छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Tuesday, June 27, 2006

भाग- पन्द्रह

चन्द्रकला देवी, सरिया क्षेत्र के बरमकेला के महानदी के किनारे के गाँव म दउरा म निकले रहय । रायगढ़ से सरिया फोन पुस्पा देवी चन्द्रसेन करथे । महिला बैंक के मैनेजर फोन उठाथे । मैनेजर ल बताथे, मालूराम अउ वोकर गोसाईन के चाम्पा स्टेसन के पहिनी नदी के पुलिया म एक्सीडेंट होगे हे । पति-पत्नी के मउत होगे हे । तुरंत खबर भेज दे रायगढ़ आ जावय । बड़ भारी एक्सीडेंट होय हे । करीबन सौ आदमी मर गे हे, हजार भर आदमी, बच्चा घायल होगे हे अउ महिला बैंक के मैनेजर ह सरिया से बरमकेला फोन से संदेस भिजवाथे । संदेस बहुत लेट म मिलथे । चन्द्रकला देवी के सब कुछ खतम होगे । रोवत-रोवत, आंखी सूझ गे । आँसू के धार थमत नई रहीस, जमुना देवी ह ढांढस बंधाईस । सब महिला मन चुप करावय, के चन्द्रकला देवी रोवत रहीस । सब के टप-टप आँसू चुचवावत रह । बड़ मुशिकल ले हि, तुमन कार द्वारा रायगढ़ पहुँचाईन चन्द्रकला के हाल, बेहान हो गे रहय पुस्पा माँ ल पोटार के खूब रोईस । रमौतीन दाई ह समझाईस, बेटी भगवान ले अतके दिन के संगवारी रहीस, झन दुःख कर । चन्द्रकला विधुन हो के रोवत रहीस । पुस्पा कईथे, चुप हो जा बेटी, तंय मंत्री अस । बड़े पद म हस । ठीक हे हमन जानत हन, फेर समाज ह थोड़े मानत हे । समाज के नदर म तंय रखैल हस । रखैल के कोई सामाजिक अधिकार नई रहय । ओकर घरवाला, परिवार वाला मन नई मानय । जतका दुःख मन म करना हे त कर ले । पुस्पा कथे, चल चांपा रेल्वे स्टेसन जा के देख, का हालत म लास हावय । पुस्पा दाई के बात ल मान के जाय बर तियार होगे ।

चन्द्रकला देवी ह पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर से जानकारी पूछिस । रायगढ़ सहर के पचास आदमी के मृत्यु के समाचार रहय । अउ लगभग आदमी घायल होय रहय । मालूराम अग्रवाल अउ पत्नी हा ट्रेन के डिब्बा म फंसे हे बताईस । रेल्वे के स्टेसन मास्टर से पूछताछ करिस । चन्द्रकला देवी ह पुस्पा दाई के संग चाम्पा रेल्वे स्टेसन बर कार द्वारा निकलिस । चन्द्रकला देवी ह दूनों हाथ के चूरी ल पथरा म कुचरिच, माँग के सिंदूर ल पोंछिस अउ रंगीन लूगरा के जगा सफेद लूगरा, बिलाउज पहिन के गईस, दो घंटा म चाम्पा रेल्वे स्टेसन, नदी के पुल के पास पहुँच जथे । दुर्घटना स्थान म आदमी मन के रेला लगे रहय । अपन अपन रिस्तेदार मन के पता लगावत रहय । लाईन से दू सौ लास रखे रहय । दुर्घटना ठउर के चीख-पुकार माते रहय । मातम छाए रहय । सबके आँखी म आँसू बोहात रहय । कलेक्टर, कमिस्नर, पुलिस अधीक्षक अउ बड़े अधिकारी मन आ गे रहय । रोटरी अउ लायन्स-रेडक्रास के कर्मचारी घायल मन के सेवा म लगे रहय । चीख-पुकार के वातावरण गमगीन रहय । सब कोई उत्सुकता से देखत रहय । रेल के डिब्बा ल काट-काट के लास मन ल निकालत रहय । रात होय के कारण दिक्कत होत रहय । रहि-रहि के बादर-पानी भी बरसत रहय । करिया बादर ह लउकत, घपटत रहय । जोर से बिजली कड़कत, चमकत रहीस । खराब मौसम के कारण बहुत दिक्कत होत रहीस । अहमदाबाद के लगभग पाँच डिब्बा ह एक-दूसर के ऊपर चढ़ गे रहिस । एक डिब्बा ह पुल से नीचे नदी म झूलत रहीस । नदी म झूलत डिब्बा ह अब गिरिस, तब गिरिस दिखय़ । बहुत मुस्किल से क्रेन द्वारा खींच के जमीन म लाईस । लोग सर्च लाईट, कंडील, टार्च के रोशनी म रेल डिब्बा ल देखत रहय । जे डिब्बा म मालूराम के परिवार बईठे रहीस, डिब्बा ह चिपट गे रहीस । रेल के डिब्बा ल कटर, वेल्डिंग मसीन से काट के लास ल निकाले रहीन । दो सौ लास के आखिरी म मालूराम अउ ओकर डउकी के लास रहय । के चेहरा तो बुरी तरह से चपट गे रहय । दूनों के सरीर से पहचान म आवत रहय । चन्द्रकला देवी ह फूट-फूट के रोवत रहय । कलेक्टर अउ अधिकारी मन चुप कराईन । रात के तीन बजे तक डिब्बा काट-काट के लाश निकालिन । घायल मन के बिलासपुर, कोरबा के सासकीय अस्पताल म भर्ती करके इलाज करात रहीन । पूरा देस भर म सोक मनावत रहीन ।

रेल मंत्री ह दुर्घटना के जाँच के आदेस दे देथे । टी. वी. समाचार पत्र म दूसर दिन मुख्य समाचार देत रहय । चन्द्रकला देवी ह दूसर दिन लास के पोस्ट-मार्टम कराके ट्रम म लाश ल रायगढ़ भिजवा देथे अउ संग म घलो जाथे । मालूराम अग्रवाल के घर में लास उतरवाथे । दुःखी परिवार ल धीरज धराथे । ओकर बेटा-बेटी बाप के संग चीरकार मारमार रोथे । वोकर बड़े बेटा ह साफ कहि देथे, चन्द्रकला देवी दुःख म जरूर हमर साथ म हस फेर हमन तोला माँ के दरजा नई दे सकन । चन्द्रकला देवी अउ अपमान झन होवय कहि के अपन निवास स्थान गोसाला लहुट जाथे । चन्द्रकला देवी ह आँसू के घूंट पी के रहि गइस । पुस्पा दाई ह समझाते, बेटी ओमन तोला स्वीकार नई करय, जादा दुःख मत कर । अग्रवाल जी के साथ, अतके दिन के रहीस । जादा तोला माना हे त गया, बनारस, इलाहाबाद जाके गंगा नहा ले । मुंड़ मुड़ाय के जरूरत नई हे । चन्द्रकला कथे, दाई तंय ठीक कहत हस । मय कालि गया जाय बर ट्रेन के टिकट आरक्छण करा लेथंव । गनमेन अउ पी. ए. चार टिकट रेल के आरक्छण टाटानगर, टाटानगर से डेहरी आंसन से गया करा लेथे ।

चन्द्रकला के संग पुस्पा अउ गनमेन, पी. ए. गया पहुँच जथे । गया म होटल म रूक जथे । गया घाट गंगा नदी म स्नान करके मृत आत्मा के लिए पिण्डदान माँ, बेटी सिर मुण्डवा के बाल ल गंगा नदी म प्रवाहित कर देथे । पुस्पा देवी ह स्व. बलराम पांड़े के नाम से पाँच झन पंडित, भिखारी, गरीब ल भोजन कराथे । चन्द्रकला देवी ह मालूराम अग्रवाल के नाव अंतिम क्रिया दसकरण के नाव के इक्कीस झन गरीब मन ल भर पेट पुड़ी-सब्जी, दाल-भात खवाथे । मालूराम के आत्मा के सांति के लिये पूजा पाठ भी कराथे । गंगा मईया के पवित्र पानी म स्नान करके मन के मईल घलो ल साफ कर लेथे । मन म जो भाव, प्रेम, पियार मालूराम के प्रति रहीस, ओला आँसू बहा के गंगा नदी म बहा देथे । एक हफ्ता गया म निवास करथे । भागवत, गीता, रामायण के पाठ करथे अउ सुनथे । चन्द्रकला देवी के दुःख ह हल्का होथे । गया से बैजनाथ धाम भी भगवान भोले संकर के दरसन करे चले जाथे । बैजनाथ धाम म मन ल सांति मिल जथे । पुस्पा देवी ह बहुत समझाथे । बेटी एक दिन सब ल जाय बर हे । ऐ संसार नस्वर हे । चल अब घर रायगढ़ जाबो, बैजनाथ धाम से रेल से रायगढ़ आ जथें ।

रायगढ़ म मालूराम अग्रवाल अउ पत्नी के दाह-संस्कार अउ क्रिया-कर्म निपट गे रहय । पन्दरा दिन सोक म दुकान बन्द करे रहय । घर के मुखिया के मउत के बाद घर सम्हाले बर बड़े लड़का दुकान, व्यवसाय ल शुरू करीस । फेर ओही कठिन काम करे लगीन । स्व. मालूराम अउ ओकर पत्नी के कमी रहय । चन्द्रकला देवी ह टेलीफोन से सांत्वना देईस, कहिच यदि कोई काम होही त बताहा, जरूर मय सहयोग देहंव । चन्द्रकला देवी ह मुड़ ल मुड़ाय रहय । ऐकर सेती घर से एक महीना निकले नई सकय । चन्द्रकला देवी रायगढ़ से भोपाल चल देथे । भोपाल के निवास-कार्यालय म आफिस के काम निपटाथे । माननीय मुख्यमंत्री जी से मुलाकात भी करथे । मुख्यमंत्री ह चुनाव तियार, क्षेत्र म करे बर निर्देस भी देथे ।

चन्द्रकला देवी ह निवास कार्यालय से ही मंत्रालय के काम-काज निपटावय । सिर मुंड़ाय रहय, कहीं जावय त पूछय त बतावय कि मित्र के देहावसान होगे हे । मोर साथ बचपना के जिगरी दोस्त रहीस, मोर मितवा रहीस । चन्द्रकला देवी ह विधवा जईसे सफेद लूगरा-पोलखर पहिनत रहय, माथे म चंदन के टीका लगावय । दिन तो काम-बूता म कट जावय फेर रात बइरी ह नई कटय । आँखी ले आँसू टपक जावय । काबर जब ले मिले रहीस, वोमन दू सरीर एक परान रहीन अब महकाय कोन खरे होही ? अभी तक एक खूंटा म बंध के आय हंव, ओकर रहत ले कोई आँखी उठाय के देखे नई सकत रहीन । अब मंय अधूरा हो गेंव । आँसू ह टपाटप बहे लगय । एक मन ह कहै उठो संघर्ष करो । पुरूष समाज ल बता देवय, तोर बिन जीनकी कट जाही । मन ल ढांढस बंधावय । सोंचत-सोंचत नींद कब पड़य, पता नई चलय ।

पुस्पा दाई ह सुबे ले चाय-नास्ता करके रखे रहय । चन्द्रकला ह फ्रेस हो के बईठक रूम म आ के पेपर पढ़े लगथे । चुनाव तियारी के समाचार, सबो पार्टी मन प्रमुखता से कहत रहय । चाय के चुस्की लेत चन्द्रकला कथे, दाई चुनाव के कमान कोन सम्हालही । पुस्पा कथे, बेटी चिंता झन कर कोई भगवान द देही, नई तो मय देखिहंव । तोर बाबूजी अउ कक, भाई चन्द्रसेन घलो हावय । दाई मालूराम जी ह चुनाव बर चन्दा घलो वसूल करके देवत रहीस । बेटी कोई सेठ, बैपारी मन जरूर सहजोग करही । तहूँ ह पईसा, रूपिया ल जोड़ कर रूख । चन्द्रकला देवी ह विभागीय अधिकारी मन से चन्दा वसूल करे लगथे । कई अधिकारी मन ठेकेदार से रूपिया जुगाड़ करा देथे । चुनाव ल के धन इक्ट्ठा हो जाथे ।

चन्दा देवी विधायक ह मिले बर बंगला म आथे । चन्द्रकला देवी ह गर मिलके जोर से खूब रोथे । कहिथे चन्दा बहिनी, अब मंय अनाथ होगेंव, अब मोला कोन सहारा देही । चन्दा देवी कथे, दीदी तोला सतनाम साहेब ह सहायता करही, सतनाम साहेब म विस्वास कर । मय तो ओकरे अपार म भरोसा करथंव । चन्दा देवी ह बहुत समझाथे । दीदी तंय मुड़ ल मुड़ा के ठीक नई करे हस । नर अउ नारी समान हे, का केस उतारे ले जी गे । चन्द्रकला कथे, बहिनी रीति-रिवाज, अंधविस्वास ल माने ल पड़थे । मंय एकदम टूट गे हंव, जउन दाई मन करत गीन, में करत गेंव । मय गंगा नदी म नहा के केस उतवाय रहेंव, मोला अच्छा लगीस । जीये-मरे के साथ किरिया खाये रहेंव । केस ल उतरवा देंव ता का कम होगे, कुछ दिन म केस बाढ़ जाही । चन्दा देवी कथे, दीदी तंयभले पति मानके विधवा बने हावस, फेर समाज अउ परिवार वाला मन कहाँ मानिस । अग्रवाल जी के बेटा मन साफ माता माने बर इंकार कर दीस, कोई सम्मानजनक बेवहार घलो नहीं करीस । तब तोला कोई बात बर नई पुछीन, उल्टा कोई चीज के माँग करही करिके पूछिन नई हे । चल ठीक हे जतक दीन ले तोर संगलिखे रहीस, ओतका सुख तो मिले रहीस । बहुत अच्छा आदमी रहीस । चन्दा कथे, चिंता-फिकर झन कर, सब ठीक हो जाहय । पहली भी अकेल्ला रहे, अभो अकेल्ला रहबो । ये विधवा के बाना ल छोड़, तयं पढ़े-लिखे नारी हस । आज वैज्ञानिक युग म अईसे झन कर । बढ़िया अपन जिनगी ल जी । काकरो भरोसा झन कर एक ना एक दिन सब ल जाना हे ।

चन्दा देवी ह बहुत समाझाइस । तंय समाज ल कतका समझाबे, नई मानय । तोला तो कुँवारी ही समझत रहीन, ओला मत उधार । तोप दे माटी म, सब मुंदाय जाही अउ पहिली जईसे बन-ठन के निकल । आधुनिक नारी के प्रतिनिधित्व कर अगुवा बन, कब तक पुरातन पंथी बन के जीबो । पुरूष जईसे हमू मन काम-धाम करके, हरहिंछा जीवन जीबो । तभे समाज ह चेतही । मोर कहना मान दीदी, अतका दिन ले सफेद लूगरा पहिरे रहे ठीक हे । अबतो रंगीन कोसा के लूगरा पहिर, माँ म सिंदूर झन लगा । फेर हाथ म सोना के चूरी तो पहिर सकत हस । फेर तोला जीत के मंत्री बनना हे । चन्द्रकला देवी के थोरकिन साहस बढ़िस, हिम्मत करके कथे बने कहत हस बहिनी, तुमन सतनाम आंदोलन के जुड़ के मनुवाद के विरोध करत हेव । हमन अभी घलो मनुवाद ल मानत हन, ओही हमन के बाधक हे । चन्दा देवी कथे, दीदी ओही ल त उखाड़ फेंकना चाही । अंधविस्वास, रूढ़िवाद ले जकड़े समाज ल बदलना चाही । यदि हमन पढ़े-लिखे नारी मन ऐ बेड़ी ल नई तोड़बो त कोन तोड़ही, गाँव के अनपढ़ नारी ह । चन्द्रकला देवी ल बहुत समझाईस, चन्द्रकला देवी ल नारी शक्ति से प्रेरणा मिलिस ।

चन्दा देवी ह अपन हाथ ले विधवा के बाना, सफेद लूगरा, पोलखार ल उतारिस अउ रंगीन चटक पीला छींट के लूगरा-पोलखर पहिनाईस । माथा म बिंदी, हाथ म सोना के चूरी दू ठन डालिस । कान म झुमका, नाक मा लौंग, एक पूरा नारी के सिंगार करके दरपन करा खड़ा करीस । चन्द्रकला देवी खुद सरमा गे । बासंती रंग म चेहरा म चमक आगे रहय । बासंती रंग म नव दुल्हन जईसे दिखत रहय, चन्दा देवी मोहा जाथे । माथा ल चूम लेथे । चन्दा कथे, दीदी यदि मंय पुरूष होतेंव त तोला चूरी पहिरा के ले जातेंव । कतको बिहाती देय ल पड़तीच । चन्द्रकला देवी कथे, थोरकन मोर उमर ल तो देख । पचपन बछर के डोकरी ल कोन पूछही । चन्दा कथे दीदी तोर लईका नई होय ले सरी म कसावट, जवा टूरी मन जईसे हे । चन्द्रकला देवी ह दरपन के पास जाके देखथे, सही म बहुत सुन्दर दित रहय । रंग बासंती म बहुत जचत रहय, चन्द्रकला देवी ह चन्दा ल कस के पोटार के चुमे लगथे । सुख-दुःख के गोठ, बात करके चन्दा अपन विधायक विसराम गृह चले जाथे ।

चन्द्रकला देवी मंत्रालय म जाके बईठ गे । सरकारी काम-काज ल निपटाईस । कई मंत्रीगण अउ माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलिस । मुख्यमंत्री जी ह चुनाव के तियारी करे बर कहिस । माननीय मुख्यमंत्री जी, मालूराम अग्रवाल के दुखःद निधन ल बहुत बड़ छति बताईस । चन्द्रकला देवी ल दूसर पार्टी के कार्यकर्त्ता बनाय बर कहिस, मुख्यमंत्री कार्यालय से सड़क, सिंचाई परियोजना बर पचास लाख रूपिया स्वीकृत कराके लाथे । दिन भर मंत्रालय के काम निपटा के शाम 6 बजे बँगला आ जथे । बँगला म दस-बीस झन से भेंट करे के बाद निवास म चले जाथे ।

पुस्पा माँ ह बेटी के रूप-रंग, हाव-भाव म परिवर्तन देख के बहुत खुस होथे । बेटी मरने वाला तो मरगे, ओकर संग हमन काबर मरीन । महूँ ह त जीयत हंव, सौ बछर से जादा होते हे । तोर बाबूजी के बिना पूरी जवानी बितांय अउ अभी घलो जीयत हंव । जब तक जीवन म आस हे तब तक चलत हे । जब सरीर अ थाऊ पड़ जाही तब मर जाहूं ।अभी तो चलत-फिरत हंव । चन्द्रकला देवी कथे दाई मोरो उमर ह लगजावय, दू सौ साल जी दाई । मोर देख-रेख कोन करही । पुस्पा कथे, बेटी मोर उमर तोला लग जाय, तंय जी दो सौ बरस । मंय तो बहुत जी लेंव । चन्द्रकला कथे, दाई आज भूख लगत हे कुछ बनाय हस । पुस्पा दाई ह सब झन नौकर-चारक, पी. ए. गनमेन ल खवाते । गरम-गरम भजिया खाके रात मे थोरकुन दाल-भात खा के चन्द्रकला सो जाथे ।

क्रमशः
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