तेक जोर मारही । डाक्टर हंव तो चलत हे । चंदा कथे, मन में संतोस होना चाही । काम वासना से घर टूट जाथे । विस्वास टूट जाथे, विस्वास ल बनाय रखना हे ।

चन्द्रप्रकास अउ समारू बच्चा मन ला न्यू मार्केट से घुमा के आ जाथे । बच्चे मन धूम-धड़ाका करे लगथे । प्रेमलता ह चहक के के भांटो, समारू के पास बईठ जाथे । प्रेमलता कथे, कालि घर जाबो कहत रहेन । समारू कथे, दू-चार दिन अउ रहि जावव । बने लगात हे घर ह । बच्चा मन हिल-मिल गे हे । चन्द्रप्रकास कथे, मोर छुट्टी खतम होगे हे । चन्दा कथे, ठीक हे कल रिजर्वेसन करा लेवव । चन्दा देवी विधानसभा से छत्तीसगढ़ में रिजर्वेसन करा के ले आथे । चन्दा देवी ह जुमेराती बाजार म कपड़ा, सामान खरीद के ले आथे । प्रेमलता भी सात म जाय रथे । तीन घंटा धूम के मार्केटिंग करथे, सबे समान खरीदते । दो सूटकेशसभर गे रहय । शाम के सात बजे छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से चन्द्रप्रकास अउ प्रेमलता भोपाल से दुर्ग आ जथे ।

क्रमशः

by-www.srijangatha.com


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