छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Tuesday, June 27, 2006

भाग- चौदह

चन्द्रकला देवी रायगढ़ ले जबलपुर दौरा म जाथे । बिलासपुर, इन्दौर नर्मदा एक्सप्रेस ह रात दस बजे जबलपुर पहुँचथे । प्रोटोकॉल से एस. डी. एम. श्री राज कुमार टंडन रेल्वे स्टेसन आय रहय । सुनील अउ पूरनिमा, चार बच्चा धर के आय रहय । चन्द्रकला देवी ह प्लेटफार्म म उतरथे । गनमेन ह सूटकेस, समान ल उतारथे । पूरनिमा ह पाँव छूके परणाम करथे । बारी-बारी से बड़ी माँ के चरण छूके परणाम, बच्चा मन करथे । छोटी गुड़िया रानी ल चन्द्रकला देवी ह गोदी म उटा के पियार करथे । चारों बच्चा मन ल चुमा लेथे । गनमेन अउ एस. डी. एम. ह कार म सूटकेस रखथे । एस. डी. एम. कते, मैडम सर्किट हाउस म रूम नम्बर चार रिजर्व हे, आप सीधे सर्किट हाउस जायेंगे या अपनी बहिनी के घर । मैडम कथे कि मय अपन बहिनी घर रांची जाहूँ । गनमेन अउ स्टॉफ बर कमरा के बेवस्था करा दे ।

चन्द्रकला देवी, पूरनिमा, सुनील, बच्चा मन कार म बईठ के मदन महल के टेलीफोन कॉलोनी म आ जाथे । लालबत्ती के कार देख के लईका मन इकट्ठा हो जते । कॉलोनी भर के निवासी-रहवारी मन आ जथे । पूरनिमा ह एक कमरा ल साफ-सुधरा, चादर बिछा के पलंग म रखे रहय । दू ठन कुरसी घलो रखे रहय । सुनील सुटकेस अउ पेटी मन ला कमरा म रखीस । चन्द्रकला देवी हाथ मुँह धोके फ्रेस होगे । पूरनिमा चूल्हा-चौंकी म दाल, सब्जी गरम करे लगे गे । चन्दा देवी ह गनमेन अउ पी. ए. ल रेस्ट हाउस चले जाय बर कहिते । सुनील चाय, पानी पिला के भेज देथे । कॉलोनी वासी महिला, पुरूष मन भेंट करके चल दीन । चन्द्रकला देवी लईका मन के नाम पूछथे । बड़े लड़की अपन नांव कीर्ति सांडिल्य ओकर बाद के हा वंदना, ओकर के छोटे लड़का ह सूरज सांडिल्य अउ सबसे छोटी ह तोतलावत कथे मोर नाव बड़ी माँ रोमा सांडिल्य अउ मोर माँ के नाव पूरनिमा अउ मोर ददा के नाव सुनील हे । मोर नानी के नाव रमौतीन, मोर दादी के नाव चन्द्रिका देवी, मोर बड़े दाई के नाव चन्द्रकला देवी हे, ओह भोपाल म मंतरी हे । कीर्ति कते तय ओला पहिचानथस रे । रोमा लजा के गोदी म बईठ जाथे । चन्द्रकला देवी ह बच्चा मन संग हंसे खेले लगथे ।

पूरनिमा ह डाईनिंग टेबल म खाना लगा देथे ।खात पियत ले रात के ग्यारह बज गईस । चन्द्रकला कथे, लईका मन नई सोवत हे । पूरनिमा कथे, दीदी बहुत सैतान हे, सब काहत हे बड़ी मैँ के पास सुतबो, आज जागत हे । दूसर दिन सो जात रहीन चलो रात होगे हे, सुतबो ।

पूरनिमा कथे । आज भी बड़ सुन्दर लगत हस । भोपाल म मंत्री बने के बाद म सुन्दरता बढ़ गे । एकदम अंगरेजन अउ कस्मीरी मोहला जईसे दिखत हस । चन्द्रकला कथे भईगे बहिनी आज अतके मालिश कर, काल के ल बचा दे । तहूँ थक गे होबे । सब लईका मन सो गे रहय, पूरनिमा दरवाजा ओधा के अपन कमरा म आके सोय लगथे । नींद नई पड़य, सुनील कईथे का सोंचत हस । पूरनिमा कथे, दीदी ह जीवन ल अईसे काट दीस । ओला पति सुख नई मिलिस । सुनील समझाईस सब के किस्मत एक जईसे नई रहय । तीव्र इच्छा सक्ति खत्म होये के बाद ओला नींद आईस । सुनील भी हट्टा-कट्टा, तंदरूस्त जवान रहय । पूरनिमा भी संतुष्ट रहये । मस्ती म झूमय, हांसत-खेलत चार बच्चा जनमा डारिस, पता नई लगिस ।

चन्द्रकला देवी ल बढ़िया नींद आ जथे । मस्त छुर छिंदहा सोय रहय । बिहनहा सात बजे सो के उठीस । बाथरूम म फ्रेस हो के निकलथे, पूरनिमा ह चाय बना के ले आथे । समाचार पत्र पढ़त-पढ़त चाय पीथे, समाचार पढ़त-पढ़त चाय खतम करथे । सुनील आफिस जाय बर स्नान ध्यान करे लगथे । चन्द्रकला देवी के गनमेन अउ पी. ए. आ जथे । चन्द्रकला देवी विभागीय अधिकारी मन के बैठक बारह बजे से बुलाय रहय । चन्द्रकला देवी ह स्नान करे बर बाथरूम म चले जथे । सेम्पू से बाल धोके निकलथे, बाल ल टॉवेल म लपेटे रहय । बाथरूम से बाहर केस ल टॉवेल म फटकारिस । बढ़िया काला, घना केस रहय । सेम्पू लगाय म चमकत रहय । पूरनिमा भी जल्दी नहा के आ जाथे । दूनों बहिनी अउ लईका मन बईठ के भोजन करथे । चन्द्रकला देवी बारह बजे मीटिंग लेय बर कलेक्टर कार्यालय पहुँच जथे ।

मंत्री जी के सुवागत, कलेक्टर मदर मोहन उपाध्याय करथे । जबलपुर जिला म महिला बाल विकास अउ समाज सेवा विभाग के प्रभारी ठीक नई रहय । चन्द्रकला देवी, मंत्री ह कलेक्टर अउ अधिकारी मन ल खूब फटकारिस, खूब खरी-खोटी सुनाईस । एक महीना के भीतर प्रगति लाय के चेतावनी भी देईस । मीटिंग समाप्त होय के बाद सर्किट हाउस म पत्रकार वार्ता भी होईस दूसर दिन के सबी अखबार म फोटो सहित छपे रहय – “समाज सेवी मंत्री अधिकारियों पर भड़की” । सब्बो जगह एक ही चर्चा, चन्द्रकला देवी, मंत्री जी के वाहवाही होगिस । चन्द्रकला देवी, पूरनिमा के लईका मन के भेड़ाघाट, बंदरकूदनी, घुमांधर, चौसठ जोमनी, मदन महल पूरनिमा संग धूमाथे । चन्द्रकला देवी ल अपन परिवार के संग रहय म विशेष आनंद मिलय । पूरनिमा कथे, दीदी-दू चार दिन अउ रह जाते । चन्द्रकला कथे, बहिनी चुनाव नजदीक आवत हे, सरकार तियारी म लगे गे हे । महूं ह जबलपुर से सतना,रीवा, सहडोल, सरगुजा होके रायगढ़ पहुँचहूँ । पूरनिमा कथे, दीदी दूनों माता मन बने हे । चन्द्रकला कथे, बहिनी नब्बे बछर से सौ बछर के हो गे हे, हमन ले स्वस्थ हे । आंखी ह बटबट ल दिखत हे, मुँह के छत्तीसी भी चमकत हे । बढ़िया रेंगत, बोलत हे । सब अपन-अपन काम करत हावय । पूरनिमा कथे एक बात पूछत हंव दीदी, पूस्पा माँ ह बाबू जी ल देखत-देखत उमर ल काट दीस । का राज हे मोला बता, मोला संका लागथे .

चन्द्रकला कईथे, बहिनी पुस्पा माँ के रायगढ़ म कोनो नई रहीन । चालीस साल तक बच्चा नई होईस त पांड़े बाबू जी ह छोड़ दे रहीस । पुस्पा माँ ह भरी जवानी, आसरा म काट दीस । कामदेव बाबूजी ह दवाई, बईगा-गुनिया, झाड़-फूँक, अघोर साधू के आसीरबाद देवाईस । पुस्पा माँ के नारीत्व ह जाग गे, बच्चा जन्माय के शक्ति आ गे । पुस्पा माँ गर्भवती हो जाथे । चन्द्रप्रकास के जनम मोर ले पहिली हो जाथे, मय एक महीना के बाद म होय हंव । पुस्पा माँ के दूध नई आवय अउ नगर पालिका के स्कूल म पढ़ाय बर जावय । घर म लईका देखईया कोनो नई रहय, त चन्द्रप्रकास ल रमौतीन दाई अउ ददा ह पाले पोसे हे । रमौतीन दाई ह क स्तन के दूध ल चन्द्रबान ल पियावय अउ एक ल मोला । दूनों के पेट भर जावय । चन्द्रप्रकास ल जरूर जन्माय हे, फेर दूध तो दाई के पीये हे । अपन लईका से जादा पियार करत रहय पुस्पा माँ ह । घर के पूरा खरचा चलावत रहय फेर एक औरत ल मरद के सुरक्षा चाही त राम बाबू जी ह ओला पूरा करे हे । रायगढ़ के मन जानथे के चन्द्रप्रकास रामदेव के बेटा आय । खुल्लम खुल्ला बोलथे, पर पुस्पा माँ ह कईथे, चन्द्रप्रकास ह बलराम के अंस ऐ ।

चन्द्रकला कईथे, बहिनी ऐ प्रश्न काबर पूछे तंय हा । पूरनिमा कईथे, रायगढ़ म सब झन अईसे कहय त आज हिम्मत करके संका के निवारण करे हंव । अब सब सम्पत्ति के मालिक तो चन्द्रसेन होगे हे । चन्द्रप्रकास तो अपन नौकरी से फुरसत नई ऐ । चल आज रायगढ़ म फार्म हाउस, मकान दूमंजिला हावय । खाय-पीये के कोई कमी नई हे । पुस्पा दाई के उमर भी जादा होगे कतका दिन के मेहमान हे । मोर ऊपर ओकर मया के छत हावय । ओकर आँचल के छाँव म बहुत ठीक, सांति लगथे मय ओकर करजा ल छूट नई सकंव । एक बामन परिवार ह यादव परिवार के टूरी ल गोदी लेके पाले-पोसे, पढ़ाय-लिखाय के नौकरी लगवाय हे । चन्द्रकला के आँखी ले आँसू बहे लगथे । पूरनिमा भी रो के दुःख हल्का कर लेथे । पूरनिमा कईथे, दीदी तोला मय रोवा देंव । चन्द्रकला कईथे, बहिनी नारी मन अपन दुःख ल आँसू बहा के हल्का कर लेथे । मोला हल्का लगीस, बहुत दिन होगे रहीस इकट्ठा होगे रहीस । अच्छा होईस, बहा दे तंय ह । ऐकरे नाव तो जीवन हे । सुख, दुःख, हांशी, खुसी जीवन, मरण हे ।

मालूरमाम जी पचासी से नब्बे बछर के जवान हे । पूरा जिनगी भर मोर काम आये हे । मोला विधायक अउ मंत्री बनाय म ओकर जादा हाथ हे । मरे के बेर म मय संग नई छोड़व । मय मंदिर म भगवान ल साक्षी मान के पति-पत्नी बने हन । ऐला समाज स्वीकार करय, चाहे सब स्वीकार करय । मय तो अपन पति मान ले हंव । राम म सो जथे ।

पूरनिमा भी थक गे हरय, पति संग मस्ती करके सो जाथे । सुबह उठके चाय नाश्ता पूरनिमा तियार कर देथे । चन्द्रकला देवी ह जल्दी स्नान, पूजा करके तियार हो जाथे । चाय-नास्ता संग म करथे । गनमेन अउ पी. ए. रेस्ट हाउस से आ जथे । सुनील ह चाय नास्ता कराथे । प्रोटोकॉल से कार सतना जाय बर आ जाथे । चन्द्रकला देवी जबलपुर से सतना कार द्वारा प्रस्थान करथे । सतना जिला के मैहर म माता सारदा देवी जी के दर्सन, पूजा पाठ करथे । दो घंटा ल मैहर म रूक के सतना बर चल पड़थे । सतना के सर्किट हाउस म कमरा आरक्षित रहय । मंत्री जी गार्ड आफ आनर, सेल्यूट ले के सर्किट हाउस के कमरा क्रमांक दो म गईस । प्रोटोकॉल से एस. डी. एम. सुवागत करे बर आय रहय । मंत्री जी हा फ्रेश हो के बाथरूम से निकल के सोफा सेट में आराम से बईठ जथे । आधा घंटा आराम करके पत्रकार, विभागीय अधिकारी, नेता मन से मिलथे । कलेक्टर ल सख्त निर्देस देते कि गाँव-गाँव म महिला मण्डल, महिला बैंक के स्थापना करके महिला मन ल आगे बढ़ाय म सासन की नीति के अनुसार काम करव । कलेक्टर ह सब विभागीय अधिकारी ल निर्देस जारी कर देधे । अधिकारी बैठक के बाद भोजन करके सो जथे ।

चन्द्रकला देवी, समाज सेवा कल्याण मंत्री के दौरा कार्यक्रम अनुसार सतना से रीवा के रहय । सुबह चाय-नास्ता करके कार द्वारा रीवा के लिए प्रस्थान करथे । रीवा के सर्किट हाउस म रूप आरक्षण, प्रोटोकॉल आफिस से होगे रहय । दोपहर के समय रीवा सर्किट हाउस पहुँचथे । गार्ड आफ आनर लेथे । मंत्री जी बैठक कक्ष जाथे । कलेक्टर, कमिस्नर, पुलिस अधीक्षक, संयुक्त संचालक, समाज सेवा कल्याण, महिला अधिकारी, अउ नेता, कर्मचारी मन के भीड़ लगे रहय । सब से मिलिस, बात सुनिस । अधिकारी मन ल निर्देश भी देईस, चाय सब के साथ पीईस । रूम म जाके हाथ, पाँव धो के फ्रेस होईस । कलेक्टर ह भोजन करे बर निवेदन करथे । चन्द्रकला देवी दोपहर भोजन के बाद थोड़ा विसराम, आराम करीस । थके, माँदे रहय, नींद पड़ जथे ।

अधिकारी मन के बैठक साम चार बजे से बुलाय रहय । कलेक्टर, कमिस्नर, संयुक्त संचालक, जिला अधिकारी अउ महिला मंडल के पदाधिकारी, महिला नेता मन आ गे रहय । मंत्री जी ह महिला ससक्तिकरण के काम के प्रगति बर नाराजगी व्यक्त करीस अउ सख्त निर्देस घलो देईस, के महिला बैंक, महिला सहायता समूह, महिला मंडल के गठन, गाँव-गाँव म होना चाहिये । कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देस भी दिये । मीटिंग के बाद पत्रकार वार्ता भी होईच । चन्द्रकला देवी ह मीटिंग के बाद महल अउ लक्ष्मण बाग म हनुमान मंदिर देखे बर गईस । मंदिर म पूजा अर्चना भी करीस । राम जानकी मंदिर म भी पूजा करीस । रीवा के ऐतिहासिक महत्व के स्थान भी देखिस । रात दस बजे भोजन करके सो जाथे । गनमेन, पी. ए. मन बगल के रूम म सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार रीवा के कार द्वारा सीधी से सरगुजा आ जथे । सर्किट हाउस सरगुजा म रात रुकथे । प्रोटोकॉल से कार भी मिल जथे । सर्किट हाउस म विभागीय अधिकारी, कलेक्टर के बैठक बुलवा लेथे । विभाग के प्रगत के समीक्षा करथे । रात्रि विसराम, सर्किट हाउस म करथे । सुबह चाय-नास्ता करके सरगुजा से रायगढ़ बर प्रस्थान करथे । कार ह सीतापुर के आगे जाय रहीस, टायर ह पंचर होगे । चन्द्रकला देवी कार से उतर के महुंवा पेड़ के छांव म खड़ा होईस । दिन के बारा बजे रहय । बने घाम करे रहय, घास म चन्द्रकला देवी के मुंह ललिया गय रहय । पसीना ह चुचवात रहीस । रूमाल से पसीना पोछिस । रूख के छांव ह जुड़-जड़ लागत रहय । सीतल मंद पवन चले लगिस । चन्द्रकला देवी के पसीना ह सुखिस, दूर से हरियर-हरियर जंगल, पहाड़ दिखत रहय । मेनपाट जाय के सड़क ओही मेरा रहय । मेनपाट म तिब्बती मन ह बसे हे, चन्द्रकला देवी सोंचथे । कार के पंचर टायर ल ड्राइवर अउ गनमेन ह दूसर टायर बलद के लगा देथे । पन्दरा बीस मिनट लगीस । चन्द्रकला देवी ह ड्राईवर से पूछते, मेनपाट ह कतका दूर हे । ड्राइवर ह कथे, मेडम ईंहाँ ले बीस कि. मी. दूर हे । चलिहा त चलव, फेर रास्ता ठीक नई हे । उबड़-खाबड़ पहाड़ी सड़क हे । कार नई चल सकव । चन्द्रकला देवी महुँवा के छाँव म बईठ के दूर से पहाड़ ल देखथे ।

ड्राईवर ह टायर बदल के कार ल सड़क के किनारे खड़ा कर देथे । गनमेन ह बोतल के पानी मेडम ल देथे । गरमी म पानी अच्छा लागथे । पानी पी के पसीना पोंछत-पोंछत कार म बईठ जते । कार सीतापुर से सीधा पत्थलगाँव के रेस्ट हाउस म रूकथे । दोपहर के भोजन पत्थलगाँव म करथे । मंत्री जी से भेंट करे बर सैंकड़ों महिला, पुरूष के भीड़ लग गे । एस. डी. एम. बी. डी. ओ. ल बुला के महिला बैंक, स्व-सहायता समूह गठन, महिला मंडल के गठन बर निर्देस देथे । चन्द्रकला देवी गाँव-गाँव म शासन के नीति से महिला विकास के कार्यक्रम चलाय के निर्देस देथे । महिला मंडल ल अधिक से अधिक अनुदान देय बर कईथे, नेता अउ कार्यकर्ता से मिल के मंत्री जी रायगड़ बर कार द्वारा निकल पड़थे । कार फर्राटा भागथे, तीन घंटा म रायगढ़, गोसाला पारा के निवास म पहुँच जथे . चन्द्रकला देवी दौरा,, टूट के कारण के-मांदे उतरिस । एक हफ्ता के बाद रायगढ़ा आय रहीस । पुस्पा दाई के पाव पड़िस । रमौतीन दाई ह एक गिलास ठण्डा पानी ले के आथे । चन्द्रकला ह पाँव छू के आसीरबाद लेथे । पानी पी के थोड़ा सुस्ता के साथ-मुहँ धो के पलंग म कनिहा सीधा करथे । रात के भोजन खा के सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह सुबह मुंह-हांथ धो के, प्रेस हो के अखबार पढ़त रहिथे, चाय पीयत-पीयत नवभारत पेपर पढ़थे । चन्द्रकला से रमौतीन पूछते, बेटी पूरनिमा के लईका मन बने-बने हे । चन्द्रकला कईथे सब बने-बने हे । पूरनिमा घलो अच्छा हे ष बने सहबाईन बने हे । कॉलोनी म पूरनिमा बिना कोई काम नई होवय । बने मान-सम्मान हे । ओकर टूरी अउ टूरा मन बड़ सुघ्घर हे । बड़ हांसथे । अंगरेजन मेम होही, रमौतीन दाई हांसथे । चन्द्रकला कथे, दाई चन्द्रसेन के बिहाव कर दे । भात रंधईया एक झन होना चाही । पुस्पा भी हाँ म हाँ मिला देथे । रामदेव ल लड़की ढूंढे ल कहिथे । कामदेव कहिथे, बोल तो सतनामी समाज के लड़की मिल जाही । चन्द्रकला कथे, हमर परिवार तो समता मूलक वर्गविहीन समाज ल मानथे । अच्छा बने सुन्दर, पढ़ी-लिखी लड़की होना चाही ।

रमौतीन कथे, बेटी जो घर ल सम्हाल सकाय वईसे बहु लाहा त बनही । रामदेव ल चन्द्रकला कथे, बाबूजी सारंगड़ खरसिया, झारसुगड़ा, चन्द्रपुर, सक्ती डाहर लड़की देखव कामदेव कका ल घलो ले जावव । ऐ बछर सादी जरूर करव, नई तो भूखन मरे ल पड़ही । चन्द्रकला देवी बाथरूम म नहा-धो के तियार हो जथे । पी. ए. अउ गनमेन आ जथे । प्रोटोकॉल सेकार मंगवाथे । कलेक्टर अउ विभागीय अधिकारी से बातचीत, फोन से करथे । चन्दा देवी विधायक से भोपाल बात करथे । भोपाल के बारे म बातचीत करथे । चन्दा देवी ह चुनाव तियारी के संबंध म बताथे । भूरी अउ कुसुवा से बात भी करथे । चन्दा देवी कथे, दीदी महूँ ह दो दिन न सारंगढ़ जाहूँ कहत हंव । चुनाव लकठियागे, विधान सभा क्षेत्र म घूमे ल पड़ही । चन्द्रकला देवी कथे, पहली टिकट तो मिलय । टिकट मिलही तब चुनाव लड़बो । चन्दा देवी कथे, माननीय मुख्यमंत्री जी ह चुनाव के तियारी करे बर कहि दे हावय । सब विधायक मन भोपाल से क्षेत्र चले गे हावय । भोपाल सुन्ना-सुन्न लगात हे । चन्द्रकला देवी कथे, आज सरिया जात हंव । महुँ जनता से मिलहंव । चार साल होगे, ऐती-ओती करके पाँच साल पूरा होत हे । चन्दा देवी ह परणाम करके टेलीफोन रख देथे ।

चन्द्रकला देवी कार से रायगढ़ से चन्द्रपुर, सरिया जाथे । सरिया म अपन घर म जाके रूकथे । महिला बैंक कुले रहय । बैंक के हिसाब-किताब, देखथे । बैंक मैनेजर ल निर्देस देथे कि अगले साल चुनाव हे, जो माँगय लोन ओला तुरंत स्वीकृत करदेवव । गाँव-गाँव घर घर म महिला बैंक के कर्जदार रहय । जमुना देवी ह महिला मंडल के सदस्य मन ल लाईस । मंत्री के सुवागत करीन अउ बईठ गे, कुर्सी अउ चांवरा म । चन्द्रकला ह सबके हाल-चाल पूछते । चुनाव के तियारी बर चरचा करथे । गाँव-गाँव म मतदाता सूची म नाम जोड़वाय बर कहिस । मतदाता सूची म अपन आदमी के नाम जोड़वावव, सब महिला मन ल अपन सदस्य बनावव, वोट डाले बर बी कहव । गाँव के महिला मंडल एक दरी अउ ढोलक, मंजीरा भी देवव । मय अपन विधायक निदि से रासि स्वीकृत कर देथंव । चुनाव अब लकठियागे हे । सब झन ल घुलमिल के चुनाव जीतना हे । सक्रिय महिला ल एक लेडी सायकल भी देहव । सायकल से चुनाव प्रचार, घर-घर गाँव-गाँव, गली-खोर म करिहव ।

चन्द्रकला देवी सब महिला ल चाय-नास्ता कराथे । घर के अंगला म बईठ के चौपाल लगाय रहय । जमुना अउ सहेली मन ल लेके कई गाँव के दउरा करीस । सब गाँव म मंत्री जी के सुवागत होईस । गाँव के धूल, कीचड़ कार म लदबदा गे रहय । नाक म रूमाल लगाय रहय । फेर अब्बड़ धूल उड़य । चन्द्रकला देवी ह चुनाव लड़े बर सक्रिय होगे । सब महिला मंडल ल सक्रिय करत रहय । चन्द्रकला देवी के विरोधी मन भी तियारी म लग गे रहय । जगा-जगा म सभा, चौपाल म मिल जावय । चन्द्रकला देवी के स्थिति मजबूत रहय ।

चन्द्रकला देवी ह चार-पाँच दिन रूक के गाँव-गाँव दउरा करिस । सब मन भेंट, मुलाकात भी करिस । बने मुखिया मन ल रूपिया पईसा के मदद करीस ।

क्रमशः

by- www.srijangatha.com


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