छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Tuesday, June 27, 2006

भाग-सत्रह

चन्द्रकला देवी ह मंत्रालय म सरकारी कामकाज निपटा के बंगला आईस । चन्दादेवी के फोन आईस कि, दीदी मोर सास के तबियत ठीक नई हे मंय भोपाल से सारंगढ़ जाथंव । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी महूँ ह एक-दू दिन म रायगढ़ जाहूं कहत हंव । चुनाव घलो तीन महीना म होवईया हे । पार्टी ह टिकट तो दे देही । चन्दा देवी कथे, दीदी ठीक हे चुनाव तो लड़बो, हारिन या जीतीन । मुख्यमंत्री जी हा वादा तो करे हे जे विधायक हे, ओला जरूर टिकट मिलही । आधा घंटा तक सुख-दुःख के बात करीन । चन्द्रकला देवी ह हाथ मुँह धोके चाय नास्ता करत रईथे, दू-चार झन भेंट करईया से मुलाकात घलो करथे । सिरफ विधानसभा के टिकट मंगाईया, बायोडाटा थमा के चले जावय । प्रदेश भर से हजार से जादा आवेदन पत्र मिलगे रहय । बीस पच्चीस झन समर्थक लेके मंत्री अउ पार्टी अध्यक्ष के बँगला, आफिस म पहुँच जावय । कहय, विधानसभा म चुनाव मही ह भारी बहुमत से जीतहंव के दावा करय । सब ल टिकट के आस्वासन देवय के तोही ल टिकट मिलही । चन्द्रकला देवी रात म भोजन करके सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी रात म भयानक सपना देखते, सपना म पुस्पा देवी पांड़े के मिथिया म दब गे हे, बचावव-बचावव कहत हे । चन्द्रकला बेटी मोला बचा ले कहत हे । चन्द्रकला देवी बचा नई पावव, पसीना से लथपथ हो जथे । का अपसुगन सपना देखे हंव । ठीक रात के चार बजे रहय, उठ के एक गिलास पानी पीईस अउ पसीना ल पोछीस । चन्द्रकला देवी सोंचिस, अब दाई ह जादा दिन के मेहमान नई ए । रात म नींद नई पड़ीच, समाचार पत्र पढ़े लगीस । दू-चार पत्रिका ल पलट के देखथे । बँगला म मार्निंग वाक घास म पैदल चलत रहय । मन म सोचत रहय, अब घर म का होत हे, अभी सात बजे टेलीफोन से बात करहूँ ।

चन्द्रकला देवी ह रायगढ़ फोन लगाईस, पुस्पा देवी ह फोन उठाईस । दाई परनाम चन्द्रकला देवी कथे । पुस्पा देवी कथे, जीयत रह बेटी । घर के हाल-चाल पूछथे, सब ठीक के कहिस । पुस्पा देवी कथे, बेटी दौनामांजर ह लदबदाय हे, नव महीना होवत हे । चले-फिर नई सकत हे । पेट ह बने जुड़वा लइका हे अइसे लगत हे । आधा घंटा से फोन म बात करिच । फोन ल काट देते । चन्द्रकला के हाय जीय होइच । सब बने-बने हे । सपना म का सपना डारे हंव, मन थोड़ा हलका लगिच । चपरासी चाय ले आथे, चन्द्रकला देवी चाय बिस्टिक खाथे । समाचार पत्र पढ़े लगथे, पलंग म जाके सो जाथे । हलका नींद पड़ जाथे । दस बजे सो के उठथे । स्नान ध्यान करके कार्यालय म आ के बईठ जाथे । दस बीस झन भेंट करईय़ा से मुलाकात करथे । बंगला म मंत्रालय जाके फाईल निपटाथे । साम 5 बजे बंगला आ जाथे चन्दा देवी के फोन आथे, दीदी मंय घर जाथंव, जय सतनाम । चन्द्रकला कथे जय सतनाम । चन्दा देवी भोपाल से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बिलासपुर से रायगढ़ ट्रेन म जाथे, रायगढ़ से सारंगढ़ बस म जाथे ।

चन्दा देवी जईसे घर पहूँचथे, पता चलथे सब झन काठी म गय हे । चन्दा देवी के सास काल साम 7 बजे के मर गे रहय । रमसीला ह चन्दा भउजी के गला मिलके खूब रोईच । चन्दा देवी घलो बहुत रोईच । रोवई म आँखी फूल गे रहय अड़ोसी-पड़ोसी मन ढांढस बंधाईन, सांत्वना देईन । टूरा-पिला, पूरस मन काठी देके, माटी देके आके तरिया म बईठे हे कहिच । समारू अउ ओकर भाई दुकालू ह दाई ल माटी देके आय रहय । बड़ दुःख लगत रहय । दाई के मरे ले घर सुन्ना होगे रहय । दाई ह लाठी धरे दुवारी म बईठे रहय, सटका धरे रहय त कोई दुवारी म घूस नई पावय । डोकरी बने कड़क रहय । कोई बदमासी करय तेला सटका म मार देवय । समारू सोच-सोच के आँसू ढरकावत रहय । अब घर के रखवारी कोन करही । अतका कन धन दौलत, खेत-खार, कुँआ बारी ल कोन देखही । मन झुंझवावत रहय । समारू के नाता-गोता मन समाझाईन । तरिया के पार म पीपर छाँव म बईठे अगोरत रहय ।

रमसीला कईथे, भउजी दाई के काठी पड़गे हे, चला नहाय ल तरिया । घर के बड़े सियान ह आगू रथे । चन्दा देवी बड़की हे । आगू-आगू चन्दा, रामसीला पाछू पाछू लाईन से पचास झन महिला मन नहाय निकलीन । तरिया घाट गईन । रमसीला के आदमी ह उरई ल लाके गड़िया दे रहय । चन्दा ह नहा के उतई म पाँच चुरूवन पानी सिंचिस अउ परनाम करिच । कहिस, दाई अतका दिन ले तोर अचरा के छाँव म रहेन, जुड़ावा, सितरावा । दुःख तकलीफ म सहायता करव । माई लोगन के नहाय के बाद म पुरू, मन असनादीन अउ उरई म पाँच चुरूवन पानी डारिन, परनाम करके जुड़ावा, सितरावा पुरखा मन कहीन । सब पुर्ष मन पानी सिंचथे, परनाम करथे, समारू ह आगू-आगू गईच, पाछू-पाछू सब झन । घर के दुवारी म बाल्टी म पानी रखे रहय । पानी म पाँव धोईन अउ सरीर म सिंचिन । समारू ह हाथ जोड़ परनाम करीच । सब झन अपन अपन घर चल देथे । घर म परिवार के मन बाच जथे । रमसीला अउ चन्दा मिलके भोजन पकाथे । मेहमान-पहुना मन ला जेवाथे । जेवन से पहिले समारू ह पत्तल दोना म दार-भात, पानी दुवारी म दाई के हिस्सा रख देथे । पहुना मन संग बईठ के जेवन जेथे । पुरूस के बाद महिला पहुना मन ल खवाथे । खवा-पिया के अंगना म बईठ जथे ।

चन्दा देवी ह समारू ल कथे, दस नाहवन कब होही । समारू बताथे रविवार पड़ही । चन्दा कथे सोक-पक्ष छपवा ले । सारंगढ़ अउ सरिया क्षेत्र के महिला मन ल खवाय ल पड़ही । समारू ह शोक पत्र लगभग पाँच सौ धापे बर प्रिंटिंग प्रेस म बोल देथे । समारू ह घर के दुबराज धान, पच्चीस बोरा कुटवा लेथे । एक बोरा उड़द, एक बोरा राहोर दार अउ दू बोरा तिवरा दार दरवा ले रहय । दसकरम के तियारी चलत रहय । चन्दा देवी ह फोन म चन्द्रकला देवी ल निमंत्रण देथे । पूरनिमा ल जबलपुर फोन करथे । चन्द्रप्रकास अउ डॉ. प्रेमलता के पिताजी एम. एल. भारद्वाज, डिप्टी कलेक्टर दुर्ग ल फोन से सूचना देथे । जतका नता-गोता अउ जान पहिचान वाले हे, ओमन सोक-पत्र देथे । समारू ह सारंगढ़ से टेंट मंगाथे, पंडाल लगवा दे रहय । रायगढ़ से रसोईया बुलवा ले रहय । लगभग तीन हजार आदमी के भोजन बेवस्था करे रहय ।

समारू अउ चन्दा के नेता-गोता मन सुकवार, सनिवार के आगे रहय । घर ह भरे रहय । ईतवार के दिन बारह बजे महिला मन नहा के तालाब से आगे रहय । पुरुष मन घलो नहा के आगे । ठीक एक बजे मंगल, चौंका आरती के कार्यक्रम बिलासपुर से आये पंडित रामाधीन सुरू करथे । मंगल गीत भजन एक घंटा चलिस । चोकहार म अंगन म भोजन करे बईठ जाथे । नरियर प्रसाद चढ़ाथे । नरियर के प्रसाद बांटे बर देथे । एक दोना पत्तल म खीर, पूड़ी, दाल भात, लड्डू, बरा, सोंहारी, मोहन भोग पंडित रामाधीन देथे । समारू ह दुवारी के बाहर गली म रखे देथे । दोना म पानी दे देथे, दाई तंय पहिली परसाद पा । अतके दिन के संग म रहे बर रहिस । अंगना म आके भोजन परसागे रहय । समारू ह दूनों हाथ जोड़के भोजन करे बर परनाम करिच, भोजन पावा कहिस । सब पहुना मन ल परछी, कोठार म बईठार के भोजन कराथे ।

चन्दा देवी ह सब महिला मन ल भोजन कराथे । चन्द्रकला देवी ह चार बजे आथे । सब महिला मन से मिलथे अउ संग म बईठ के भोजन करथे । चन्दा देवी ह पूछ पूछ के भोजन कराथे । लगभग पाँच हजार आदमी मन भोजन करथे । चन्दा देवी के वाहवाही हो जाथे । अतका आदमी ल कोई नई भोजन कराय रहीन । भोजन करके सब महिला, पुरूस मन पहुना मन घर चल देथे । दिन म खाना पीना होगे रहय । समारू ह दसकरम के संग भांजा अउ गुरू बिदा घलो कर दे रहय । चन्द्रकला देवी ह रात दस बजे तक रहीस, रात म रायगढ़ चल देथे ।

रात आठ बजे से चौका आरती, मंगल भजन के कार्यक्रम सुरू होथे । रात भर चौका होथे, जय सतनाम, गुरू घासीदास बाबा के गुनगान होथे। घर, गाँव सतनाम मय होगे रहय । मंगल भजन सुबह पाँच बजे तक चलत रहीच । सब चौकहार मन ल पाँच सौ एक रूपिया चन्दा देवी ह भेंट देथे । जीप म बईठ के बिलासपुर भेज देथे । सब पहुना मन चाय पीके अपन-अपन घर चल देथे । समारू के सगा संबंधी मन रूक गे रहय । समारू ह टेंट अउ रसोईया के हिसाब-किताब कर देथे । चन्दा देवी रात भर जागे रहय । दिन के बारह बजे तक सोवत रहय । समारू ह खाय बर जगाईच । आँखी ल रमजत उठीच । सब पहुना चले गिन, चन्दा पूछीच । समारू कथे, हाँ सब चल दीन ।

चन्द्रप्रकास अउ एम. एल. भारद्वाज जीप म रायपुर अउ दुर्ग चल देथे । सब पहुना एकेक करके झर जथे । घर सुन्ना के सुन्न हो जथे । चन्दा देवी चुनाव के तियारी घलो करत रहीस । चन्दा देवी ह मधु, सरला, क्रांति ल लेके सारंगढ़ क्षेत्र के गाँव के दउरा कर बर गीच । लगभग बीस गाँव के महिला मन से मिलिच । सब समर्थन दीन । गाँव-गाँव के मतदाता सूची घलो कार्यकर्ता मन ल दिवाईच । चुनाव के तियारी सुरू होगे । गाँव-गाँव के दीवार म लिखे के सुरू हो रहय । चन्दा देवी ह धूल-धक्का म सनाय रहय । गाँव-गाँव, घर-घर, दुवारी म हाथ जोड़ के वोट माँगय । अच्छा समर्थन मिले ल लगिच । चन्दा देवी के पक्ष म हवा चल गिस । सरपंच अ पंच मन चन्दा देवी ल टिकट देय पर पार्टी से माँग करीन । चन्दा देवी टिकट बर आस्वस्त होगे । रायगढ़ म जिला कमेटी से वर्तमान विधायक मन ल टिकट देय बर प्रस्ताव पारित करके हाई कमान ल दिल्ली भेज देथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी के टिकट पक्का होगे रहय ।

चन्दा देवी सारंगढ़ क्षेत्र के दउरा करके चन्द्रकला देवी से मिले रायगढ़ बस म चल देथ । संग म मधु भी रहय । चन्द्रकला देवी निवास म मिल जथे । चन्द्रकला कथे, चल बहिनी पार्टी कार्यालय जाके देख लेथन, काकर नाव भेजे गे हे । पार्टी के निरदेस अनुसार जिलाध्यक्ष ह वर्तमान विधायक मन ल टिकट देय के अनुसंसा करके भेज देय रहय । ओकर कापी चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी ल देथे । मधु कथे, महूँ ल सरिया से टिकट देवव । चन्द्रकला देवी ल नई मिलही त मोला टिकट देवावव । अध्यक्ष महोदय कथे, वर्तमान विधायक, मंत्री के रहत दूसर ले टिकट नई मिलय । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी के टिकट पक्का होगे । पार्टी ओही मन ल टिकट देही । चन्दा देवी कथे, बहिनी मधु दीदी के रहिते कईसे तोला टिकट मिलही । मधु कथे, मंय तो मजाक करत हंव । मंय तो अभी नगर पालिका के अध्यक्ष हंव । तीन साल अभी कार्यकाल बांचे हे । चन्द्रकला देवी कथे, बहिनी अभी काम करे के अवसर मिले हे । नगर के बिकास के काम करावव । भोपाल चलके अनुदास रासि स्वीकृत करावव । मधु कथे दीदी बिना कुछ दिये अनुदान रासि नहीं मिलय । चन्द्रकला कथे, बहिनी जो भी लगय रासि ले आवव । एडजेस्ट करा लेहा । कोन अपन घर से देहा, नगर पालिका से निकाल लेहा । मधु कथे, जब भोपाल जाहा त महूँ ल ले जाहव ।

चन्द्रकला देवी अपन निवास आ जाथे । पुस्पा देवी, रमौतीन, बेटी के भोजन के अगोला म बईठे रहय । पुस्पा कथे, बेटी अतका देरी कईसे कर देय । चन्द्रकला कथे, दाई पार्टी कार्यालय गे रहेन, देरी होगे । चन्दा अउ मधु घलो साथ म हे । दू थाली अउ लगा । चन्दा पूछथे, बहू के का होईच । दौनामांजर ह थाली म भोजन ले के आईच । बड़ पेट निकले रहय । चन्दा के पाँव परिस । दीदी अब दिन लकठियागे, आठ दिन के भीतर हो जाही । चन्दा कथे, चन्द्रकला दीदी ऐकर पेट म जुड़वा बच्चा हावय अईसे लगत हे । दौनामांजर कथे, चन्दा दीदी देक तो कहाँ लुकाय हे । चन्दा ह कान लगा के सुनथे पेट ल छूथे । दू मुड़ी जानत रहय । दौनामांजर चलत फिरत बच्चा जनमही कहत रहय । चन्दा कथे, अब ऐला अस्पताल म भरती करा देवव, पेट ह सिंधियागे हे, दू-चार दिन म पीरा उठ जाही । पुस्पा अउ रमौतीन दाई ह भोजन परोसथे । खाना खाके चन्दा अउ मधु रायगढ़ से सांरगढ़ चल देथे ।

दौनामांजर के रतिहा पीरा उसल गे । कहिना रमरमावत (दरद) रहय । पुस्पा रमौतीन दाई, चन्द्रकला ह दौनामांजर ल चलावत रहीन । दरद बाढ़बे नई करीच । बिहनिया होगे । दौनामांजर ल नहवाईन, शौच कराथे । चाय-नास्ता घलो कराईन । दरद ह थोड़-थोड़ बाढ़त रहय । चिल्लाई शुरू कर दीच । चन्द्रकला कथे, दाई हो दौनामांजर के पीरा ह बाढ़त हे, अस्पताल म भरती करा देथंव । रमौतीन कथे, बेटी लईका के मुड़ी हे तीरम आगे हे । बने जोर से कांखही त लईका बाहर आ जाही । चन्द्रकला सिरहाना म बईठ के ढांढस बंधावत रहय । दौनामांजर बने जोर के धक्का दे, लईका के मुड़ी ह दिखत हे । चन्द्रकला ह छू के देखथे । पुस्पा दाई ह दूनों हाथ ले रास्ता ला चौड़ा करथे, जेमा बच्चा लउहा निकल जाय । दौनामांजर प्रसव पीड़ा म कल्पत रहय । पसीना-पसीना होत रहय । पुस्पादेवी अउ रमौतीन कथे, बेटी पीरा ह बाढ़गे बने जोर से धक्का दे । दौनामांजर दाई मन के हिम्मत से बने जोर के चिल्लाईच, मंय मर गेंव दाई हो, जोर से धक्का दीच । लईका के मुड़ी बाहर होगे । रमौतीन दाई ह दूनों हाथ डार के लईका ल बाहर निकालथे । दौनामांजर के हाय जी ह हलका लगिच । पाँच मिनट के बाद म पीरा उठगे । कसके धक्का लगाईच, दूसर लईका बाहर आगे । दाई, माँ बचावव । पुस्पा ह लईका ल पकड़के खीचिस, नोनी बेटी आय रहीस । रमौतीन ह बड़े लईका के हाथ पाँव ल दबावत रहीस । लईका ह ऐंव-ऐंव रोय लगीच । दूनो लईका ह स्वस्थ, सुन्दर, तगड़ा रहय । पुस्पा अउ रमौतीन लईका ल सम्हारत रहय । चन्द्रकला ह गरम पानी गिलास म दौनामांजर ल पिलाईच पसीना अउ पीरा म अधमरा होगे हरय । चन्द्रकला ह हवा देईच कुछ देर बाद म होस आईच ।

रामदेव ह सुनईन दाई बुलाय हे कहिके बैकुंठपुर चल देथे । दाई नवा पत्ती से नाल काट के दूनो लईका ल अलग-अलग करथे । दौनामांजर के चेत पानी सींचे ले आथे । कपड़ा ल सम्हारे लगथे । चन्द्रकला कथे, अभी सोय रहय । दाई ह साफ-सफाई करके दौनामांजर ल कपड़ा पहिना के पलंग म सुला देथे । चन्द्रकला ह चाय बिस्कुट खवाथे । दौनामांजर एकदम ठीक होगे रहय । बातचीत घलो कर लगीच । दाई ह दूनो लईका ल दिखाथे अउ पास म सोवा देथे । दौनामांजर ह दूनों लईका ल छूईच अउ पियार करीछ । दूनों लईका मन माँ के स्पर्श ले गरम-गरम हवा ले नींद म सो जथे । तब तक दाई हर घर के साफ सफाई कर डारे रहय । चन्द्रकला ह लेडी डाक्टर अउ सिसु रोग विशेषज्ञ ल फोन करके बुलवा ले रहय । डॉक्टर मन जच्चा-बच्चा ल स्वस्थ कहीन । यदि कोई तकलीफ होही त बुला लेहा । डॉक्टर मन समझा के चल देथे । चन्द्रकला देवी दौनामांजर के सेवा म लग गे रहय । पुस्पा अउ रमौतीन दाई ल खिलौना अउ वंस चलाय बर बेटा मिल गे रहय ।

रामदेव अउ कामदेव, चन्द्रसेवन बहुत खुस होईन । रमौतीन आस-पड़ोस म लड्डू बंटवाथे । बच्चा मन ल मिठाई देथे । बड़ दिन के बाद म घर म लईका जनम होय रहय, ओहू म जुड़वा बेटा अउ बेटी । दुगुना खुसी होय रहय । चन्द्रसेन बहुत खुस रहय । तीन घंटा बाद लईका मन जागीच अउ ऐंव-ऐंव रोय लगीन । रमौतीन ह कथे, लईका मन भूख म रोवत हे । दौनामांजर ल जगाईच, बेटी उठ अ लईका मन ल दूध पिलाव । दौनामांजर ल कथे, बेटी ढेठी ल गरम पानी म धोले मईल ह निकल जाही । थोरक दबाके ढेंठी ल । दूनों ढेठी म धूध भरे रहय । एक ढेंठी ल बेटा के मुँह मा डारिच । चुमुल-चखल के दूध पीय लगथे । मस्त दूध पी के सोय लगथे । दूसर ढेंठी ल बेटी के मुँह म ओधाथे । चखल-चखल करके दूध पीये लगथे । पेट भर दूध पी के दाई के गोदी म सो जाथे, दौना मांजर ह दूध पिलाके सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी ह फोन करके दुबारा पूरनिमा ल बताथ, चन्द्रसेन के जुड़वा लईका होय हे । कालि तंय ह रायगढ़ आ जा । चन्द्रप्रकास ल रायपुर फोन म बताथे । दुर्ग म चन्द्रप्रकास के ससुन ल छट्ठी के नेवता देथे । चन्द्रसेन ह दमउदहरा जाके ससुर अउ सास ल बताथे, बड़ खुस होथे । छट्ठी के नेवता चन्द्रकला देवी ह सरिया अउ सारंगढ़ के महिला मन ल देथे । चन्दा देवी ह मधु के संग पहिली के आगे रहय । सबे सगा-संबंधी, जान-पहिचान वाला मन ल नेवता दे देथे । चन्द्रकला देवी ह छट्ठी के तियारी म लग जथे । टेंट वाला ल पंडाल लगाय बर बोल देथे । रसोईया ल दू हजार आदमी के पकवान, भोजन बनाय के आदेस दे देथे । छट्ठी के तियारी पूरा हो जथे । दौनामांजर ल छः दिन म गरम पानी से ओखद जड़ी बूटी डाल के पकाय पानी म नहवाथे । नवा लूगरा, पोलखर पहिना के घर के कुल देवता, तुलसी चौरा म अगबत्ती, धूप-जला के पूजा कराथे । दौनामांजर ह पुस्पा, रमौतीन, रामदेव, कामदेव, चन्द्रकला देवी, चन्दा देवी, पूरनिमा, अपन ददा अउ दाई अउ सब बड़ सियान के पाँव छू के पैलगी करिच । सब आसीस दीन, दूधो नहाओ, पूतो फलो । चन्द्रकला देवी ह छाती से लगा के माथा ल चूम लेथे । घर म आनंद मंगल होत रहय । घर म धून-धड़ाका होत रहय । दौनामांजर ल दूबराज धान के भात-दार, मुनगा-बड़ी के साग भोजन म देईन । घर म सुद्ध घी से बनाय लड्डू जेमा काजू, किसमिस, बादाम छोहारा, लौंग, इलायची डाले गे रहय । करायत, तिल, अलसी, सोंठ के लड्डू, घी म बनाय रहय । माँजर ह थोरिक थोरिक चीख के देखिच । कांके पानी बड़े ओखद जड़ी-बूटी, खस औसधियुक्त पेय पीईच । सब पहुना मन ल काके पानी, लड्डू, दार-भात, सब्जी, हजार आदमी मन ल खवाईच । मस्त सुवागत सतकार करीन । चन्दा देवी अउ मधु मन बढ़िया सोहर गीत घलो गाईन अउ नाचिन । पूरनिमा, प्रेमलता, चन्द्रकला देवी लईका मन ल गोदी म ले के मस्त नाचिन, आनंद मंगल मनाईन ।

रायगढ़ सहर के नेता, अधिकारी, कर्मचारी अउ कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, एस. डी. एम., थानेदार सब मैडम ल बधाई दीन । चन्द्रसेन ल बधाई दीन । भोजन करके सब अपन-अपन घर जल देथे । निकट के नातेदार मन रात रूकथे । बांचे मनखे मन रात तक घर चल देथे । चन्दा देवी अउ मधु सरिया के मन जीप म सांरगढ़, सरिया चल देथे । मस्त चहल-पहल घर म रहय । चन्द्रप्रकास अ पूरनिमा के चार-चार बच्चा मन धमा-चौकड़ी मचाय रहय । घर भरे लगय । घर म खुसी आनंद मंगल रहय । बहुत अकन भेंट, रूपिया-पईसा, कपड़ा, खिलौना, लूगरा मिले रहय । छट्ठी के खवाई-पियाई रात तक चलत रहीच ।

चन्द्रकला देवी ह सबके हिसाब-किताब चुकता करथे । सब पहुना मन ल चन्द्रसेन ह धोती, लूगरा, गमछा, लूंगी भेंट म देथे । दौनामांजर के दाई-ददा मन ह खुस होगे । अतका खरचा करबो त हमर खेत बेचा जाही । हमन तो गरीब किसान ठेठवार आन । अईसे ताम झाम नई कर सकन । बहुत अच्छा, बड़ नाम कमाही बेटी मंतरी ह । मजा आ जथे, देख के आदमी मन ल । खुसी म फूले नई समावत रहय, रामदेव अ कामदेव । पुस्पा देवी ह बेटा ल पावय अउ रमौतीन ह बेटी ल बढ़िया लोरी सुना-सुना के सुलावय, बढ़िया खिलौना मिल गे रहय, दूनों दाई के रहत माँजर ल कोई तकलीफ नई होवय ।

दौनामांजर ल बारा दिन म बरही नहवाईन । महिना भर गरम पानी म नहावय । धीरे-धीरे सरीर पक्का होत गईच, पहिली जईसे सरीर होगे । बढ़िया पुष्टिवर्धक लड्डू दवाई खाईच जल्दी देह ह भर गय । शरीर ह पेट ह पहिली जईसे होगे रहय । दूनो लईका मन पेट भर दूध बी के सोवत रहय । माँजर ह घरके काम बूता घलो करे लागय । माँजर के दूनों ढेठी म दूध भरे रहयष कमी नई होवय । चन्द्रसेन डेयरी के धन्धा म लग जाथे । फार्महाउस से अनाज, धान, राहर, चना, सरसों, गन्ना, फल, केला, पपीता आ जावय । बढ़िया खाता-पीता घर होगे रहय । पुस्पा अउ रमौतीन डोकरी मन लईका ल रोये नई देवय, बारी-बारी ले सब झन पावय ।

चन्द्रकला देवी ह नगर पालिका के जन्म-मृत्यु पंजीयन के कर्मचारी ल बुला के पंजीयन करवा देथे । बेटा के नाम राजेन्द्र प्रसाद अउ बेटी के नाम कमलाबाई लिखवा दीच । चन्द्रकला देवी के घर टिकट मंगईया मन के भीड़ जुटे लगीच । पूरा छत्तीसगढ़ से पारटी कार्यकर्ता मन आय लगीन । सबो के आवेदन ले के बायो डाटा लेके, पारटी कार्यालय भेज देवय । हर समय भीड़ बने रहय ।

चुनाव आयोग ह चुनाव तिथि के घोसना कर देथे । पैंतालिस दिन पहिली राजपत्र म छप जथे । चुनाव के तारीख पक्का हो जथे । नामांकन के तारीख म चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी अपना समर्थक महिला नेता मन ल ले के नामांकन परचा भर देथे । दिल्ली म कार्यसमिति के बैठक म पूरा विधायक मन ल टिकट देय के घोसन हो जाथे । दूर दिन समाचार पत्र म चन्द्रकला देवी ल सरिया क्षेत्र से अउ चन्दादेवी ले सांरगढ़ से टिकट मिले के खबर छपे रथे । पुरूस वर्ग के नेता मन बहुत विरोध करके पारटी छोड़ देथे, पर पारटी ह नीतिगत निरनय ल नई छोड़य । वर्तमान विधायक ल पारटी टिकट देथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी के नामांकन ल सही पाथे । विरोधी पक्ष के नेता मन नया चेहरा ल टिकट देथे । सरिया विधानसभा क्षेत्र से चन्द्रकला देवी, रामचन्द्र चौधरी, जवाहर-नायक उम्मीदवार रहय ।

सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र से चन्दा देवी वारे, सत्ता पक्ष से, विपक्ष से सेरसिंह, निरदलीय राम भजन जोलाहे उम्मीदवार रहय । नामांकन वापस ले बर सोचें रहय । कई निरदलीय महिला मन भरे रहय । मान-मनोवल से नाम वापस ले लेथे । चुनाव के महासमर म चन्दा देवी कूद जाथे । पहिली चुनाव के अनुभव ह काम आईच । गाँव-गाँव, गली-गली, घर-दूवारी म वोट मांगय । रात-दिन धूल-धक्कड़ म फदके रहय । बड़ भिनसार चाय पी के निकल के रात 12 बजे के बाद रात म घर आवय । न खाये पीये के फिकर न नहाय धोय के । चन्दा देवी चुनाव के महासमर म कूद पड़ीच । समारू ह चुनाव के कमान ल सम्हारे रहय । मधु ह नगर पालिका क्षेत्र के जवाबदारी लेय रहय । गाँव गाँ के महिला मंजल ल सक्रिय करके चुनाव के प्रचार म लगा देय रहय । सारंगढ़ क्षेत्र के हर गाँव के एक राउंड दउरा एक हफ्ता म चन्दा देवी पूरा करीच । पाँच ठन जीप, टेक्टर, कार, चुनाव प्रचार म लगाय रहय । चुनाव कार्यालय गाँव गाँव म गाँव के महिला मन चंदा देवी के पक्ष म पीरा कसके चुनाव समर म कूद गे रहय । चन्दा देवी ह पोस्टर, बेनर के बेवस्था अउ रूपिया, पईसा, खाय पीये के बेवस्था घलो कर देय रहीस ।

चन्द्रकला देवी ह रायगढ़ से सरिया म निवास बना ले रहीस । सरिया म चुनाव कार्यालय खोल दे रहिस । चुनाव के कमान पुस्पा दाई सम्हारे रहाय । पूरनिमा ह जबलपुर से आ गे रहय । कामदेव कका, गफ्फार चाचा, अमृत जोसी चुनाव प्रचार करत रहय । लगातार गाँव गाँव घर-घर अंगना म बईठक, आम सभा लेवय । परछी, चंउरा, चौपालगुड़ी, म धुआंधार प्रचार करत रहय । चन्द्रकला देवी ह दस जीप, सायकल, मोटर सायकल, टेक्टर, बैलगाड़ी चुनाव प्रचार म लगाये रहय । सरिया क्षेत्र, चुनावी पोस्टर बैनर से पट गे रहय । सरिया क्षेत्र म चन्द्रकला देवी के पक्ष म हवा चल गीस । सब महिला मन चुनाव प्रचार म कूद गीन । बहुत बढ़िया समरथन मिलत रहय । चन्द्रकला देवी ह महिला ससक्तिकरण बर अच्छा-अच्छा काम करे रहय । गाँव के विकास, उद्योग, कृषि, बागवानी, सिंचाई, स़ड़क, रोजगार धंधा म बहुत काम कराय ले चन्द्रकला देवी के जय जयकार होत रहय । सरिया म एक तरफ हवा बह गे । चारों मुड़ा चन्द्रकला देवी ल जीताय के समर खाईन, बढ़िया चुनाव प्रचार चलत रहीस ।

सरिया म चुनाव कार्यालय म भंडारा खोल दे रहय, कार्यकर्ता मन भोजन कराय अउ चुनाव प्रचार म जावय । सुबह खाना खा के जावय अउ आधा रात म आवय । अच्छा माहौल बन गे रहय . चन्द्रकला देवी ह बड़े नेता के संग सभा म रहय । चुनाव मतदान दिन सब मतदान केन्द्र म महिला एजेंट रहय । जादा से जादा महिला मन मतदान करीन। सरिया क्षेत्र म महिला मतदान के प्रतिसन 90 होईस अउ पुरूस मन के 60 प्रतिसत वोट पड़ीच । चन्द्रकला देवी, मतदान केन्द्र के वोट के धांधली झन होवय कहिके देखत रहीस ।

सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र म मतदान पचास प्रतिसत वोट पड़ीच । चन्दा देवी के पक्ष म हवा चले रहय । महिला मंडल के सदस्य मन अधिक से अधिक महिला मन वोट डालवाय रहय । चन्दा देवी जीत के प्रति आस्वस्त होगे । मत पेटी, सांरगढ़ से रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय म जमा हो जथे ।

चन्द्रकला देवी के भाग्य के फैसला, मत पेटी म बंद हो जथे । सरिया क्षेत्र म जबरदस्त मतदान के चरचा समाचार पत्र अउ टी. वी. म आय रहय । चन्द्रकला देवी जीत के प्रति आस्वस्थ रहय । पुस्पा दाई ह चुनाव के कोसाध्यक्ष रहीस । बढ़िया सब कार्यकर्ता मन खुस रहय । सब ला भोजन, डीजल, पेट्रोल के पईसा माँग अनुसार देवय । कार्यकर्ता मनु के उत्साह ह बढ़े रहय । चन्द्रकला देवी पस्त हो गे रहय । धूल धक्कड़, धाम म चेहरा मुरझा गे रहय । छप्पन साल म एकदम सौ साल के डोकरी कस दिखत रहय, सब कोई पहिचान नई पावय । दूसर दिन सुघ्घर साबुन से रगड़ रगड़ के नहाईच । केस ल सेम्पू से धोईच अउ काला रंग के मेंहदी लगाईच, चेहरा म क्रीम लगाईच अउ भोजन करके मस्त एक नींद सोईच । एक महीना के थकान ह दूर होईच ।
चन्दा देवी के चुनाव के कोसाध्यक्ष समारू रहय । पहिली चुनाव म घलो समारू ह देखे रहिस । अच्छा अच्छा चुनाव के काम निपट गे रहय । चन्दा देवी थकान से चूर हो गे रहय । दरद के गोली खाके सोईच । दिन भर सोवत रहिगे । समारू ह सबके हिसाब किताब करिच ।

कलेक्टरेट, रायगढ़ म मतगनना होईच । प्रथम चक्र से चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी आगू चलत रहीस । आखिरी चक्र म कई वोट मिले रहीस । चन्दा देवी ह बारह हजार से अधिक मत से जीत हासिल करीछ । चन्द्रकला देवी ह बीस हाजार मतों से विजयी होईच । दूनों महिला मन अपन सीट ल बरकरार रखीन । जय जयगार होगे, चन्द्रकला देवी के । भारत निर्वाचन आयोग से विजयी होय के परमाण पत्र कलेक्टर जिला निर्वाचन अधिकारी ह चन्द्रकला देवी ल देईच अउ बधाई दीच । चन्दा देवी ल विजयी घोसित करीच । प्रमाण-पत्र देईच अउ बधाई घलो दीच ।

चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी के जीत के खुसी म विजयी जुलुस रायगढ़ नगर म निकलिच । बधाई देवईया मन के तांता लगे रहय । रंग गुलाल, बैंड बाजा सहित विजय जुलूस पारटी कार्यालय से बाजार होके निवास स्थान समाप्त होईच । चन्द्रकला देवी सबो झन ल लड्डू बांटथे । जबरदस्त जुलूस रहय । पूरा सहर उमड़ पड़े रहय का लईका अउ का सियान । मजा आगे । घर म खुसी छा जथे । पुस्पादाई, रमौतीन, चन्द्रसेन, रामदेव, कामदेव, एम. ए. गफ्पार भाई, कृस्नचंद भारद्वाज झूम झूम के नाचिन, गाईन अउ मौज मस्ती मनाईन । चन्द्रकला देवी सब ल धन्यवाद करीच । सरिया अउ सारंगढ़ से आये महिला मंडल के सदस्य मन हिरदे ले आभार व्यक्त अउ धन्यवाद देईच । सब अपन घर जीप म बईठ के चल देथे ।

चन्दा देवी ह सांरगढ़ के महिला अउ पुरूस कार्यकर्ता मन ल तीन जीप म ले जाथे । सारंगढ़ म विजय जुलूस रात म निकलिच । रंग, गुलाल, ढोल-तासा बाजत रहीस । जुलूस, सहर घूम के रानीसागर निवास म खतम होईच । सब ल चन्दादेवी ल लड्डू बांटिच । हाथ पांव के अंगना के जैतखाम म अगरबत्ती जला के पूरा करीच । माटी के दीया जला के रखीच । जय सतनाम बाबा गुरू घासीदास जी की जय बोलाईच । आकास गूंज उठीस । बाबा जी के परनाम माथा टेक के करीच अ माँगिच, बाबा जी सहायता करबे । मय तो तोरे भरोसा हंव, समारू अउ पूरा परिवार मिलके पूजा आरती करथे । घर म आनंद खुसी छा गे रहय ।

दूसर दिन अखबार म सत्ता पक्ष के करारी हार के समाचार पत्र छपे रहय । मध्यप्रदेश के मुख्मंत्री सहित आधा दर्जन मंत्री, विधायक चुनाव हार गे रहय । सत्ता प के करारी हार से मुख्यमंत्री के जवाबदारी लेते हुए मंत्रीमंडल भंग करके मुख्यमंत्री पद से इसतीफा, राज्यपाल महोदय ल भेज देथे । राज्यपाल महोदय ह मुख्यमंत्री के निर्वाचन तक काम चलाऊ मुख्यमंत्री बने रहे के आग्रह करथे ।

चन्द्रकला देवी ह मंत्री पद से इसतीफा भेजवा देथे । प्रोटोकाल के कार अउ स्टाफ ल वापस कर देथे, विधायक रहिहूं कहिच । चन्दा देवी ह सब हिसाब किताब अउ सब कार्यकर्ता मन ल धन्यवाद घलो गाँव गाँव जाके देईच । पाँच साल के बात फेर वोट देहा कहिके निवदन करीच । चन्दा देवी ह भोपाल जाय बर रायगढ़ आ जाथे । चन्द्रकला देवी के निवास म आ जथे । पुस्पा देवी, रामदेव, कामदेव, रमौतीन, चन्द्रसेन, दौनामांजर मन विधायक जीत के आय ले बधाई दीन । चन्द्रकला देवी ह चुनाव आयोग ल व्यय के हिसाब घलो भेज देथे । दूसर दिन रायगढ़ से भोपाल जाय बर बिलासपुर चल देथे . बिलासपुर से भोपाल छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस म चल देथे । ट्रेन म नव निर्वाचित विधायक मन से परिचय होते । नवा-नवा विधायक चुन के जात रहय । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी वारे, वरिष्ठ विधायक बनगे रहय । सब कोई नमस्कार परनाम करीन । गपसप करत बिलासपुर से भोपाल सुबह 6 बजे पहुँचीन । चन्दा देवी के संग समारू रहय . दो आटो म विधायक विसराम गृह पहुँचीन । चन्द्रकला देवी ह चाय पी के अपन बँगला, चौहत्तर बँगला चल देथे । चौकीदार, चपरासी मन दरवाजा खोलथे । चपरासी ल चन्द्रकला देवी बोलथे, सब समान ल पेक करके रख दो मंय बंगला एक-दू दिन म खाली कर देहूँ । पूरा बँगला खाली रहय । सुनसान, भूत बँगला जईसे खाली लगत रहय । मंत्री के बोर्ड, झंडा निकल गे रहय । स्टाफ के घलो ट्रांसफर होगे रहय ।

चन्द्रकला देवी ह लउहा स्नान करके पूजा पाठ, अगरबत्ती जलाईस । तियार हो के विधान सभा भवन चल देथे । विधानसभा सत्र म सपथ ग्रहण, नव निर्वाचित विधायक मन ल राज्यपाल महोदय, विधानसभा अध्यक्ष महोदय ह सपथ दिलवाथे । साम के वक्त विधायक दल के बैठक म बहुमत वाले पारटी के नेता ल मुख्यमंत्री चुने जाथे । दूसर दिन राजभवन म राज्यपाल महोदय ह मुख्यमंत्री अउ मंत्रीमंडल के सदस्य ल सपथ कराथे । चन्द्रकला देवी विपक्ष म जाके बईठ जाथे ।

चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी, विधानसभा भवन के बंगला आ जाथे । चन्द्रकला देवी ह विधायक विसराम गृह म चन्दा देवी के पास के कमरा ल आबंटन करा लेथे । चन्द्रकला देवी ह सब समान ल पेक करा डरे रहय . एक मेटाडोर म समान विधायक बिसराम गृह भेजवा देथे । बंगला के चाबी पी. डब्ल्यू. डी. के आफिस म जमा कर देथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी, न्यू मार्केट से साग भाजी, मीठा, खारा, नमकीन लेके निवास म पहुँच जथे । समारू ह सब समान ल जमवा देथे । चन्द्रकला देवी पड़ोसिन हो जथे ।

चन्दा देवी कपड़ा बदल के रंधनी म पहुँच जथे । बढ़िया दार-भात, सब्जी पकाथे । चन्द्रकला देवी ल भूरी ह खाना खाय ल बुलाथे, चल बड़ी माँ भोजन खाय बर । चन्द्रकला देवी, भूरी, कुसुवा, चन्दा देवी, समारू एके संग बईठ के भोजन करीन । खाना खा के गप मारत बईठे रहय । लईका मन सोगे । समारू घलो सोवत रहय । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी गप मारत-मारत सोचे लगथे । चन्द्रकला कथे चन्दा बहिनी, हमर दाई-ददा मन हमन के नाव चन्द्रकला ला सोच के धरीन होही, सोंच तो भला । चन्दा कथे दीदी मंय तो सउघे चन्द्रमा मोर नाव हे । चन्दा के सीतल किरण से सांति मिलथे । दिन के सूरज के घाम म आदमी तप जथे, परेसान हो जथे । सोचथे कब सूरज डूबे अउ चन्दा के सीतल, ठंडी किरण मिले । चन्द्रकला कथे बहिनी, तंय समूचा चन्दा आच, पर मंय तो ओकर कला आँव । जईसे परिवार, दूज, तीज, चौथ, पंचमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमीं, दसमी, अकादशी, द्वादसी, त्रयोदसी, चौदस, अमावस, पूरा अंधकार, कृष्ण पक्ष । सुक्ल पक्ष फिर वही क्रम अंतिम म पूनम के चांद । जईसे चन्दा के कला हावय वईसे ये मोर जीवन म अंधियार उजियार होईस । चन्द्रकला के आँखई ले आँसू झरर-झरर बहे लगथे । चन्दा कथे, का बात हे दीदी । चन्द्रकला कथे, बहिनी, मालूराम जी के याद आगे । दू साल से जादा होगे, संसार ल छोड़े । जब तक जीयत रहिस, का नई करे हे । सब कुछ ओकरे बनाय आय । मंय तो मंवरी रहेंव तभो ले एक ठन कुरिया घलो नई बनाय सकेंव ।

चन्दा देवी कथे, दीदी, मालूराम जी बने आदमी रहिस । तब तंय ह लोग, लईका के परयास काबर नई करे । चन्द्रकला कथे बहिनी, ओह पहिली ले बाल-बच्चेदार आदमी रहीस । ओला बच्चा नई चाहत रहीस । मंय भी सोचेव मंदिर के बिहाव ल समाज नई स्वीकारय । ओकरे सेती मंय ह नसबंदी आपरेसन करा डारे हंव, नई तो मोरो कई ठन लईका दनादन हो जातिच । चन्दा बहिनी, मोर किस्मत म प्रसव पीड़ा अउ लईका के सुख नई लिखे हावयष तब तो मंय बगठी हंव । उल्ला सांड़ जईसे घूमत-फिरत हंव . अब मरे के बेला मोला कोन पानी देही । मोर जतन कोन करही । सरीर अभी चलत-फिरत हे, जे दिन थाउ, अचल पड़ही त कोन जतनही । अब तो परिवार के जादा जरूरत हे, जवानी म खा पी लेंव ।

चन्दा कथे दीदी, जईसे जवानी कटिस, वईसे बुढापा घलो कट जाही । अब पेंसन घलो बढ़िया मिलही जीये लाईक ।कई झन पाले पोसे बर सेवा करईया मिल जाही । चन्द्रसेन भाई तो हे । चन्द्रकला कथे बहिनी, पुस्पा दाई, रमौतीन, रामदेव अउ कका कामदेव के उमर सौ बरिस जादा एक सौ पाँच बरिस होगे हे । सब एक संग आगू पाछू जाही । चन्दा कथे दीदी, सबे ल एक दिन जाना हे । अब तो पाँच साल तक राज कर सकत हन । पाँच साल तक भोपाल म रह सकत हन । चन्द्रकला कथे बहिनी, जब ले मोर संग धरे हंव मोला फायदा होय हे । चन्दा कथे दीदी, ऐ तो सतनाम साहेब के किरपा हे । कहाँ सोचत रहेन कि हमू मन एक दिन गोबर थपई से विधानसभा पहुँच जाबो । ऐ तो हमर किस्मत म लिखे रहीस, विधायक बन के ।

चन्द्रकला देवी ह गपसप मारत-मारत कलाई के घड़ी ल देखथे, रात के साढ़े दस बज के रहय । चन्दा बहिनी चल सोबो, काल जल्दी विधान सभा जाना हे । चल आज अतका गपसप मारे काली अ बईठको । चन्द्रकला देवी अपन कमरा म जाके सो जाथे । चन्दा देवी बाथरूम से हाँथ-पाँव धोके जाथे । समारू के नींद पड़गे रहय । चन्दा हे जगाथे, सोगे का जी । समारू कथे, हां थके रहेंव नीदं पड़गे । चन्दा ह कथे बच्चा मन सोगे के नहीं, देखथे सब सोगे रहय । चन्दा कथे, आज तेल मालिस कर भई । दो-तीन महीना म आज मिल हे । चन्दा देवी ह नरियर तेल निकाल के रखथे समारू ह आंखी ल रमजत-रमजत उठीच । चन्दाकथे मोर पीठ, कनिहा म तेल लगा के मालिस कर जी । चन्दा ह उलाट सो के मालिस पीठ, कमर म कराथे । बने दबा-दबा के मालिस कराईच । समारू कथे थक गेंव जी । चन्दा कथे, दे मंय तेल मालिस कर देथंव । पीठ, कमर, हाथ पाँव म तेल मालिस करथे । चन्दा के देंह एकदम गरम हो जाथे । मस्ती करके चंदा सांत हो जाथे । आत्मिक सुख के अनुभव करथे । समारू घलो आनंद लेके सो जाथे ।

चन्द्रकला देवी के रात म नींद नई पड़ीच, रात ऐती ल ओती कलथस करीस । चन्द्रकला देवी ह दिमाग म सेसे जीवन के काली छाया के चिंता सताय लगिच । चिंता के कारन रात म नींद नहीं पड़ीच । बिहंचे उठके मार्निंग वाक म सड़क म निकलगे । दो-तीन किलोमीटर घूमे गईच अउ वापिस आगे । तब तक चन्दा देवी के दरवाजा खुल गे रहय । समारू ह अखबार पढ़त हय । भूरी अउ कुसी ब्रस करत रहय । चन्दा देवी रंधनी म चाय बनावत रहय । अदरक, लौंग, इलाइची, कूटत रहय । चन्द्रकला देवी रंधनी म पहुँच जाथे । पीढ़हा म बईठ के रंधनी मचाय पीईन । समारू बर चाय भेजथे । भूरी अउ कुसुवा रंधनी म आ के बईठ के चाय संग म पीइन । बहुत बढ़िया चाय बनाय रहय, मजा आ गे चाय पीये म ।

चाय पीके चन्द्रकला देवी ह फ्रेस होय चल देथे । चन्दा देवी अउ समारू साग-भाजी के तियारी म लग जथे । लईका मन बर पोहा के नास्ता बनाथे । चन्दा देवी ह विधानसभा जाय बर स्नान करके तियारी करे लगथे । चन्द्रकला देवी लूगरा पोलखर पहिन के आ जाथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी पोहा के नास्ता करके विधानसभा जाय बर सड़क म आ जथे । पैदल चल के विधानसभा पहुँच जाथे । विधानसभा म मुख्यमंत्री ह सब मंत्री मंडल के सदस्य मन के परिचय कराथे । विधायक मन टेबल पीट के सुवागत करथे । विधानसभा म पूर्ण बहुमत मिल गे रहय । विधानसभा अध्यक्ष घलो सत्ता पक्ष के रहय । विधान सभा उपाध्यक्ष, विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य ल बना दिये जाथे । विधान सभा म मुख्यमंत्री जी द्वारा भोज दिये जाथे । दोपहर भोजनावकास म हास-परिहास कर भोज समाप्त हो जाथे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला देवी हर रेल्वे कूपन, बस कूपन, टेलीफोन एवं अन्य सुविधा के माँग करथे । अउ विसराम करे बर विसराम गृह आ जाथे । चन्द्रकला देवी कथे बहिनी, नींद लगत हे मंय जांथव सोहंव । चन्दा कथे ठीक हे महूँ सो जाथंव एक घंटा सो जाथे । चन्द्रकला ह पाँच बजे तक सोवत रईथे ।

चन्दा देवी के फोन नम्बर म चन्द्रसेन, रायगढ़ से फोन करथे अउ रोवत-रोवत बताथे दीदी, रायगढ़ सहर म रबड़ी खाय ले पचास आदमी बीमार हो के अस्पताल म भरती हे । होटल से पुस्पा दाई ह रबड़ी लाके, सियान मन चारों झन खाईन । फूड पायजनिंग होगे, उल्टी, दस्त, होगे । पूरा जहर सरीर म फईल गे । अस्पताल म चारों झन के मृत्यु होगे हे । मंय तो अनाथ होगे हंव । चन्द्रकला देवी ल आज छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से रायगढ़ भेज दे । चन्द्रसेन रोवत रोवत फोन रखिच । चन्दा देवी के गला सूख गे । झटपट चन्द्रकला देवी ह सांकल खटखटाईच, बेल घलो बजाईच । चन्द्रकला आँखी रमजत उठीच, का होगे चन्दा बहिनी । चन्दा बहिनी ह रोवत रोवत चन्द्रसेन के बात बता देथे । चन्द्रकला देवी गस खा के गिर जाथे । चन्दा देवी छींटा मारके होश म लाथे । चन्द्रकला देवी आँखी ले आँसू के धार बहत रहय । रूके के नाव नई लेत रहीस । चन्दा देवी कथे दीदी, चल रायगढ़ जाय ल पड़ही । चन्द्रकला कथे बहिनी, मोर तो रायगढ़ से दाना पानी अउ मातृ छाया उठगे । सब सियान मन मरगे । मोर घर ल कोन देखही, बम फारके होईच ।

समारू ह दूनों के सूटकेस म लूगरा, साया कुछ सामान भरके तियार कर देथे । रात के भोजन बर पराठा, सब्जी बना के रख देथे । चन्दा देवी ह चन्द्रकला ल पकड़ के रेल्वे स्टेसन ले जाथे । गाड़ी ह आधा घंटा लेट रईथे । चन्दा देवी ह दो टिकट कूपन से कटवाथे । ए. सी. म बर्थ आरक्षित मिल जाथे । भोपाल से रायगढ़ व्हाया बिलासपुर के टिकट बन जाथे । चन्द्रकला के हालत खराब होत रहय । चन्दा ह दरद के गोली डिस्प्रिन खवाथे अउ सो जा कहिथे । चन्द्रकला कथे जेकर घर चार-चार झन मर गे हे, कईसे नींद आही । मोर दाई-ददा, कका, मोर माँ पुस्पा के अकालमृत्यु होगे । चन्द्रसेन, चन्द्रप्रकास अउ मय अनाथ होगेन । चन्दा कथे दीदी, तोर तबियत खराब हे, थोरिक आराम करले । छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस भोपाल से प्रस्थान करथे ।

चन्द्रसेन ह टेलीफोन से चन्द्रप्रकास ल बताथे । जल्दी काल आ जावव । चन्द्रप्रकास के हालत खराब हो जाथे । एक ठो माँ रहीस ओहू ह छोड़ के चले गे । चन्द्रप्रकास ह अपन ससुर ल दुर्ग टेलीफोन करथे । सब छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बिलासपुर पहुँचथे । चन्द्रसेन ह पूरनिमा ल सूचना देथे, पूरनिमा के हालत घलो रोवई म खराब होगे रहय । पूरनिमा, सुनील जबलपुर से कार म रायगढ़ तीन बजे तक पहुँचथे । चन्द्रकला अउ चन्दा, चन्द्रप्रकास, एम. आर. भारद्वाज अउ रिस्तेदार मन बिलासपुर से रेल म रायगढ़ तीन बजे पहुँचीन । चन्द्रसेन ह अपन ससुराल घलो पता भेज दे रहीस । दौनामंजर के रोवई म आखी सूज गे रहय, दूनों दाई के मरे ले । दौनामांजर के बच्चा मन अनाथ जईसे होगे । काबर दूनों मन गोदी म पावत रहय, खेलवाय, सोवावय, नहावावय, बढ़िया लईका मन बाढ़ता रहीन, अब कोन सहजोग देही । अड़बड़ रोईच । आस-पड़ोस के मन जुट गे रहय । चन्द्रसेन अउ दौनामांजर ल ढांढस बंधाईन ।

चन्द्रसेन ह चारों लास ल अस्पताल के मरचुरी म रखवा दे रहय । फूड पायजनिंग के पचास आदमी भरती होय रहय । होटल के रबड़ी के जाँच म पता चलथे, रबड़ी ठंडा करत समय छिपकली गिर के मर जाथे । रबड़ी के साथ मिल जथे अउ छिपकली के जहर से रबड़ी जहरीला हो जाथे । जतका झन रबड़ी खाय रहय मौत के मुँह म समा गे रहय । होटल मालिक ल गिरफ्तार कर जेल भेज दे जाथे । पुलिस ह एफ. आई. आर. दर्ज करके कारवाही करथे । रायगढ़ सहर अ पूरा परदेस म तहलका मच जाथे । दूसर दिन विधानसभा म ध्यानाकरसन के माध्यम से सरकार के धियान आकरसित करे जाथे मुख्यमंत्री ह जाँच के आदेश देथे । मृतक के परिवार ल आर्थिक सहायता एक एक लाख रूपिया के घोसना घलो करथे । पूरा देस भर रबड़ी खाय से पाचस आदमियों की मौत, खबर छपथे । टी. वी. न्यूज में घलो आ जाथे ।

चन्द्रकला अउ चन्दा देवी तीन बजे रायगढ़ पहुँचथे । वहाँ से सब झन अस्पताल लास लाये बर चल देथे । अस्पताल म कोहराम मचे रहय सब रोवई म मातम, सन्नाटा रहय । चन्द्रकला देवी ह लास ल देख के बहुत रोईच । दाई-ददा, कका, दाई के लास ल देख के बमफार के रोईच । सज के आँखी ले आँसू बहत रहय । घर के सियान के मौत होगे रहय । हजारों के भीड़ अस्पताल म रहय । अस्पताल से एम्बूलेन्स गाड़ी से लास गोसाला पास के निवास म लाथे । चन्द्रप्रकास, चन्द्रसेन, सुनील, एम. आर. भारद्वाज, गफ्फार भाई, बलदेव साव, डॉ. बिहारी लाल साहू, शिवरतन पांड़े, बिहारी लाल उपाध्याय, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, जगदीस मेहर अउ सब झन मिल के लास ल घर के अंगना म ले जाथे ।

चारों लास ल दू खटिया म सुला देथे । पानी से स्नान कराथे, शरीर म हरदी, चन्दन लगाथे । नया लूगरा, धोती पहिराथे । पुस्पादेवी अउ रमौतीन दाई ल टिकली, फुंदरी, चुरी पहिराथे । चारों झन के लाश ल चार मयाना म राम नाम सत्य हे, सबका यही गत्य हे । चन्दा देवी अउ चन्द्रकला, चन्द्रप्रकास, चन्द्रसेन के आँसू नई रूकत रहीस । रूंधे गला से चन्द्रसेन अउ चन्द्रप्रकास चारों मयाना म कंधा लगाथे । हजारों के भीड़ काठी म जाय बर जूटे रहय । कोतरा रोड के समसान घाट म चारों लाश ल जला के दाह संस्कार चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन करथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी विधायक, कलेक्टर, पुलिस अधिक्षक, एस. डी. एम., तहसीलदार, थानेदार, नेता, अधिकारी मन पाँच लकड़ी डाल के दाह संस्कार पूरा करथे । लाश धू-धू करके जलत रहय । समासान घाट म दो मिनट मौन धारनकर श्रंद्धाजलि देथे । तरिया म नहाके कर घर आ जाथे । घर से सब अपन निवास स्थान चले जाथे । चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन हाथ जोड़ के परनाम, सब पहुना जो काठी म आय रहय, करथे ।

दौनामांजर घर वाला मन बर भोजन बनाथे, बुझे मन से सब भोजन करथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी विधायक से भेंट कराईया, सोक व्यक्त करईया मन के तांता लगे रहय । घर ह एकदम सुन्ना पड़गे रहय । छोट छोट लईका मन दादी माँ के कोरा बर अड़बड़ रोवय । चन्द्रकला अउ चन्दा देवी के कोरा म लईका मन चुप हो गीन . चन्द्रकला ह दूनों लईका मन ल चुमीच । मस्त हांस लगीन । चन्द्रप्रकास ह बहुत रोईच । दीदी, अब रायगढ़ सहर से मोर दाना पानी उठगे हे । अब ऐ संसार म कोई नईये । चन्द्रकला कथे भईया, अभी तो मंय जीयत हंव । चन्द्रसेन घलो हावय । तीनो भाई बहिनी हांवन । चन्द्रप्रकास कथे दीदी, पुस्पा दाई ह दू-तीन दिन पहिली टेलीफोन करे रहीस, कहिस बेटा, रायगढ़ के आधा मकान, घर, खेत-खार ल चन्द्रसेन के नाव म चढ़ा देहे हेव । आधा ह तोर नाव म हे । तोर ददा ह इंदौर के मकान ल बेच के रायगढ़ म मकान अउ खेत, फार्म हाउस खरीदे रहीस । तोर पिताजी तो कई बछर होगे हे मरगे हे । चन्द्रकला बेटी के ददा ह तोर धरम पिता ऐ । अउ रमौतीन ह तोर दाई ऐ । काबर ओकर दूध पी के पले बढ़े हच ।

चन्द्रप्रकास बताथे दीदी, पुस्पा दाई बह जानत रहीस कहिस बेटा मंय जादा दिन के संगवारी नो हंव । चन्द्रकला देवी ल अच्छा मानबे मुनबे । ओही ह माँ बाप के दुलार देही । चन्द्रकला के घलो लोग लईका नईये । तोर लईका के संग रईही । चन्द्रप्रकास बताईच दीदी, मंय तो पहिली से बता दे रहें । मोला रायगढ़ के धन-सम्पत्ति नई चाही । दीदी के नाव म चढ़ा हव । मोर कहे अनुसार चन्द्रसेन के नांव चढ़वा दे । चन्दा देवी ह लईका ल कोरा म लेके खेलावत रहीस, मस्त हांसत, रोवत, खेलत रहय ।

चन्द्रकला कथे भाई हो तीन दिन के अस (हड्डी) बीन लेथन । पुस्पा दाई के इच्छानुसार अस ल महानदी म चन्द्रपुर म सरो (विसर्जित) देथन । दस दिन म दसकरम खात-खवई कर देबो । चन्दा देवी कथे, ठीक कहत हे दीदी ह । सब सुनता हो के काम ल निपटाबो । तीन दिन म चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन, सुनील, कंठी राउत मारघट्टी जा के अस बीन लेथे । एक माटी के बरतन म रख लेथें । चारों झन के अस ल एके बरतन म रख लेथे । घर आ जाथे । जीप किराया म दू ठन ले लेथे । चन्द्रकला देवी अउ चन्दा देवी, पूरनिमा, प्रेमलात अउ चार महिला मन एक जीम म । दूसर जीप म चन्द्रप्रकास, चन्द्रसेन, सुनील, भारद्वाज, कंठी राउत अउ चार पाँच झन बईठ के चन्द्रपुर के घाट म महानदी म अस ल सरो देथे । चन्द्रकला देवी, चन्द्रसेन, चन्द्रप्रकास के आँखी ले आसू के धार फट पड़थे । आँसू टप-टप महानदी के जल म मिल जथे । जईसे पुस्पा बाई, रमौतीन दाई, रामदेव ददा, कामदेव कका के शरीर ह पंचतत्व म मिलगे । महानदी के जल म मिल के समुद्र म समा जाही, ओकरे संग चन्द्रकला देवी के आँसू ह जल म मिल जाथे । चन्द्रकला देवी ह बहुत रोथे । चन्द्रसेन, चन्द्रप्रकास, पूरनिमा के सर ले दाई ददा, कका के छाया ह उठ जाथे । घर के सियान मन खतम होगे । छत्तीसगढ़ के विख्यात कवि, भाई लक्ष्मण मस्तुरिया के गीत “मोर संग चलव ग” याद आगे –

कहाँ जाहव बड़ दूर हे गंगा,
सब जुर-मिल यही तरव ग,
मोर संग चलव ग ।

महानदी के सीतल जल धारा म स्नान करथे अउ गरीब मन ल भोजन कराथे । दसकरम के काम पूरा करथे । चन्द्रप्रकास अउ चन्द्रसेन दान घलो देथे । चन्दा देवी ह कथे दीदी, सब ल एक दिन जाना हे जो धरती म जनम लेय हे ओला एक दिन मरना होही । सबके आत्मा ह परमात्मा म जाके मिलगे । जईसे नदिया के पानी ह समुद्र म मिल जाथे, पता नई चलय कहाँ समा जाथे । चन्द्रसेनी देवी के दरसन पहाड़ी म करथे । पूजा पाठ करके चन्द्रपुर से रायगढ़ आ जथे । चन्द्रसेन ह घर के लिपई –पोताई घलो करवा लेथे । दू-चार दिन चंद्रप्रकास, डॉ. प्रेमलता ह दिया दिखाथे । पूरनिमा घलो बहुत रोथे । घर ल उज्जर करके पूजा पाठ घलो कराथे । सब पहुना मन अपन-अपन घर चल देथे । चन्द्रप्रकास ह चन्द्रसेन ल सब घर-द्वार सौंप के रायगढ़ से रायपुर, सुन्दर नगर आ जथे । चन्दा देवी घलो रायग़ से भोपाल चल देथे । बांच गे घर म चन्द्रकला देवी, चन्द्रसेन, दौनामांजर अ जुड़वा लईका मन । जुड़वा लईका मन ल कोरा नई मिलय सुन्ना होगे रहय . चन्द्रसेन डेयरी के धन्धा म लग जाथे । फार्म हाउस घलो देख लेवय । पुस्तैनी धंधा गउ माता के सेवा करई ह मुख्य धंधा बन जाथे । चन्द्रसेन दूधवाला, रायगढ़ अउ आसपास म बहुत परसिद्ध हो जाथे । चन्द्रकला देवी, दूनों लईका के पालन-पोसन म लग जाथे । सबके जीवन चक्र ह, समय चक्र के संग चले लगथे ।

क्रमशः

by-http://www.srijangatha.com











0 Comments:

Post a Comment

<< Home