छत्तीसगढ़ी उपन्यासःचन्द्रकला

उपन्यासकार- डॉ.जे.आर.सोनी

Monday, June 26, 2006

भाग-छह



चन्द्रकला रोजिना आफिस साढ़े दस बजे पहुँच जाय । टीफिन म दो रोटी सब्जी रख लेवय । लंच नगरपालिका म खावय । लंच के समे राम कुमार बेहार जी बताथे, सारंगढ़ के राजा जवाहर सिंह प्रजा पालक रहिस । कलाकार, साहित्यकार अऊ शिक्षाविद के सम्मान करय । साहित्य के बढ़ोत्तरी बर लायब्रेरी के स्थापना करे रहिस । जेवानी म बड़ अय्यास रहय । राजसी ठाठ बाट म रहय । राजा मन पहिली ओकर नगर गाँव म विवाह होय त पहिली मुँह दिखाई बर राजा के पास बहुरिया ल भेजे पड़य । जउन अच्छा नारी दिख जाय महल म बुला लेय । अऊ बक्सीस म गाँव के गौटी, दे देवय । बड़ कड़क मिजाज के रहय । सारंगढ़ म बड़े बड़े विद्वान अधिकारी रहीन । म.प्र. के मुख्य सचिव श्री गुरू प्रसन्न नायक, श्री सरत चन्द्र बेहार, चन्द्रहास बेहार, रामकृष्ण बेहार, विजय चौबे । सुरेन्द्र बेहार, श्री उपाध्याय अन्य बड़े-बड़े अधिकारी हो ।

चन्द्रकला कईथे चल ठीक हे । राजा महाराज के गोठ ऐ । अऊ बाता सारंगढ़ के अच्छाई । मय तो एक गाँव मानथंव । फेर नगरपालिका बने ले पानी, सड़क, बिजली, साफ, सफाई हो जाथे । फेर गाँव के रंग ह नई बड़े हे । सारंगढ़ के कई वार्ड अभी भी गाँव हे गैंव के संस्कृति हे । जईसे गाँव गाय कोठा रईथे । बईसे अभी भी गाय कोठा सामने हावय । चन्द्रकला कईथे कईसे सारंगढ़ म सुश्री, बुद्धिजीवी, अधिकारी मन के जनम अस्थान हे । फेर कोनों अपन जन्म भूमि खातिर कुछु नई करे हे । साफ-साफ दिखत हे । नगरपालिका अपन आय ले काम करत हे । सारंगढ़ नगरपालिका के आय के साधन बहुत हे । इहां काम करइय्या अधिकारी चाहिये । अध्यक्ष मन ल लेना देना हे नागरिक ले ।

चन्द्रकला आफिस ले साढ़े पाँच बजे घर आ जाथे । जईसे पहुँचथे वईसे भूरी, कुसुवा मन पढ़े बर आ जाथे । दीदी हमन ल पढ़ा न । दाई कहे हे पढ़े ले । चन्द्रकला बईठाथे । किताब ले दू पाठ पढ़ाथे । गिनती भी गिनवाथे । भूरी ल पूछथे तोर दाई कहाँ गय हे । बताथे खेत म हे धान कटाई चलत हे । बाबू जी रात मे आथे । बईला गाड़ी लेके गय हे । अंधियारी होंत, सूरज डूबत चंदा ह आथे । लउहा लउहा हाथ मुंह धोके आथे । चढ़ा देथे । देसी टमाटर रांधथे । मेडम नमस्ते । कहाँ गय रहे चन्द्रकला कईथे, धान लुए । कय एकड़ खेती हावय । चंदा कईथे, बीस एकड़ रानी सागर म अऊ बीस एकड़ कोसीर म हावय । दूनों जगा टयूबवेल लगे हे । चंदा कईथे खाय पीयेबर हो जाथे । घर म दूझन कमिया भी हे । कतका धान हो जाथे । ओई कोई चार सौ बोरा हो जाथे । कभू-कभू पाँच सौ बोरा होय हे । चन्द्रकला चंदा के गाँव सुन के अचंभित, चकरा जाथे । चन्द्रकला कईथे तू मन तो बड़े किसान आव । चन्दा कईथे हा बड़े किसान आन फेर भारी कंजूस । भूरी, कुसुवा कईथे चली दाई । चंदा कईथे, मेम साहब जेवन जे डारे । चन्द्रकला कईथे, जईसे आफिस ले आये । भूरी, कुसुवा आगे । तब ले बईठे पढ़ातय हंव । चंदा कईथे चल संगे म खाबो । सेमी बीज वाला, पकाय हंव । देशी टमाटर म बने हे । धनिया पत्ती खेत ले लाय रहेंव ।

चंदा ह भूरी, कुसुवा के बस्ता ल पकड़ीस आगू-पाछू जावत रहय । चन्द्रकला पीछू पीछू । बस्ता ल चंदा खांध म रखिच . चन्द्रकला कईथे, हांथ मुँह धोले । खाना तियार हे । चन्द्रकला अंगना के धन, मिरची के पेड़ म पानी डाल के हाथ धोये । चंदा ह तुलसी चौरा म दीया दिखा थे । परिकरमा लेथे । भगवान से बिनती करथे । मूंड़ ढांक के पूजा करथे । तुलसी चौरा म दिया रख देथे । भूरी, कुसुवा भी दाई के संग पूजा करथे । परथी म पीढ़ा बिछा देथे । चन्द्रकला पीढ़ा म बैइठते एक लोटा पानी रखते । भूरी, कुसुवा अलग-अलग बैइठथे । चंदा ह काँस के थारी म भात अऊ मलिया म साग परोसथे । चन्द्रकला अपन कमरा म जाके सुत जाथे ।

चन्द्रकला दूसर दिन सूबे उठके बाहर कोती लोटा लेके जात रहिच । चन्द्रकला खाना खाके भाँठा के मौहा तरी खड़े होईच । चंदा भी साथ रहय । चन्द्रकला कईथे भउजी । ऐ लकड़ी के खम्बा ह का हे । येहा बड़ पुराना लगथे । चंदा कईथे, जादा तो नई जानव पर जो सुने हंव बतात हंव दो सौ साल पुराना बात हे । जगन्नाथपुरी जा. बर संत गुरू घासीदास जी आवत रहिछ । गिरौदपुरी के रद्दा सारंगढ़ होके जगन्नाथपुरी जाथे । बाबा जी हा अपन भी अऊ गाँव वाला मन चलत रहिच । यही जगा म बाबा जी ल दिव्य ज्ञान मिलिच । सतनाम कहत कहत जगन्नाथपुरी न जाके वापस गिरौदपुरी लहुट जाथे । बाबा जी ह संत ज्ञान के अनुभूति होईच के मय ऐला खोजत जगन्नाथपुरी जातहंव । मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा ले ढूंढ़त हंव । ये हर नई मिलिच । ओ आत्मा ह मोर शरीर म हे । जो मानस अपन आप चिन्ह डारिच । ओह सब कुछ पागे । चन्द्रकला कईथे, ओकरे सुरता म जैतखाम्ब गाड़े हे । सफेद झंडा 18 दिसम्बर म चढ़ाय जाथे .

चन्द्रकला अऊ चंदा गोठियात भांठा ले निपट आथे । चन्द्रकला ल नया नया ज्ञान होत रहिस । महान संत गुरू घासीदास जी के किस्सा घर घर म सुनाई पड़थे । चन्द्रकला तरिया ले लउहा नहा के आ जाथे । भूरी कईथे, दीदी पढ़ा न । चन्द्रकला कईथे, अनार के पढ़ । मय तब तक खाना खा लेथंव । भूरी जोर-जोर कहे लगते । चन्द्रकला जो कहय । ओला पढ़ लय । चन्द्रकला कईथे तय बहुत बढ़बे अऊ डॉक्टर बनवे । तोर पढ़ें में लगन हे अक्षर जोत जलाय ल पढ़ ही । यदि जोत जलगे तो नई बुझय । भूरी ल कईथे, जा बेटी मय आफिस जाहव । चन्द्रकला बन ठन के आफिस चले जाथे ।

चंदा ह कईथे, भूरी जा तो देख मेडम आय हे के नहीं । भूरी दउड़त जाके देखथे । मेडम हाँथ पाँव धोके तियार होत रहिच । भूरी कईथे, दीदी दाई ह देखे बर भेजे हे । भूरी बता थे आगे हे । चंदा चीला रोटी नवा चाउर के बनाय रहय । गरम गरम लाके दिच । चन्द्रकला खाईच । एकर अलग सुवाद रहय । चन्द्रकला कईथे भउजी सारंगढ़ म खवा के मोला भईसी बना देवे । चंदा मजाक म कईते । भी दू दाँत पँड़िया तो हावच । बिजार (भईसा) मन पाछू-पाछू दउड़त हे । खवा पिता के मस्त कर दवं । भउजी मोर ट्रांसफर रायगढ़ हो जाहे ता कोन पका के देही । चंदा कईथे । मोला नौकरानी रख लेवे । दूनो झन खूब हंसथे । चन्द्रकला कईथे, भउजी तय अतका बढ़िया हच मोर सगा भउजी होतिच त अता खयाल नहीं रखतिच । चंदा कईथे, ऐतो हमार सतनामी मन ला पीढ़ी दर पीढ़ी संस्कार म मिले । मोर दाई भी अच्छा खाना बनावय । मोर दू भउजी हे ओहू मन बढ़िया खाना बनात हे । चन्द्रकला कईथे, चंदा मय विधायक बन जाहूँ त मोर का काम करवे । काबर नहीं करहूँ । मोर नोनी बाबू मन बड़े हो जाहय । फेर निष्फीकीर होके घूम सकत हंव ।

चन्द्रकला कईथे चुनाव होने वाला हे छः महीना बांचे हे । कुछ काम करना हे । चंदा कईथे, बतान । सारंगढ़ अऊ सरिया क्षेत्र म महिला संगठन, महिला मंडल बनाना हे । सारंगढ़ म तोला अध्यक्ष बनाना हे । चंदा कईथे, मय तो पढ़े लिखे नई अवं । चन्द्रकला कईथे, त का होईच । महिला मन के विकास के सोचते हे । फेर यह गाँव के मण्डलीन हच । तोर घर अन्न धन भरे हे । तय महिला मन के सहजोग कर सकत हच । तय पचास महिला ल भोजन करा सकत हच । चन्द्रकला चंदा ल पूछथे, सरिया के महिला मन के नाव बता । सरिया, बरयकेला दू अध्यक्ष बना थे । महिला मण्डल ह चुनाव म बोट माँगे के काम आही ।

चन्द्रकला रविवार के दिन चपरासी बरातू यादव ल बुलाईच । बरातू ल कईथे, दिन दो बजे महिला मन के बईठक, मोर घर म हे ही । महिला मण्डल बनाना हे । महिला बैंक के स्थापना करना हे । बरातू घर घर जाके महिला मन ल कईथे । चन्द्रकला के घर म दू बजे बईठक हे । पच्चीस महिला जूरिया गे । चन्द्रकला कईथे, महिला मण्डल के गठन करना हे । कोन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष बनाना हे नाम लिखा दे । सब चुप बईठे रहय । काबर पढ़े लिखे नई रहय । एक महिला सावित्री साहू कईथे, मेडम का काम करे ल पड़ही । चन्द्रकला कईथे, महिला मन ल संगठित करके अधिकार दिलाना, स्वास्थ्य, सिक्षा रोजगार, बाल एवं महिला दिवस कार्यक्रम, परिवार नियोजन, पोषण आहार, बाल बाड़ी खोलना, महिला बैंक स्थापना करना । फूल बाई पूछते ऐकर हिसाब किताब कोन रखही । ऐकर हिसाब किताब बर एक झन कोई महिला या लड़की ल राखय । अभी तो मय हिसाब कर देहवं । चंदा चाय पिला । महिला मन चर्चा करत रहय । चाय आ जाथे । चाय पीते पीते चन्द्रकला कईथे, चंदा भउजी ल अध्यक्ष, सावित्री साहू उपाध्यक्ष, मधु केसरवानी ल सचिव, रामकली मनहर कोसाध्यक्ष, राजकुमारी बेहार संगठन सचिव बन ही । बाँकी कार्य कारिणी के सदस्य रईही ।

चन्द्रकला कईथे, महिला मण्डल के हर महीना । बईठक होही । सदस्यता सुल्क रजिस्टर म प्रस्ताव लिखथे । सबके हस्ताक्षर अंगूठा लगवा लेथे । चन्द्रकला कईथे अब ढोलक पार्टी हो जाय । चंदा ढोलक ले आना । राजकुमारी अऊ चंदा बढ़िया फिल्मी धुन म छत्तीसगढ़ी गाना गाईन । चंदा के वाहवाही होगे । चन्द्रकला कईथे मधु जी चल राम भजन सुना । मधु बढ़िया राम भजन सुनाथे । सब महिला खुस होके घर चले जाथे । महिला मण्डल के गठन के बात सब अपन अपन घर म बताथे । जगन्नाथ केसरवानी कईथे, चन्द्रकला तो खुद बिगड़े हे अऊ हमरो घर ल बिगाड़ना चाहत हे । मधु कईथे अईसे बात नोहय । महिला ल संगठित करत हे । बैंक स्थापना करत हे । शिक्षा, बाल बाड़ी, स्वास्थ्य के जागरूक महिला ल करत हे । जगन्नाथ कईथे, तोला का जरूरत हे । तय तो जागरूक हच । मधु कईथे ठीक हे मय जागरूक हंव । सब महिला मन थोड़े पढ़े लिखे हे । मोला तो अच्छा लगिच । मय करहूँ ।

मधु केसरवानी कईथे, तय नवभारत के पत्रकार अच । महिला मण्डल के सचिव मय अंव । महिला मण्डल के गठन के होईच कहिके छपवाय बर भेज दे । जगन्नाथ कईथे ओकरे सेती तियार होगे । दो दिन के बाद बड़े हेडिंग म नवबारत म सारंगढ़से समाचार छपथे सारंगढ़ में महिला मण्डल का गठन – सारंगढ़ के जागरूक महिलाओं ने चन्द्रकला देवी के अध्यक्षता मार्गदर्शन में एक महिला मण्डल का गठन किया गया । अध्यक्ष श्रीमती चंदा वारे, उपाध्यक्ष श्रीमती सावित्री साहू, सचिव मधु केसरवानी, कोषाध्यक्ष राजकुमारी बेहार अऊ पचीस कार्य कारिणी के सदस्य । महिलाओं को अधिकार दिलाने, सिक्छा, स्वास्थ्य पोसन आहर, महिला बैंक के स्थापना करेंगे । सारंगढ़ म घर घर चर्चा होय लग जाथे । सब महिला मन सदस्य बने बर पूछथे । मधु केसरवानी सब ल बताथे । एक सप्ताह के भीतर म पाँच सौ महिला सदस्य बन जाथे ।


मधु केसरवानी चन्द्रकला ल कईथे, मेडम महिला मण्डल ल अच्छा समर्थन मिलत हे । चंदा बहुत खुस रईथे । मधु केसरवानी बहुत उत्साहित रईथे । अपन घर मिटिंग बुला लेथे । महिला मण्डल बर बढ़िया ठेठरी, खुरमी, चीला बरा सोहारी, बनाय रहय । लगभग दो सौ महिला आ गिच । मकान के छत म दरी बिछा के बैठाईच । सब झन बईठे बाद मिटिंग सुरू करिच । मधु कईथे, चन्द्रकला ल हम ल धन्यवाद देना चाहिये । हम महिला मन एक जगा जोड़े के प्रयास करे हे । परम आदरणीय चन्द्रकला देवी जी, महिला मण्डल के अध्यक्ष श्रीमती चंदा देवी, सावित्री साहू उपाध्यक्ष, अऊ राजकुमारी बेहार कोषाध्यक्ष, सबे जूरे बहिनी, दीदी मन । बड़ खुसी में लिखिओए के बात ऐ कि महिला मण्डल के गठन करे हंव । ऐसा सबके सहजोग चाही । जब तक हम संगठित नई होबो, तब तक हमरो अवाज नई सुनय । अऊ महिला अत्याचार के सामना नई कर सकत । महिला मण्डल के लक्ष्य हे महिलाओं का विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, मातृत्व व शिशु विकास, पोषण आहार अउ बैंक के स्थापना हे । महिला मण्डल ल आगू बढ़ाय बर चन्द्रकला देवी ह कुछ सुझाव अऊ मार्गदर्शन हमन ल देवय । ताली बजाके सब झन सुवागत करथे ।

चन्द्रकला देवी कईथे, महिला मण्डल के पदाधिकारी बहिनी मन अऊ बहिनी सबे जुरे दाई महतारी मन । हमर बहिनी मन महिला मण्डल के गठन कर पुन्न के काम करे हवं । काबर जब तक हमन संगठित नई हो बो । तब तक पुरूष मन हमर ऊपर अईताचार करते रईही । महिला मन के साथ बलात्कार, उत्पीड़न, मारपीट, छेड़खानी, दंगा बाजी अउ सबसे बड़ी बात हमन ल दहेज दानव के खिलाफ लड़ना हे । ऐ दानव दाईज ह सब समाज से भागना हे । ऐ हा नारी मन के शत्रु ये । जब नारी शिक्षित हो जाही, पढ़ही लिखही त ऐहा अपने आप भाग जाही । दाई महतारी मन अपन लोक लईका टूरी, टूरा ल जरूर पढ़े ल भेजव । खास करके अपन नोनी ल जरूर पढ़ावव । जब नारी ह पढ़ही त पूरा परिवार ह पढ़ही । अपन नानी, बाबू ल पढ़ा । अनपढ़ के, अज्ञान के अंधकार ल ज्ञान के ज्योति से भागना हे । हमर दीदी बहिनी मन बेरोजगार हे । ओमन ल हमन रोजगार देहे बर बैंक के स्थापना करके धन के बेवस्था करबो । छोटे छोटे धंधा, किराना, रेडीमेड, सब्जी, दूध, मछली बेचना, सिलाई कढ़ाई, मसीन चलाना । अऊ बहुत काम धंधा हे । एमा महिला मन ल लगाना हे । महिला के समूह बना के ईंटा भट्टा, खेती किसानी सब्जी बागवानी उद्योग, लद्यु उद्योग बर सलाह देना, बैंक से लोन दिलाना हे । महिला के विकास बर मण्डल बनाये गे हे । यदि कोई परेसानी हो ही त पूछ लेवव । महिला मण्डल से सभी सदस्य बनय । दो रूपिया महीना देय ल परही । बैंक के लिये पाँच पाँच सौ रूपिया सेयर लेय परही । बैंक ल लाभ होही ब्याज के साल म बोनस लाभ मिलही । आज अतके बहिनी ह दूसर दिन अऊ बहुत ढेर अकन बात करबो । सब महिला मन तालियों की गड़-गड़ाहट करतल ध्वनियों से सुवागत करथे ।

मधु केसरवानी कईथे, दीदी चन्द्रकला धन्यवाद । अईसने मागदर्शन देते रईबे । अब महिला मण्डल के अध्यक्ष चंदा देवी वारे कुछ बताही । चंदा देवी कईथे, बहिनी हो जब से चन्द्रकला देवी आय हे महिला मन बर कुछ न कुछ करत हे । जो महिला मण्डल देखत हव न । ऐ चन्द्रकला देवी के बनाय आय । मण्डल ह ऋणी रईही । अऊ बहुत बढ़िया-बढ़िया बात कहे हे हमन ल करना चाही । पेर सबके सहजोग बिना सफल नई हो सकत । हमन ल संगठित होके रहना हे । मधु कईथे अऊ कोनो बोलिहा का । एक सरिया के बहिनी खड़ा होके कईथे, दीदी सरिया म हमन महिला मण्डल बनाके कहत हन । चन्द्रकला कईते हाँ-हाँ ठीक हे । तय रविवार के दिन सब झन जोर के रखिबे, हमन सब झन आवत हन ।

चन्द्रकला कईथे, मधु तोर घर म प्रीटिंग प्रेस हे । तय रसीद, लेटर पेड, अऊ सील बनवाले । महिला मण्डल सारंगढ़ के नाव के । मधु जगन्नाथ ल बोलथे, लेटर पेड, रसीद कट्टा, मधु केसरवानी सचिव महिला मण्डल सारंगढ़ के बनवा लेथे । जब भी कोकरो घर बईठक होही । अईसने खवाय बर परही । मधु के महिला मण्डल म धाक जम जाथे । सब अपन अपन घर चल देथे ।

रविवार के दिन चन्द्रकला, मधु, चंदा, राजकुमारी, सावित्री साहू अऊ चार पाँच झन बस बईठ के दस बजे सारंगढ़ से सरिया पहुँच जाथे । जमुना शर्मा अपन घर म ले जाथे । कोठार म बईठक के बेवस्था करे रहय । कोटार ल बढ़िया गोबर म लीपे रहय । चार पाँच दरी बिछन दे रहय । अऊ कई झन मन पैरा बिछा के बईठे रहय । जमुना देवी, मेहमान ल खाना खिला के बईठक शुरू करथे । चन्द्रकला देवी ह महिला मन ल समझाथे । संगठित होय के जरूरत बताथे । जमुना देवी ह पाँच महिला के नाव देथे । मधु ह सहयोग करथे । सरिया महिला मण्डल के अध्यक्ष जमुना देवी उपाध्यक्ष लक्ष्मी, सचिव मालती, राधे कोसाध्यक्ष, समलेस्वरी अऊ कार्य कारिणी के इक्सीस सदस्य बनाथे । मधु ह रसीद काटके दू दी रूपिया महीना जमा कराथे । लगभग सौ से ऊपर महिला सदस्य बन गे । चन्द्रकला देवी स ल समझा देथे । कईथे यदि कोई तकलीफ होही त सारंगढ़ आके बताहा । जो पईसा आही ओला भारतीय स्टेट बैंक सरिया म जमा करा दिहा । एक खाता खोल लेहा । मधु, चंदा कईथे जादा होही त एक झन सारंगढ़ आ जाहा । महिला बैंक खोलेबर पाँच पाँच रूपिया जमा करा लेहव । चन्द्रकला देवी संझा के सब बईठ के सारंगढ़ आ जाथे ।

सारंगढ़ अऊ सरिया क्षेत्र के गाँव गाँव महिला मण्डल के गठन एक महीना के भीतर हो जाथे । महिला बैंक सारंगढ़ म एक वर्ष म पचास हजार रूपिया जमा हो जाथे । सरिया महिला बैंक म चालीस हजार जमा हो जाथे । बीस महिला मन ल पाँच सो रूपिया सब्जी अऊ मछरी बेजे बर सहायता देथे । दस रेडीमेट अऊ किराना दुकान अउ अत्यावसायी और डवाकरा योजना से सामूहिक छेरी पालन केन्द्र चला थे । साल भर म महिला मन अपन पैर म खड़ा हो जाथे । छोटे छोटे सुख, दुःख म महिला बैंक से ऋण मिल जाथे । सस्ती ब्याज म रूपिया उठावय अऊ ब्याज सहिज जमा कर देवय । बैंक बढ़िया चल निकलीच ।

चंदा ह चन्द्रकला ल कईथे, मेडम रविवार के दिन रामनामी मेला भराही । कोसीर ह नदी गाँव हे । यह गाँव देखे जाहव करत रहय । गाँव कोसीर चंदा के मईके रहय । अऊ घर भी । उहाँ छ एकड़ खेती नदी के किनारे हावय । बढ़िया साग सब्जी लगाय हावय । चन्द्रकला कईथे कामा जाबो । चंदा कईथे बैलगाड़ी म जाबो । गाड़ी मोटर जाय के रद्दा नई हे । गाड़ी म जाबो त घर तक चले बर नई पड़ेय । चन्द्रकला कईते ठीक हे भउजी । गाड़ी के मजा ले लेथन । बैलागाड़ी के हिचकोला खाते त पता चलही चंदा कईथे, सुबह पाँच बजे जाबो । चंदा, चन्द्रकला, भूरी, कुसुवा अऊ समारू बैल गाड़ी म बईठ के कोसीर जाय लगिन । रस्ता म सैकड़ों बैल गाड़ी मिलिच । बैलगाड़ी के रेला लगे रहय । एक घंटा म कोसीर गाँव पहुँच गय । चंदा ह अपन मईके म गाड़ी रूकवाईच । चंदा ह अपन दाई, भउजी, भतीजा, बाबू जी से मिलवाथे । बढ़िया लीपे पोते घर । चारो ओर खपरा वाले मकान अऊ बीच अंगना म तुलसी के चौरा । चारो ओर परछी उतरे रहय । परछी म खटिया बिछा दे रहय । दस बारा मेहमान परछी ले पहुँचे रहय । मकान के पाछू म कुँआ, कोला बारी, कुँआ के केलाबारी, साग सब्जी के खेत । पाछू म लम्बा चौड़ा कोठार । कोठार म धान के खरही । धान काटके खेत से कोठार लावत रहय ।

चन्द्रकला चंदा ल कईथे, चल पीछू डाहर जाबो । चंदा ह कुँआ बारी ले जाथे । कुँआ म हाथ मुँह धोते । केला म घेरा उतरे रहय । कई केला फले रहय । चन्द्रकला कईथे, चन्दा बहुत बढ़िया घर हे । कुवा के आसपास भाटा, मिरचा, मुरई, आलू, धनिया पत्ती, मेथी, पालक भाजी क्यारी म लगे रहय । आधा एकड़ म भाटा लगे रहय । अड़बड़ फरे रहय । सेमी ह झोरफा-झोरफा फरे रहय । पताल बहुत फरे रहय । सब्जी बारी के बाद, मुनगा के पेड़ कोठार म लगे रहय । धान के बड़े बड़े खरही गंजाय रहय । कोठार भरे रहय । चन्द्रकला से पूछथे चंदा कतका धान हो जाथे । चंदा कईथे तीन चार सौ बोरा हो जाथे । चन्दा कईथे किसान मन सिर्फ नमक अउ कपड़ा खरीद थे । बाकी अपन खेत म उपज ले थे । अकाल पड़थे त अनाज कम हो जाथे । गाँव के लोग कमाय खाय कलकत्ता, इलाहाबाद, बनारस, कश्मीर पलायन कर चले जाथे । चन्द्रकला कईथे चल जल्दी रामनवमी मेला जाबो । चंदा कईथे साम के मेला भराही, खाना खा के जाबो । बढ़िया मस्त । दूबराज धान के खुशबु हे । गाँव के खाना खाके मस्त भर पेट ओम के डकारी लेत उठथे । कुँआ बारी कोती टहले लगथे ।

चंदा कईथे, चन्द्रकला चल रामनवमी मेला देखे बर । भूरी, कुसुवा अउ समारू साथ म जाथे । गाँव के बीचों बीच पीपल के नीचे चौपाल, गुड़ी रहय । गली गली चलके भाँठा म मेला लगे रहय । मेला म ठो ला देखये । पूरा शरीर म रामा राम गोदाय रहय । रमरमि मुखिया मन मोर पंख के मुकुट माथा म लपेट रहय । एक स्थान म लकड़ी के खंभा गाड़े रहय । सफेद झंडा फहरावत रहय । नरियर, अगरबत्ती, धूप भगवान राम के प्रतिमा म चढ़ावत अऊ जैतखाम के पूजा करय । रमरसिद्ध भजन मंडली के लगभग 50 टोली गात बजात रहय ।

भजन –
निक लागे हो राम के भजन नीक लागे –
राम, राम, राम, राम, राम, राम के भजन नीक लागे ।


रमरमिहा मन ल पूरा रामायण कंठस्थ रहय । चन्द्रकला चंदा, घूम घूम के मेला देखिच । महिला, पुरूष सभी के शरीर राम, राम के गोदना । रामनवमी मेला म देश विदेश के पत्रकार, टी.वी. कलाकार आय रहय । माननीय मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह आने वाला रहय । बहुत भारी मंच बनाय रहय । चंदा कईथे, रे बिडंबना हे कि पूरा राम नाम सरीर म लिखाय के बाद भी हिन्दू समाज अछूत मानते । छुआछूत मानथे । पंडित, पुजारी मन अपन धंधा बंद होय के डर म, वर्म भेद, जाति भेज ल चलावत हे । आदमी आदमी म का भेद । आदमी औरत म का भेद । अच्छा करम के बाद भी अस्पृश्य । ऐही हिन्दू धर्म के विघटन के कारण ये । तभे तो लोगन मन ईसाई, मुसलमान बनत रहिस । आदिवारी मन आधे से जादा ईसाई धर्म अपना ले हे ।

चन्द्रकला कईथे – चंदा चल पीपल के छांव म बईठबो । चंदा लूंगी बिछा देथे । भूरी अऊ कुसुवा बईठ जाते । चंदा बगल म । नदी के किनारे रहय । महानदी म पानी कम हो गे रहय । महानदी म रेत ही रेत रहय । चंदा कईथे जब नदी म बाढ़ आथे कहाँ ले पानी चा पानी । महा प्लावन के दृश्य दिखते । बाढ़ म पेड़, पौधे, जानवर, फसल बरबाद हो जाथे । ओतके बेरा म मुख्यमंत्री आथे । हेलीकाप्टर के आवाज आथे । सब झन हेलीकाप्टर देखे चले जाथे । मंचम मुख्यमंत्री ल माला पहिनाय बर चन्द्रकला ल बुलाथे । अर्जुन सिंह मुस्कुरा के नमस्कार के जवाब देथे । मुख्यंत्री कईथे मंच म बईठव । महिला प्रतिनिधि के रूप मे चन्द्रकला रहय । कार्यक्रम के बाद म चंदा कईथे, भोजन करके जाबो । चंदा ह अपन घर व खेत ल देखाथे । खेत एकदम हरा भरा रहय । साग, भाजी, सरसों, गेहूँ, गन्ना लगे रहय । भोजन करके बैल गाड़ी म बईठ के सारंगढ़ आ जाथे ।

चन्द्रकला के काम के तारीफ सारंगढ़ अऊ सरिया के गाँव गाँव म होये लगिच । चन्द्रकला से ईसर्या कई पुरूष लोग करे लगिन । चन्द्रकला के प्रभाव बढ़गे रहय । कई महिला मन सिकायत के बारे म बताईच। कईथे ठीक हे जवाब दे देबो । महिला मन के काम के जलईया पुरूष मन के नेता गिरी खतम होत सहिस । भयभीत होगे । विधायक के संग मिलके सिकायत स्थानीय शासन मंत्री से कर देथे । कई आरोप लगाय रहय । चन्द्रकला कईथे, जाँच के आरय ओला जवाब दे देबो । घबराय के जरूरत नईई । चंदा, मधु, राजकुमारी, सावित्री, अर्मिला, गायत्री, निर्मला मन गाँव गाँव जाके महिला मंडल बना लेथे ।

सरिया क्षेत्र म, बरमकेला म गाँव गाँव म महिला मंडल के गठन होगे रहय । अपन ढंग से काम करत रहय । नारी शिक्षा बर सब झन अपन लड़की मन ल स्कूल भेजिन । जुलाई महीना म शतप्रतिशत नारी शिक्षा बर जागृति लाय जात रहय बहुत अच्छा प्रभाव पड़त रहय । जब नारी सिक्षित हो जाही त परिवार सिक्षित हो जाही । महिला मन पुरूष के कंधे से कंधे मिला के चले लगिन । गाँव के अंगना हो महिला मन चौपाल म आके निर्णय लेय लगिन । गाँव म का का होना चाहिये । प्रौढ़ शिक्षा के कार्यक्रम भी गाँव म चलाय लगिन । पढ़े लिखे महिला मन अनपढ़ मन ला रात-रात, संझा-संझा पढ़ावय । सबके हाथ स्लेट बत्ती रहय । सिक्षा ल सामाजिक परिवर्तन आत रहय । चंदा कहिस । दीदी-नारी ल पुरूष के बराबर अधिकार देय के सिद्धांत गुरू घासीदास ह 250 साल पहले प्रतिपादित कर हे । समानता के अधिकार देय हे । कोई नारी सवतंत्रतापूर्वक पति के चुनाव कर जीवन बिता सकत हे । यदि विधवा हो जाथे त फेर दुबारा बिहाव करके जीवन जी सकत हे । पुरूष अऊ स्त्री के समान अधिकार हे ।

चंदा कईथे-दीदी यदि गुरू घासीदास जी बात ल मान जातिच न नारी अईत चार समाप्त हो चातिच । त दहेज के समस्या, न बलात्कार के, न मारपीट । संत गुरू घासीदास जी “पर नारी ल माता जानो” कहे हे । आचरण के शुद्धता पर जोर देय हे । जब कोई पुरूस सामने वाली अनजान नारी ल देखही त अपन माता के समान मानही त ओम माँ के चेहरा सामने आ जाही । त ओहा गलत काम नई कर सकय । बहुत बड़े बात कहे । फेर उच्च समाज कहाँ मानथे । चन्द्रकला कईथे, चन्दा अईसे बात कहे हे ऐ बात समाज के बीच काबर लावव । मनुवादी मन गुरू घासीदास के सिद्धांत ल नई मानय । काबर ओकर रोजी रोटी समाप्त हो जाही । बाबा जी ह मूर्ति पूजा के निषेध करे हे । निरगुन निराकार के उपासना सतनाम के जाप करे बर कहे हे । मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, जाय के जरूरत नईये । आत्मा तो सरीर भीतर हे । ओही सरीर ल सुद्ध आचरण कर मंदिर के समान बनाके सतनाम के जाप, सुबह साम करके परिवार म रहिके मोक्छ पा सकत हे ।

चन्द्रकला कईथे, चंदा बहुत बढ़िया जानकारी बताय भौजी । चंदा कईथे – दीदी-हमर पिताजी मन राउत जात के रहिन । भूख पियास म मरत रहेन । सराब, जुआ खेलत रहय । मांस, मछली खात रहिन । पिताजी मन दुर्दिन के दिन रहिस । जब तेलासी गाँव के सबे जान मन संत गुरू घासीदास जी अमृतवाणी सुनके , गुरू घासीदास के अमृतवाणी, चमत्कारिक दिव्य संदेस ल जान के सतनामी बन जाथे । सतनाम धर्म म दीक्छित हो जाथे तब से गुरूजी के सामाजिक आर्थिक आंदोलन, सतनाम आंदोलन म भाग लेईन । जब सराब, मांस, मछली, जुआ बंद करिन त आर्थिक सम्पन्नता आय गलिच । सबके घर म अन्न-अन्न के भण्डार भरे लगिच । तब से आज तक पाँच झन ल खाय देके बाद भी बच जाथे । आज मोर ददा के पचास एकड़ भूमि हे । घर म ट्रेक्टर, गाय, बईला, भईस, भईसा । कोठा भरे हे । सतनाम साहेब के किरपा ले कोई कमी नई ए । वईसने गाँव के तेली, कुरमी, राजपूत, गोड़, घसिया, केंवट, ढीमर, अऊ बामन तक सतनामी बन गे हे । आज उमन बड़े-बड़े गौटिया किसान हे । लईका मन बड़े-बड़े अधिकारी, न्यायाधीस, पुलिस अधिकारी, नेता हे । आज सतनामी नई बने रहितान त भूख मरत रहतीन ।

आज जउन सांति छत्तीसगढ़ म हावय । ऐहा संत गुरू घासीदास जी के पुण्य प्रताप हे । पोंगा, पंडित मन गुरू घासीदास ल नई जानय न मानय । चन्दा कईथे, दीदी आज गुरू घासीदास जी नई रहतीन त आज छत्तीसगढ़ ह ईसाई लैण्ड नागालैण्ड, असम, मेघालय बन जातिज । गुरू घासीदास ह ईसाई , मुसलमान बने ल रोके हे । प्रतिबंध लगाय हे । गुरू घासीदास ह सच्चा हिन्दु ऐ । हिन्दू समाज ल टूटे बिखरे ले बचाय हे । कोई बाम्हन, बनिया, ठाकुर मन बचाय हो ही त बताव । सब धन कमाय, लूटे बर लगे रहिन । छत्तीसगढ़ ल चारागाह बना ले हे ।

चन्द्रकला कईथे, ब्राम्हण मन छुआछुत मानके हिन्दू धरम ल बरबाद कर देहे । कुछ समाज सुधारक मन समझात रहिन । पंडित सुन्दरलाला शर्मा ह समझे रहिच । ओहा सतनामी मन संग जीयय, खावय, पीवय, अऊ चिंतन करय । पंडित सुन्दरलाल शर्मा ब्राम्हन मन जात ले छोड़ दे रहीन । ओला सतनामी ब्राम्हन कहय । पंडित जी हा केकरो फीकर नई करिच । आज पंडित सुन्दरलाला शर्मा जी के कर्म ल महान मानत हे । अऊ ओकर जयंती मनावत हे ।

चंदा कईथे, दीदी आज सतनामी समाज के संख्या देस म दू करोड़ से जादा हे । यदि सब ईसाई बन जाही या बौद्ध धर्म स्वीकार कर लीही त का होही समझत हंव । समाज के विद्वान, धर्म प्रचारक, विस्व हिन्दू परिषद, सिव सेना, संकराचार्य मन ल चिंतन करना चाही । सब मिल के समस्या के निराकरण करना चाही । तभी समाज म समानता, सद्भावना, भाईचारे ह पनपही । नई तो हिन्दू समाज म टूटन होत रहिही । चंदा कईथे, दीदी बहुत गोठ होगे । मय चाय बना के लावत हंव । चय पीके चन्द्रकला अपन कमरा म चल देथे ।

चन्द्रकला ह आफिस काम से रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय डाक ले के चल देथे । आफिस काम निपटा के अपन घर गोसाला पास गिच । रमौतीन बीमार खटिया म सोय रहय । चन्द्रकला पाँव पड़िच । सुखी रहवं बेटी । रमौतीन कईथे, बेटी बहुत दिन के बाद आय हच । चन्द्रकला कईथे, हाँ दाई बहुत काम हे । रमौतीन कईथे बेटी साठ बछर के उमर सरीर साथ नई देते । जोड़ जोर म दरद रईथे । उठे बईठे नई सकेंव । ददा कहाँ गय हे । बेटी तोर ददा ह सेवा निवृत रिटायर हो वईया हे । ओकर बाद घर के खरचा कईसे चलही । चन्द्रसेन ह लफंटूस होगे । लठर, लठर फिरत रहिथे । बाबूजी ह कोनो के दूकान म लगवा देतिच। गोसाला के दूध कोन पहुँच ही । चन्द्रसेन ह त सब काम बूता तो करत हावय । चन्द्रकला कईथे माँ तब ठीक हे कुछ तो करत हे ।

रमौतीन कुलकत कईथे बेटी पूरनिमा के लड़का होय हे । दमाँद के चिट्ठी आय हे जबलपुर ले । चन्द्रकला कईथे । दमाँद बाबू बने हे । ठीक से रखिये, पूरनिमा खुस हे । सुनील के प्रमोसन होगे हे । एस.डी.ओ.टेलीफोन्स होगे हे, पूरनिमा के राज हे । मस्त खाथे पीथे अऊ अपन अंगरी म नचावत हे । उठ, बईठ, जईसे कहिथे । सादी के बाद पूरनिमा रायगढ़ नई आय हे । रमौतीन कईथे नई आय हे । रामदेव ओतके बेरा आफिस से आ जाथे । बाबूजी के पाँव छूके प्रणाम करथे । रामदेव कईथे, बेटी दाई, ददा ल बिल्कुल भूल गे । सारंगढ़ जाय के बाद । चन्द्रकला कईथे नहीं बाबूजी । कईसे भूल जाहवं ।

चन्द्रकला कईथे, बाबूजी कमरा ल खोल के साफ कर दे । आज रूकिहंव । रामदेव कमरा खोल दे शाफ सफाई करथे । पलंग के चादर ल झर्रा के बिछा देथे । चन्द्रकला हाथ मुँह धोके तियार होथे । सेठ जी आ जाथे । मालूराम कईथे, फोन नई करे । अभी अभी तो आंय हंव अभी बाबू जी ल भेज के बुलातेंव । मालूराम कईथे बहुत दिन होगे । संग म भोजन नई करे हंव । चन्द्रकला कईथे, नहीं दाई के हाथ के भोजन बहुत दिन होगे खायेंव । यदि घर म नई खाहव नाराज हो जाही । चन्द्रकला कईथे, कुछ मिठाई लाय हच दे । सेठजी मिठाई अऊ आलू गुंडा निकारिच । दूनों झन बईठ के खाईन । रमोदीन पानी के गिलास छोड़ के चल दिस ।

चन्द्रकला कईथे दाई बांचे ल ले जा । रमौतीन बांचे ले जाथे । चन्द्रकला अऊ रमौतीन खाए लगथे । जरूर दीदी आय होही । दूनो के टपाटप पाँव छूथे । चन्द्रकला कईथे, सेठ जी ऐकरो नौकरी नई लगवा देते । मालूराम कईथे, कहाँ लगावव, नगरपालिका म विरोधी मन बईठ गेहे । रोजिना धमा चौकड़ी मचाय हे । मोर कार्यकाल के जांच करावत हे, सिकायत ऊपर सिकायत करते हे । चन्द्रकला कईथे जाँच म सब ठीक हो जाहय ।

मालूराम कईथे, विधानसभा के चुनाव होवईया हे । टिक्ट के लिये भोपाल चलना हे । चन्द्रकला बताथे । मय रोजाना के अनुसार गाँव, गाँव म महिला मंडल बनवा देहंव । लगभग एक हजार महिला सदस्य बन गे हे । मालूराम कईथे, जतक महिला मंडल हे सब ला ढोलक मंजीरा बर पईसा देबे । दस हजार रूपिया ले जा । चन्द्रकला कईथे ठईक हे । महिला मन से माँग पत्र भी बनवा लेंथव । हस्ताक्छर कराके, इंदिरा जी ल आवेदन पत्र दे देबो । मालूराम कईथे, पंच, सरपंच से लिखवा लेबे । काम बढ़िया करत हे । महिला जागृति, नारी ससक्तिकरण के काम करत हे सराहनीय कार्य हे । गाँव-गाँव महिला मंडल से प्रस्तान अऊ सरपंच के अनुसंसा करवा ले । बाद म ऐती ओती करही । विधायक बने के योजना पूरा बन जाथे । चन्द्रकला कईथे, धन कहाँ से आही । मालूराम कईथे तंय धन के चिंता झन कर । चन्द्रकला बताथे । मोरपास 300 ग्राम सोना ईसा मसीह के क्रास हावय । ओला बेच के पईसा बना लेहंव । मालूराम कईथे तय पईसा के फिकर मत कर । यदि कांग्रेस के टिकिट मिलही त धन के कमी नई हे ।

रमौतीन दाई ह मस्त कढ़ी पकौड़ा अऊ आलू मटर बनाय रहय । पापड़ घलो गूंज ले रहय । चन्द्ररकला कईथे, आ भोजन कर लेथन । दूनों झन पीढ़हा म बईठ के जेवन जेथें । मस्त खाना खाके, गप मारत, सो जाते ।

चन्द्ररकला सूत उठके सारंगढ़ जाय के तियारी करथे । छुट्टी लेके आय नई रहय । रमौतीन कईथे बेटी एक दिन अऊ रूक जावव । टेलीफोन नगरपालिका म करदे । चन्द्ररकला मान जाथे । चन्द्ररकला अपन सहेली मनसे मिले बर तियारी करथे । मालूराम अपन घर चल देथे ।चन्द्रकला स्नान, नास्ता करके नगरपालिका कार्यालय जाथे । बड़े बाबू से मिलथे । सब कर्मचारी मन हाल चाल पूछथे । चन्द्ररकला सब ठीक ठाक हे । चन्द्ररकला कईथे, मय नौकरी छोड़ईया हंव । चुनाव लड़े के विचार हे । कर्मचारी संघ के साथी मन कईथे, ठीक हे चुनाव लड़, हमन प्रचार के जाबो । दू चार झन पटेल, अगरिया कर्मचारी मन कईथे, मेडम चुनाव लड़ हमन जितवाबो ।

रायगढ़ संदेश पेपर म चन्द्ररकला के चुनाव लड़े के इच्छा हे । नौकरी से इस्तीफा देके । चुनाब लड़ही कर्मचारी संघ जीतवाय के जिम्मे होत हे । रायगढ़ म चन्द्ररकला के ही चरचा, जिहां जावय, वहीं पूछय कब इस्तीफा देत हच । एम.ए. गफ्फार भाई सेवा निवृत होके फोटो स्टूडियो में बईठे रहय । समाचार पढ़े के सोचत रहय, मय भी चुनाव लड़हूँ चन्द्ररकला कईथे, गफ्फार चचा से बहुत दिन होगे मिले नई अंव । चन्द्ररकला मिले बर जाथे । चन्द्ररकला गफ्फार भाई के पाँव छुथे । सुखी रहो । विधायक बनो । आसीरबाद देथे । चन्द्ररकला कईथे, गफ्फार चचा मय आसीरवाद लेय आयेहंव । चाची कहाँ हैं ? अम्मा चाय लेके आ जाथे । गफ्फार भाई कईथे, चन्द्ररकला आय हे एक चाय अऊ लाव । अम्मा चाय लेके आ जाथे । तीनों बैठकर चाय पीथे । चन्द्ररकला बेटी जब से सारंगढ़ गय हच । तब से आज आय हच । हाँ चाची काल ही आय हंव । अम्मा कईथे, बेटी जल्दी विधायक बन हमारों कोनो काम हो ही । चचा चाची विधायक बने के आसीरबाद देथे । चन्द्ररकला सीधा घर चल देथे ।

चन्द्ररकला ल धियान आथे कि पुस्पा मम्मी ले उज्जैन बात करना हे । टेलीफोन करे तार घर जाथे । फोन घटिया तहसील बहुत मुस्किल से लगथे । चन्द्रप्रकास के सादी नई होय के चिन्ता पुस्पा ल सतावत रईथे । बाप ईसाई होये के कारण कोई ब्राम्हन मन लड़की देय म तियार नई होईन । पुस्पा निरास हो जाथे । चन्द्ररकला ल कईथे, बेटी, कोई जात के अच्छी लड़की देख सादी कर देबो । चन्द्ररकला कईथे, हाँ माँ ऐ साल जरूर सादी करबो । पुस्पा ल पूरनिमा के लड़का जबलपुर म होय के जानकारी देथे । पुस्पा कईथे मय जल्दी सारंगढ़ रायगढ़ आवत हंव । चन्द्ररकला परनाम करके फोन रख देथे । रात रूक के चन्द्ररकला सुबह बस बईठ के सारंगढ़ चल देथे ।



क्रमशः.....

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